24 News Update तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन। वैश्विक ऊर्जा बाजार और भू-राजनीति के केंद्र में खड़े मध्य-पूर्व से शुक्रवार को राहत और तनाव—दोनों तरह के संकेत एक साथ सामने आए। ईरान ने रणनीतिक समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट को खोलते हुए सभी वाणिज्यिक जहाजों को गुजरने की अनुमति दे दी, जिसके तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई।रॉयटर्स के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड करीब 11.2% गिरकर 88.27 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड लगभग 12% लुढ़ककर 83.29 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। यह गिरावट इस बात का संकेत है कि वैश्विक सप्लाई चेन में आई रुकावट अब कुछ हद तक सामान्य होने की उम्मीद जगी है।सीजफायर के बीच ईरान का बड़ा दांवलेबनान में युद्धविराम लागू होने के बाद ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने घोषणा की कि होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों के लिए सुरक्षित कॉरिडोर तय किया गया है। उन्होंने कहा कि समुद्री व्यापार प्रभावित न हो, इसके लिए हर जहाज की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी।ध्यान देने वाली बात यह है कि दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है, ऐसे में इसका खुलना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। ट्रम्प का ‘धन्यवाद’, पर दबाव बरकरारइस घटनाक्रम पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को धन्यवाद देते हुए कूटनीतिक संकेत जरूर दिए, लेकिन साथ ही साफ कर दिया कि अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी अभी खत्म नहीं होगी।ट्रम्प ने कहा कि यह नाकेबंदी केवल ईरान पर लागू रहेगी और तब तक जारी रहेगी, जब तक दोनों देशों के बीच संभावित समझौता पूरी तरह अंतिम रूप नहीं ले लेता। परमाणु मुद्दे पर फिर गरमाई बहसट्रम्प ने दावा किया कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम को सौंपने के लिए तैयार है, हालांकि तेहरान ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। अंतरराष्ट्रीय एजेंसी IAEA के अनुसार ईरान के पास 5 से 6 टन तक एनरिच्ड यूरेनियम मौजूद है, जिसमें से एक हिस्सा 60% तक संवर्धित है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि यह स्तर 90% तक पहुंचता है, तो परमाणु हथियार बनाने की क्षमता विकसित हो सकती है—यही कारण है कि अमेरिका और इजराइल लगातार दबाव बनाए हुए हैं। सीजफायर: स्थायी शांति या रणनीतिक विराम?इजराइल और लेबनान के बीच 10 दिन का युद्धविराम लागू हुआ है, लेकिन इसके साथ कई शर्तें जुड़ी हैं। इजराइल को आत्मरक्षा का अधिकार बरकरार रखा गया है, जबकि लेबनान सरकार पर हिजबुल्लाह को नियंत्रित करने का दबाव है। इस बीच, क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य गतिविधियां भी तेज बनी हुई हैं, जो संकेत देती हैं कि हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं।भारत सहित दुनिया की निगाहें टिकींभारत समेत दुनिया के कई देश इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और वैश्विक बाजार सीधे तौर पर इससे प्रभावित होते हैं। भारत ने अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए अभियान तेज किया है और हालात पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश: राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज कर CBI जांच के निर्देश मिर्जापुर हाईवे पर मौत का तांडव: ब्रेक फेल ट्रक ने मचाई तबाही, 11 की दर्दनाक मौत, 9 जिंदा जले