– पर्युषण महापर्व के तीसरे दिन आराधना भवन में उमड़े सैकड़ों श्रावक-श्राविकाएं– आठ दिन तक धूमधाम से आयोजित हो रही है विविध धार्मिक क्रियाएं 24 News Update उदयपुर, 10 सितम्बर। श्री जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक श्रीसंघ के मालदास स्ट्रीट स्थित आराधना भवन में इन दिनों धर्म, तप और साधना का वातावरण बना हुआ है। आचार्यदेव श्रीमद् विजय प्रशमेशप्रभ सूरीश्वर महाराज, मुनिराज नीतिप्रभ विजयजी महाराज एवं साध्वी श्रुतवर्धना श्रीजी महाराज आदि ठाणा की पावन निश्रा में आठ दिवसीय पर्युषण महापर्व के विविध धार्मिक आयोजन श्रद्धा एवं भक्ति के साथ किए जा रहे हैं। आराधना भवन में प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-अर्चना, सामायिक, प्रतिक्रमण, तप-साधना, स्वाध्याय एवं प्रवचन सहित विभिन्न धार्मिक गतिविधियां आयोजित हो रही हैं। इनमें बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं सहभागी बनकर धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं। पर्युषण महापर्व के दौरान आराधना भवन में सुबह से ही धार्मिक गतिविधियों का क्रम शुरू हो जाता है और दिनभर श्रद्धालु भक्ति एवं साधना में लीन रहते हैं।श्रीसंघ के कोषाध्यक्ष राजेश जावरिया ने बताया कि श्वेतांबर समाज के आठ दिवसीय पर्युषण महापर्व के तीसरे दिन भी आराधना भवन में विशेष धार्मिक आयोजन हुए। आचार्यदेव श्रीमद् विजय प्रशमेशप्रभ सूरीश्वर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि पर्वाधिराज श्री पर्युषण पर्व का तीसरा दिन अनादि काल से जिनेश्वर भगवंतो के शासन में अपने भारत क्षेत्र में श्री पर्युषण पर्व को शाश्वत रूप से मनाते है। साध्वी जयदर्शिता श्रीजी ने कहा तीसरे दिन के 1 कर्तव्य हर एक श्रावक को करने आवश्यक है पर्वाधिराज श्री पर्युषण पर्व का तीसरा दिन आज के दिन का सिर्फ़ 1 कर्तव्य वह है 19 पौषध व्रत, जो श्री पर्युषण पर्व अपन मनाने जा रहे है आत्मा को पावन करने वाली यात्रा शुरू करते है। यह जीवन यात्रा मे जीवन को पूर्ण रूप से सरलीकरण करने के लिये आपका दिन बहुत महत्वपूर्ण है कारण के आज आपको अगर सर्व विरति स्वरूप साधु जीवन नहीं मिलता तो क्या करना चाहिये। तो आज का कर्तव्य है पौषध व्रत उदायन महाराजा ने जैसे पौषध व्रत किया उन पौषध व्रत के प्रभाव से और भावना के प्रभाव से भगवान महावीर देव स्वयं उग्र विहार करके नगरी में पधारे यह सुनते ही उदायन महाराजा ने भावभरा स्वागत किया। प्रभु की देशना सुनी और उदायन महाराजा अंतिम राजर्षि ने दुनिया छोड़ के दीक्षा ली। आप सब भी दीक्षा लेने की भावना करो यही मेरे अंतर की मनोकामना। पौषध व्रत के विषय में कहा कि जिन के साथ चलना, बैठना, सोना, खाना, पीना बोलना हमें पाप कर्म बंधनों से मुक्त करता है यानी कि मनुष्य का आचरण एवं व्यवहार आदि विवेक जागरण से युक्त है तो पाप का बंध नहीं होता है। विवेक का जीवन में समावेश ही सच्चा जागरण है, सच्ची जागृति है। विवेक ही जीवन में जागृति का शंखनाद फूंक देता है। पर्युषण महापर्व विवेक जागरण करता है, जिससे सारा जीवन बुराइयों से रहित होकर प्रतिदिन, प्रतिपल आध्यात्मिक आनन्द का उत्सव बने। व्रत पौषध यानि पुष्टि जो व्रत धर्म को परिपुष्ट करता है उसे व्रत करते है। पर्व तिथियों में पांच सुत्र आवश्यक रूप से करना चाहिए ऐसा शास्त्रीय निर्देश है। यह पोषध इत तो नित्य करणीय है, किन्तु यदि किन्ही कारणों से प्रतिदिन करना संभव न हो तो हर माह की चतुदर्शी, पर्व की तिथियां और पर्युषण महापर्व में अनिवार्यत: करना चाहिए। परिपूर्ण पौष यानि कि उपवास करके अष्ट प्रहर तक आत्मनिरीक्षण, मात्म-मनन, आत्म चिंतन धर्म ध्यान करना परिपूर्ण पौषध कहलाता है। इस पौषध व्रत में चार प्रकार का त्याग अनिवार्य है शरीर-श्रृंगार, ब्रह्मचर्य का पालन, आहार तथा सांसारिक व्यापार।इस अवसर पर श्रीसंघ के डॉ. शैलेन्द्र हिरण, कोषाध्यक्ष राजेश जावरिया, राजकुमार बापना, नरेंद्र सिंघवी, भोपाल सिंह सिंघवी, मनीष दोशी, अभिषेक हुमड़, अशोक सेठ, प्रकाश गांधी, राकेश चेलावत, अशोक जैन, राजेंद्र कोठारी सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation धर्म की शरण में भय का अंत, संयम से क्रोध और अहंकार पर विजय : मुनि अरहसागर महाराज बिग ब्रेकिंग : नगर निगम के भूखंड घोटाले में विपिन कोठारी गिरफ्तार, फर्जी दस्तावेजों से लीज डीड जारी कराने का आरोप