24 News Update नई दिल्ली/टोक्यो। अगर किसी का टूटा या गिरा हुआ दांत दोबारा प्राकृतिक रूप से उग जाए तो यह किसी चमत्कार से कम नहीं होगा। लेकिन जापान के वैज्ञानिक अब इस कल्पना को हकीकत में बदलने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। जापानी शोधकर्ता ऐसी दवा विकसित कर रहे हैं, जो इंसानों में नए दांत उगाने की क्षमता को सक्रिय कर सकती है। इस दवा का मानवों पर परीक्षण भी शुरू हो चुका है और शुरुआती नतीजों को लेकर वैज्ञानिक काफी उत्साहित हैं।

जापान की बायोटेक कंपनी Toregem BioPharma और शोधकर्ताओं की टीम एक ऐसी दवा पर काम कर रही है, जिसका उद्देश्य उन लोगों में नए दांत विकसित करना है जिनके दांत जन्म से नहीं होते या किसी कारणवश टूटकर गिर चुके हैं। कंपनी ने हाल ही में इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए 53 लाख डॉलर (करीब 44 करोड़ रुपये) की नई फंडिंग भी जुटाई है।

कैसे काम करेगी यह दवा?

वैज्ञानिकों के अनुसार इंसानों में दो सेट दांत विकसित होते हैं, लेकिन शरीर में एक तीसरे सेट की संभावना भी छिपी होती है। सामान्य परिस्थितियों में USAG-1 नामक प्रोटीन इस प्रक्रिया को रोक देता है। जापानी शोधकर्ताओं ने ऐसी दवा विकसित की है जो इस प्रोटीन को निष्क्रिय कर देती है। इसके बाद मसूड़ों के भीतर मौजूद निष्क्रिय दंत कोशिकाएं सक्रिय होकर नए दांत विकसित कर सकती हैं।

जानवरों पर मिल चुकी है सफलता

शोधकर्ताओं ने चूहों, फेर्रेट और अन्य जानवरों पर परीक्षण किए हैं। इन प्रयोगों में नए दांत विकसित होने के सकारात्मक परिणाम सामने आए। इसी सफलता के बाद मानव परीक्षणों की शुरुआत की गई।

मानव परीक्षण का दौर शुरू

जापान के क्योटो यूनिवर्सिटी अस्पताल में इस दवा के मानव परीक्षण शुरू हो चुके हैं। शुरुआती चरण में उन वयस्कों को शामिल किया गया है जिनके एक या अधिक दांत नहीं हैं। वैज्ञानिक फिलहाल दवा की सुरक्षा और संभावित दुष्प्रभावों का अध्ययन कर रहे हैं। यदि यह चरण सफल रहता है तो आगे उन बच्चों पर परीक्षण किए जाएंगे जो जन्म से कुछ दांतों के बिना पैदा होते हैं।

2030 तक बाजार में आने की उम्मीद

इस परियोजना का नेतृत्व कर रहे जापानी वैज्ञानिक डॉ. कात्सु ताकाहाशी का कहना है कि दांतों को दोबारा उगाने की तकनीक दंत चिकित्सा में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि यदि सभी परीक्षण सफल रहे तो यह उपचार वर्ष 2030 तक आम लोगों के लिए उपलब्ध हो सकता है।

दंत चिकित्सा की दुनिया में बड़ा बदलाव

वर्तमान में दांत टूटने या गिरने पर मरीजों को डेंचर, ब्रिज या डेंटल इम्प्लांट का सहारा लेना पड़ता है। यदि यह दवा सफल होती है तो मरीज अपने ही शरीर से प्राकृतिक दांत दोबारा विकसित कर सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे दंत चिकित्सा की पूरी तस्वीर बदल सकती है और लाखों लोगों को फायदा मिल सकता है। हालांकि वैज्ञानिक यह भी स्पष्ट कर रहे हैं कि दवा अभी परीक्षण के दौर में है और इसकी प्रभावशीलता तथा दीर्घकालिक सुरक्षा को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकलना बाकी है। इसलिए इसे फिलहाल एक संभावित वैज्ञानिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है, न कि उपलब्ध उपचार के रूप में।

फैक्ट बॉक्स

दवा का नाम: TRG-035 (प्रायोगिक)
विकसित कर रही कंपनी: Toregem BioPharma, जापान
लक्ष्य: प्राकृतिक रूप से नए दांत उगाना
तकनीक: USAG-1 प्रोटीन को ब्लॉक करना
स्थिति: मानव परीक्षण जारी
संभावित उपलब्धता: 2030 के आसपास


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By desk 24newsupdate

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