24 News Update सागवाड़ा, 28 अगस्त (जयदीप जोशी)। श्रावण मास के तहत नगर के सलाटवाड़ा में स्थित सोमनाथ महादेव मंदिर, गमलेश्वर महादेव मंदिर, पेट्रोल पंप के पास स्थित महादेव मंदिर, लोहारिया तालाब पाल पर स्थित महादेव मंदिर सहित आसपास गांवों में स्थित महादेव के मंदिर में भक्तों द्वारा पूजा-अर्चना की गई।नगर के सलाटवाड़ा स्थित सोमनाथ महादेव मंदिर में प्रतिदिन सोमपुरा समाज के प्रत्येक घर से एक यजमान के रूप में आचार्य के मंत्रोच्चारण के साथ चार-चार यजमानों को महादेव का अभिषेक व पूजन कराया जा रहा है। साथ ही नगर के गमलेश्वर महादेव मंदिर में प्रतिदिन प्रातः से पूजा करने वाले भक्तों का तांता लगा रहता है। साथ ही नगर निकटवर्ती ठाकरड़ा सिद्धनाथ मंदिर, गोरश्वर महादेव मंदिर, हडमाला दूधेश्वर महादेव मंदिर, वांदरवेड नीलकंठ महादेव सहित आसपास गांवों में स्थित महादेव मंदिर में श्रावण मास के चलते दिनभर पूजा-अर्चना की जा रही है। समय नित्य परिवर्तनशील है- संत कीर्तिराम महाराजसागवाड़ा, 28 अगस्त (जयदीप जोशी)। नगर के आसपुर मार्ग पर लोहारिया तालाब के सामने स्थित कान्हड़दासधाम रामद्वारा में चातुर्मास के दौरान शाहपुरा धाम के रामस्नेही संत कीर्तिराम महाराज ने सत्संग में बताया कि समय नित्य परिवर्तनशील है। ऋतुएं आती-जाती रहती हैं, जगत में स्वभावतः विभिन्नताएं, विचित्रताएं और अनेक रूपताएं हैं। कुछ भी एक जैसा और स्थिर नहीं है। नई परिस्थितियों के साथ स्वयं को ढालना सीखें।संत ने कहा सिद्धांत और जीवन मूल्यों का कभी परित्याग न करें। यही जीवन को सार्थक और सुंदर बनाता है! इस मरणधर्मा संसार की भांति यहां के वस्तु-पदार्थ भी नाशवान हैं। इंद्रियां और मन जिन विषयों में आसक्त हैं, वे सभी विषय और उनके रस एक जैसे नहीं हैं। सभी विषय मिटते रहते हैं, बदलते रहते हैं और दृश्य खोते रहते हैं। जीवन का परम लक्ष्य यथार्थ बोध ही है। इसलिए सत्संग का आश्रय लेकर अपने अस्तित्व को अनुभूत करने का प्रयत्न करना चाहिए। शरीर, मन, बुद्धि की सीमाओं से पृथक होकर आत्मा की दिव्यता का अनुभव हमारी प्राथमिकता बने।एक स्वस्थ, शुद्ध मन सुख, शांति और आनंद का स्रोत है। सच्ची प्रगति के लिए लक्ष्य के प्रति सचेत रहें। आध्यात्मिक प्रयासों को सक्रियता प्रदान करें। भविष्य की चुनौतियों का चिंतन कर नए लक्ष्य बनाएं और अच्छे चरित्र का निर्माण करें। हमें धार्मिक नहीं, आध्यात्मिक बनना है। अध्यात्म एक जीवन निर्माण का मूल सूत्र है, दिशा है, पथ है। अध्यात्म के बिना मानव जीवन अधूरा है। अध्यात्म से जीवन की यात्रा होती है- सुगम और सरल।जिस व्यक्ति के जीवन में अध्यात्म हो और आदर्श महापुरुषों के प्रेरक जीवन चरित्र, उनके संघर्ष की कहानियां व उनके त्याग व साहस का स्वाध्याय हो तो उसे भीतर से सकारात्मक ऊर्जा का बल प्राप्त होता है। मानव मात्र के लिए अध्यात्म महत्वपूर्ण है। जीवन की शुरुआत संस्कारों से होती है और संस्कार हमें अध्यात्म से मिलते हैं। अध्यात्म मानव कल्याण का आधार है। इसमें सम्पूर्ण ज्ञान, विज्ञान का मूल समाया है। आत्मशांति बाजार में नहीं मिलती। भौतिक सुख क्षणिक है। संस्कार का सिंचन नीचे से ऊपर जाएगा तो ही समाज समृद्ध होगा।संत ने कहा कि इस नश्वर जगत में परमात्मा ही सम्पूर्णता, श्रेष्ठता और दिव्यता के स्रोत हैं। उस परिपूर्ण अखंड-आनंद निर्विशेष परमात्मा से स्वयं की अभिन्नता-अभेदता के अनुभव की स्थिरता अध्यात्म का उच्चतम लक्ष्य है। आध्यात्मिक विचार परिपक्व होते ही जीवन में आनंद-माधुर्य, ऐश्वर्य-सौंदर्य आदि दिव्यताएं स्वतः स्फुरित होने लगती हैं। अध्यात्म जीवन पूर्ण निस्वार्थ होता है। आध्यात्मिक विचारों के अभाव में व्यक्ति पथ-भ्रष्ट हो जाता है। अधिक सांसारिक ज्ञान अर्जित करने से अहंकार आ सकता है, परंतु आध्यात्मिक ज्ञान जितना अधिक अर्जित करते हैं, उतनी ही विनम्रता आती है।संत प्रसाद भरतलाल सुथार परिवार का रहा। सत्संग में समिति प्रवक्ता बलदेव सोमपुरा, प्रद्युम्न शाह, विनोद कोठारी, बालकृष्ण सोमपुरा, भारत शर्मा, सुरेश ठाकुर, विजय पांचाल, विष्णु सेवक, विष्णु भासरिया, सुरेंद्र शर्मा, मंजुला सोमपुरा, प्रेमलता सुथार, राजेश्वरी शर्मा के अतिरिक्त कई महिलाएं एवं पुरुष उपस्थित रहे। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation श्रावणी उपाकर्म पर ब्राह्मण समाज ने किया आत्मशुद्धि का पर्व सम्पन्न पुलिस के जवानों ने नगर में निकाला फ्लैग मार्च