रिपोर्ट —जयवंत भैरविया 24 News Update उदयपुर। शहर की प्यास बुझाने की जिम्मेदारी जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के कंधों पर है। PHED दो नगर खंडों और सात उपखंडों के जरिए हर दिन लाखों लोगों तक पेयजल पहुंचाता है। लेकिन तेजी से बढ़ती आबादी, शहर के विस्तार, सीमित फिल्टर क्षमता और वर्षों से लंबित परियोजनाओं के कारण यह व्यवस्था अब अपनी सीमा तक पहुंचती नजर आ रही है। हालात ऐसे हैं कि शहर की प्रतिदिन 142 MLD पानी की मांग के मुकाबले विभाग केवल 116 MLD पानी की औसत सप्लाई कर पा रहा है, जबकि शहर के सभी फिल्टर प्लांटों की कुल क्षमता 109.12 MLD ही है। यानी विभाग कई जगह अपनी स्थापित क्षमता से अधिक उत्पादन कर शहर की जरूरत पूरी करने की कोशिश कर रहा है। शहर की जरूरत से पीछे छूट रही जलापूर्ति व्यवस्थाशहर की जलापूर्ति व्यवस्था का पहला हिस्सा नगर खंड प्रथम है, जिसके अंतर्गत चार नगर उपखंड आते हैं। नगर उपखंड प्रथम में प्रतिदिन औसतन 28 MLD पानी की जरूरत है, जबकि 26.02 MLD पानी ही उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके लिए जयसमंद झील से 18 MLD, पिछोला झील से 8 MLD तथा शहर के 8 ओपनवेल और 18 बावड़ियों से करीब 0.2 MLD पानी लिया जाता है। नगर उपखंड द्वितीय में 10 MLD की मांग के मुकाबले 9.5 MLD पानी उपलब्ध कराया जाता है और इसकी पूरी आपूर्ति पिछोला झील से होती है। नगर उपखंड तृतीय में प्रतिदिन 12 MLD पानी की जरूरत है, लेकिन 8.5 MLD ही मिल पाता है। इसमें 7 MLD पानी पिछोला झील तथा 1.5 MLD गुलाबबाग की बावड़ियों से आता है। नगर उपखंड चतुर्थ की स्थिति और चुनौतीपूर्ण है, जहां करीब 20 MLD की मांग के मुकाबले केवल 14 MLD पानी की सप्लाई हो रही है। यहां पिछोला झील से 7 MLD, खरबड़िया और झामरकोटड़ा के नलकूपों से 7 MLD तथा सेक्टर-7 के खुले कुओं से लगभग 0.4 MLD पानी लिया जाता है। नगर खंड प्रथम: चार उपखंडों पर शहर के पुराने हिस्से की जिम्मेदारीनगर खंड प्रथम के अंतर्गत पांच प्रमुख फिल्टर प्लांट संचालित हैं। पटेल सर्कल फिल्टर प्लांट की क्षमता प्रतिदिन 7.5 MLD है, लेकिन यहां 8 MLD से अधिक पानी फिल्टर किया जा रहा है। तीतरड़ी फिल्टर प्लांट की क्षमता 13.54 MLD है, जबकि यहां 19 MLD से अधिक उत्पादन हो रहा है। दूधतलाई फिल्टर प्लांट की कुल क्षमता 16.37 MLD (13.52 और 2.85 MLD) है, जबकि यहां वर्तमान में 9.5 MLD उत्पादन हो रहा है। गुलाबबाग फिल्टर प्लांट की कुल क्षमता 6.81 MLD (4.54 और 2.27 MLD) है और यहां करीब 6 MLD पानी फिल्टर किया जा रहा है। माछला मगरा फिल्टर प्लांट की क्षमता 23.3 MLD है और यह अपनी निर्धारित क्षमता के अनुरूप कार्य कर रहा है। क्षमता से ज्यादा काम कर रहे फिल्टर प्लांटशहर की जलापूर्ति का दूसरा बड़ा हिस्सा नगर खंड द्वितीय संभालता है, जिसके अंतर्गत तीन नगर उपखंड आते हैं। नगर उपखंड पंचम में प्रतिदिन 21.59 MLD मांग के मुकाबले 14.44 MLD पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। हालांकि इस उपखंड के लिए मानसी वाकल डैम से प्रतिदिन 31 MLD, फतेहसागर झील से 5.1 MLD तथा बड़ी तालाब से 0.15 MLD पानी लिया जाता है। गर्मियों के तीन महीनों में बड़ी तालाब से लगभग 300 MLD अतिरिक्त पानी भी लिया जाता है। नगर उपखंड षष्ठम में प्रतिदिन लगभग 16.23 MLD पानी की जरूरत है, लेकिन केवल 12 MLD पानी की सप्लाई हो रही है। सामान्य दिनों में यहां फतेहसागर झील से 12 MLD पानी लिया जाता है, जबकि गर्मियों में फतेहसागर से 6 MLD और बड़ी तालाब से 7.92 MLD पानी लिया जाता है। नगर उपखंड सप्तम में प्रतिदिन करीब 20 MLD की मांग है, जबकि 16 MLD पानी ही उपलब्ध हो पा रहा है। नगर खंड द्वितीय में भी मांग और सप्लाई के बीच बड़ा अंतरनगर खंड द्वितीय के अंतर्गत तीन फिल्टर प्लांट संचालित हैं। नीमच माता फिल्टर प्लांट की क्षमता 11.35 MLD है और यहां पूरी क्षमता के अनुरूप उत्पादन एवं सप्लाई हो रही है। फतेहसागर फिल्टर प्लांट की क्षमता 6.75 MLD है और यहां भी पूरी क्षमता के अनुसार पानी फिल्टर किया जा रहा है। वहीं नांदेश्वर फिल्टर प्लांट की क्षमता 23.50 MLD है, लेकिन यहां प्रतिदिन 29 MLD तक पानी फिल्टर किया जा रहा है, जो इसकी निर्धारित क्षमता से काफी अधिक है। नांदेश्वर समेत कई फिल्टर प्लांटों पर बढ़ा अतिरिक्त भारयदि शहर के जल स्रोतों की बात करें तो पिछोला झील की कुल भराव क्षमता 483.60 MCFT, फतेहसागर झील की 417 MCFT, मानसी वाकल डैम की 24.4 मिलियन घनमीटर यानी 861.66 MCFT तथा जयसमंद झील की 14,650 MCFT है। इसके अलावा देवास प्रथम के अलसीगढ़ बांध की क्षमता 126 MCFT, जबकि देवास द्वितीय के अकोदड़ा बांध और मादड़ी बांध की क्षमता क्रमशः 302 MCFT और 85 MCFT है। तकनीकी रूप से 1 MLD प्रतिदिन 10 लाख लीटर पानी के बराबर होता है। वहीं 1 MLD लगभग 0.035315 MCFT, 1 MCFT लगभग 28.31 MLD तथा 1 MCM लगभग 35.314 MCFT के बराबर माना जाता है।वर्तमान में शहर के लिए प्रतिदिन औसतन पिछोला झील से 36 MLD, फतेहसागर झील से 15 MLD, जयसमंद झील से 20.5 MLD, मानसी वाकल डैम से 31.5 MLD तथा अन्य जल स्रोतों से करीब 13 MLD पानी लिया जा रहा है। इन्हीं स्रोतों के सहारे पूरे शहर की जलापूर्ति की जाती है।इन्हीं झीलों और बांधों पर टिकी है उदयपुर की प्यासPHED अधिकारियों के अनुसार नगर उपखंड प्रथम में जयसमंद से आने वाली जलापूर्ति कई बार पंप फेल होने के कारण प्रभावित होती है। नगर उपखंड द्वितीय और तृतीय में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत पाइपलाइन नेटवर्क मजबूत होने से लगभग शत-प्रतिशत मांग पूरी की जा रही है। नगर उपखंड चतुर्थ में तेजी से बढ़ी आबादी के कारण वर्तमान जलापूर्ति पर्याप्त नहीं रह गई है। नगर उपखंड पंचम में वर्ष 2007 की मानसी वाकल योजना अब वर्ष 2026 में केवल लगभग 90 प्रतिशत जरूरत ही पूरी कर पा रही है। इसी प्रकार षष्ठम उपखंड में भी जनसंख्या वृद्धि के कारण मांग के अनुरूप पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। सबसे अधिक दबाव सप्तम उपखंड पर है, जो पूरी तरह जयसमंद पर निर्भर है। यहां मौजूदा 20 MLD के स्थान पर 40 MLD पानी की आवश्यकता है, जिससे चौथे और सातवें दोनों उपखंडों को पर्याप्त राहत मिल सकती है। इसके लिए जयसमंद से 40 MLD पानी लाने की परियोजना तैयार की गई थी, लेकिन 15 सितंबर 2022 से स्थानीय लोगों के विरोध के कारण पाइपलाइन का काम अधूरा पड़ा है। चार साल बीतने के बावजूद यह परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी है। यदि यह योजना पूरी हो जाए तो शहर के सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों की जलापूर्ति में बड़ा सुधार हो सकता है।दो नए फिल्टर प्लांट स्थापित करने की तैयारीविभाग भविष्य की जरूरतों को देखते हुए अंबावगढ़ और दूधतलाई में दो नए फिल्टर प्लांट स्थापित करने की तैयारी कर रहा है। इनकी टेंडर प्रक्रिया चल रही है और इन्हें देवास-3 तथा देवास-4 परियोजना के साथ पूरा किया जाएगा। देवास-3 और देवास-4 के लिए PHED ने करीब 1700 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई है। विभाग का मानना है कि आने वाले वर्षों में केवल नई पाइपलाइन या फिल्टर प्लांट पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि जल संसाधन विभाग को नए बांध और नए जल स्रोत विकसित करने होंगे। कब तक पहुंचेगा अमृत योजना का अमृतदूसरी ओर अमृत 2.0 योजना भी अब शहर की मौजूदा जरूरतों के अनुरूप नहीं रह गई है। यह योजना नगर निगम के पुराने 70 वार्डों को ध्यान में रखकर बनाई गई थी, लेकिन अब निगम क्षेत्र के विस्तार के बाद बेदला, बड़गांव, भुवाणा और शोभागपुरा जैसे नए क्षेत्र भी इसमें शामिल हो चुके हैं। इससे पानी की मांग पहले के अनुमान से कहीं अधिक बढ़ गई है। योजनाओं में देरी बनी सबसे बड़ी चुनौतीकुल मिलाकर उदयपुर की जलापूर्ति व्यवस्था फिलहाल विभाग के अतिरिक्त प्रयासों और क्षमता से अधिक काम कर रहे फिल्टर प्लांटों के सहारे चल रही है। लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर योजनाओं के निर्णय, स्वीकृति और क्रियान्वयन में होने वाली देरी के कारण कई परियोजनाएं पूरी होने तक अपनी मूल उपयोगिता खोने लगती हैं। तेजी से बढ़ती आबादी और शहर के विस्तार को देखते हुए यदि जयसमंद 40 MLD परियोजना, देवास-3 एवं 4, नए फिल्टर प्लांट और अन्य जल स्रोतों के विकास पर समयबद्ध तरीके से काम नहीं हुआ, तो आने वाले वर्षों में उदयपुर की पेयजल व्यवस्था पर दबाव और बढ़ना तय है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) 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