24 News Update उदयपुर। हमारी भर्ती परीक्षाएं करवाने वाली एजेंसिया इतनी ढीठ और कामचोर हो गई हैं कि अब कोर्ट में भी अजीब दलीलें देने लगी हैं। एएसआई भर्ती परीक्षा के रद्द होने के बाद नियमों से विपरीत जाकर खुलेआम मनमानी करते हुए आरपीएससी ने केवल उन परीक्षार्थियों को नई परीक्षा में मौका दिया जो रद्द हुई परीक्षा में शामिल हुए थे। इस पर राजस्थान हाईकोर्ट में सब-इंस्पेक्टर (एसआई) भर्ती-2021 की पुन: परीक्षा पर याचिता लेकर परीक्षार्थी गए व कोर्ट से कहा कि किसी कारणवश ने परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए थे, उनको राहत दी जाए। आज सुनवाई के बाद जस्टिस आनंद शर्मा की अदालत ने आरपीएससी को निर्देश दिए कि वे सभी याचिकाकर्ताओं को फॉर्म एडिट का मौका देकर प्रोविजनली परीक्षा में शामिल करें। प्रश्नजीत सिंह, देवेंद्र सैनी, मधुसूदन शर्मा और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिए गए।आरपीएससी ने एसआई भर्ती-2021 को रद्द करते हुए 8 मई को फिर से परीक्षा कराने का ऐलान किया था। आरपीएससी ने कोर्ट में अजीब तर्क दिया कि 4 लाख फॉर्म का इंस्पेक्शन मुश्किल है जिन्होंने मूल परीक्षा में केवल एप्लीकेशन फॉर्म भरा था, लेकिन परीक्षा नहीं दी थी। कई अभ्यर्थी अन्यत्र नौकरी लग चुके होंगे। कई अभ्यर्थी परीक्षा की तैयारी छोड़ चुके होंगे। अगर हम सभी को अलाऊ करते हैं तो हमें 4 लाख फॉर्म की अतिरिक्त छंटनी करनी होगी, जो बहुत मुश्किल काम है। जबकि इसी आरपीएससी की करतूतों को एआई से जांचा जा रहा है। लाखों अभ्यर्थियों के डेटा की बारीकी से जांच चल रही है व मिनटों में पता लगाया जा रहा है किसके हस्ताक्षर मिल रहे हैं किसके नहीं, किसने डमी बिठाया किसके डेटा में अंतर है। मगर यहां पर वही आरपीएससी कोर्ट में बचकाने तर्क दे रही है। ऐसे में अभ्यर्थियों का कहना है कि आरपीएससी की बातों पर तरस आता है। अगर वहां पर सक्षम लोग नहीं बैठे हैं तो तुरंत बदल दिए जाएं। कहीं ऐसा तो नहीं कि आरपीएससी को यह आदेश हैं गुप्त रूप् से कि वे ऐसा कुछ करें कि वास्तविक हक रखने वालों को परीक्षा से वंचित रहने वालों को मौका ही ना मिले। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि इससे पहले भी ईओ-आरओ भर्ती, एलडीसी भर्ती सहित अन्य भर्तियों को रद्द करते हुए दोबारा परीक्षा इसी एजेंसी ने करवाई थी। अब कौनसा पहाड टूट गया हैं तब तो यह तर्क नहीं दिया कि डेटा कैसे जांचेंगे। सबको अवसर मिला था, अब ऐसा क्या हो गया है। एसआई भर्ती-2021 पुन: परीक्षा में ऐसा नहीं करना संविधान के अनुच्छेद 14 व 16 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन है।आयोग ने 8 मई को प्रेसनोट जारी करके मूल परीक्षा में दोनों पेपर देने वाले अभ्यर्थियों को ही 16 से 30 मई तक आवेदन एडिट करने का मौका दिया है। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को फॉर्म एडिट का मौका देते हुए प्रोविजनली परीक्षा में शामिल करने का आदेश दिया। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता रघुनंदन शर्मा, रामप्रताप सैनी, निखिल कुमावत और रविंद्र सैनी ने पैरवी की।आपको बता दें कि इस परीक्षा में 7.95 लाख अभ्यर्थियों ने फार्म भरा था। मगर 3 लाख 83 हजार 097 अभ्यर्थी ही बैठे थे। बाकी अभ्यर्थी में से जो कोर्ट के आदेश के लिए गए हैं, अब वे फार्म भर सकेंगे। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation डीएसपी सूर्यवीर सिंह और जब्ती अधिकारी जगदीश कुमार की कार्रवाई पर कोर्ट सख्त, आरोपियों को ‘मुर्गा’ बनाकर परेड कराना अमानवीय बताया उज्ज्वला कनेक्शन वालों, जाग जाओ, अब हर साल कराना होगा बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, नहीं तो गैस बंद!!!