डूंगरपुर, 27 सितंबर। दूसरों की जान बचाने के लिए आग से जंग लड़ने वाले डूंगरपुर के फायरकर्मी प्रीतेश परमार रविवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। जोधपुर के बासनी स्थित केमिकल फैक्ट्री में आग बुझाने के दौरान हुए ब्लास्ट में करीब 90 प्रतिशत झुलसे प्रीतेश ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। रविवार को उनके पैतृक गांव लांबाभाटड़ा, चुंडावाड़ा में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। प्रीतेश की अंतिम विदाई के लिए प्रदेशभर से अग्निशमन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी पहुंचे। करीब 25 अग्निशमन अधिकारियों सहित बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने उन्हें सैल्यूट कर श्रद्धांजलि दी। कर्तव्य निभाते हुए जान गंवाने वाले अपने साथी को विभागीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। अंतिम संस्कार के दौरान माहौल गमगीन रहा और परिजन व ग्रामीण भावुक नजर आए। साथियों ने दी अंतिम सलामी अंतिम संस्कार में जोधपुर के मुख्य अग्निशमन अधिकारी जलज घसिया और उदयपुर संभाग के मुख्य अग्निशमन अधिकारी बाबूलाल चौधरी सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से अग्निशमन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने प्रीतेश को अंतिम सलामी दी और पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। अग्निशमन विभाग की ओर से प्रीतेश के परिवार को दो लाख रुपए की आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई। यह सहायता उदयपुर संभाग के मुख्य अग्निशमन अधिकारी बाबूलाल चौधरी के नेतृत्व में विभाग की ओर से दी गई। अधिकारियों ने शोकाकुल परिवार को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। जिला प्रशासन की गैरमौजूदगी पर ग्रामीणों में नाराजगी प्रीतेश की अंतिम विदाई के दौरान डूंगरपुर जिला प्रशासन के किसी अधिकारी के मौजूद नहीं होने पर ग्रामीणों ने नाराजगी जताई। ग्रामीणों का कहना था कि प्रीतेश ने आमजन की सुरक्षा और अपनी ड्यूटी निभाते हुए जान गंवाई है। ऐसे में अंतिम संस्कार के दौरान जिला प्रशासन के अधिकारियों की मौजूदगी अपेक्षित थी। ग्रामीणों ने कहा कि जोधपुर में हुए हादसे के बाद घायलों को देखने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, उद्योग मंत्री झाबरमल खर्रा, केंद्रीय मंत्री सहित कई वरिष्ठ अधिकारी जयपुर के महात्मा गांधी अस्पताल पहुंचे थे। ग्रामीणों के अनुसार, इसके विपरीत डूंगरपुर जिले की सीमा में प्रीतेश के पार्थिव शरीर के पहुंचने से लेकर अंतिम संस्कार तक प्रशासन की ओर से कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। ग्रामीणों ने इस बात को भी गंभीरता से उठाया कि जोधपुर हादसे में घायल 14 अग्निशमनकर्मियों में प्रीतेश पहली मौत थे और वे डूंगरपुर जिले के रहने वाले थे। ग्रामीणों ने प्रशासन से अग्निशमनकर्मियों के योगदान और उनके परिवारों के प्रति संवेदनशीलता दिखाने की मांग की। पिता की राह पर चला बेटा, अग्निशमन सेवा को बनाया अपना धर्म प्रीतेश परमार के परिवार का अग्निशमन सेवा से पुराना जुड़ाव है। उनके पिता धुलेश्वर परमार नगर परिषद डूंगरपुर की फायर ब्रिगेड में लीडिंग फायरमैन के पद पर सेवाएं दे रहे हैं। पिता को अग्निशमन सेवा में देखते हुए प्रीतेश ने भी इसी क्षेत्र को अपना कर्तव्य बनाया। आग की घटनाओं में दूसरों की जान-माल की सुरक्षा के लिए मोर्चे पर खड़े रहने वाले प्रीतेश ने आखिरकार ड्यूटी के दौरान अपने प्राण गंवा दिए। उनके निधन से परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे लांबाभाटड़ा-चुंडावाड़ा गांव में शोक का माहौल है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation डबल पावर के साथ गुप्ताजी की वापसी, बीपीएल को दो डस्टबीन मुफ्त, मिक्स कचरा दिया तो नहीं लेगा वाहन