महाराणा प्रताप का शासनकाल गुड गवर्नेंस और संसाधन प्रबंधन का प्रेरक मॉडल, इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट के विद्यार्थी लें प्रेरणा : भारती राज उदयपुर, 27 सितंबर। विद्या भवन पॉलिटेक्निक में आयोजित मेलजोल मेले में विद्यार्थियों की ‘दिवेर विजय’ नाट्य प्रस्तुति ने महाराणा प्रताप के संघर्ष और दिवेर के ऐतिहासिक प्रसंग को जीवंत कर दिया। गीत, संवाद, अभिनय और नृत्य के माध्यम से विद्यार्थियों ने इतिहास के इस महत्वपूर्ण अध्याय को प्रभावी ढंग से मंच पर प्रस्तुत किया। मेले के शुभारंभ अवसर पर आरएसएमएम लिमिटेड की वित्त सलाहकार एवं राजस्थान लेखा सेवा की वरिष्ठ अधिकारी भारती राज ने कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन और शासनकाल गुड गवर्नेंस, वित्त प्रबंधन, उपलब्ध संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग, मानव संसाधन के प्रभावी संयोजन, बेहतर नगरीय आयोजना तथा जल एवं प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन का प्रेरक उदाहरण है। इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट के विद्यार्थियों को प्रताप के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप केवल महान सेनानायक ही नहीं थे, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में संगठन, संसाधनों और शक्ति का कुशल संयोजन करने वाले व्यक्तित्व भी थे। युवाओं, खासकर जेन-जी को उनसे राष्ट्रभक्ति, नेतृत्व, संयम और जनसरोकार जैसे मूल्यों को सीखना चाहिए। भारती राज ने विद्यार्थियों से कहा कि वे खुली आंखों से सपने देखें और उन्हें उपलब्धियों में बदलने के लिए निरंतर मेहनत करें। उन्होंने कहा कि डिजिटल डिस्ट्रैक्शन के दौर में प्रेरक व्यक्तित्वों का अध्ययन युवाओं में लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता, संयम, त्याग, ईमानदारी और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। गीत, संवाद और नृत्य से दिखाया दिवेर का इतिहास कार्यक्रम में विद्या भवन पॉलिटेक्निक एवं मीरा गर्ल्स कॉलेज के विद्यार्थियों ने ‘दिवेर विजय’ पर आधारित प्रभावी नाट्य प्रस्तुति दी। गीत, संवाद, अभिनय और नृत्य के माध्यम से विद्यार्थियों ने महाराणा प्रताप के संघर्ष और दिवेर के ऐतिहासिक प्रसंग को मंच पर साकार किया। प्रस्तुति में भाग लेने वाले विद्यार्थियों को भारती राज, यूसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष कोमल सिंह कोठारी, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के उपनिदेशक गौरी कांत शर्मा तथा प्राचार्य डॉ. अनिल मेहता ने विद्या भवन की ओर से सम्मानित किया। अध्यक्षता करते हुए कोमल सिंह कोठारी ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत किया। उन्होंने विद्यार्थियों को विद्या भवन के उद्देश्यों, 95 वर्षों से निरंतर चली आ रही शैक्षणिक परंपरा और संस्थान की उपलब्धियों से परिचित कराया। प्राचार्य डॉ. अनिल मेहता ने कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन संघर्ष के साथ-साथ समाज से जुड़ाव और समन्वय का भी उदाहरण है। विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा के साथ समाज के विभिन्न वर्गों से संवाद और मेलजोल बढ़ाने तथा देश की तकनीकी प्रगति में सहभागी बनने की भावना विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मेलजोल मेले का उद्देश्य भी विद्यार्थियों को इसी तरह समाज से जोड़ना है। कार्यक्रम संयोजक प्रकाश सुंदरम के निर्देशन में गीत एवं नृत्य से सजी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुईं। मेले में विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों की ओर से लगाए गए खान-पान, खेल एवं मनोरंजन के स्टॉल आकर्षण का केंद्र रहे। इनमें बड़ी संख्या में लोगों ने सहभागिता की। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य व पोषण सरकार की पहली प्राथमिकता : बाबूलाल खराड़ी अखिल भारतीय औदीच्य महासभा की प्रथम बैठक में सामाजिक एकता, युवा शक्ति और महिला भागीदारी को लेकर हुआ मंथन