राजस्थान पुलिस की प्रभावी पैरवी का असर 24 News Update जयपुर 02 जुलाई। राजस्थान में अगर कोई व्यक्ति किसी से अपनी निजी दुश्मनी निकालने के लिए पुलिस में बलात्कार, लूट या किसी अन्य गंभीर अपराध की झूठी कहानी गढ़कर एफआईआर दर्ज कराता है, तो अब उसका बचना नामुमकिन है। पुलिस को गुमराह करने और निर्दोष नागरिकों को परेशान करने वाले ऐसे समाजकंटकों के खिलाफ महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार राजस्थान पुलिस ने गंभीरता दिखाई है और पिछले दिनों से कोर्ट के माध्यम से बड़ा विधिक अभियान छेड़ रखा है। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (अपराध) श्री बिपिन कुमार पांडे ने बताया कि पुलिस की मजबूत पैरवी के कारण जून महीने (01 जून से 28 जून 2026) के दौरान पूरे प्रदेश में 75 ऐसे मामलों में न्यायालयों ने फैसला सुनाया है, जहाँ कोर्ट ने झूठी कहानी रचने वाले दोषियों को सजा और आर्थिक जुर्माने से दंडित किया है। इसके साथ ही, पुलिस की मुस्तैदी से 1,870 ऐसे मामलों में अदालतों ने संज्ञान लिया है, जिनमें झूठी शिकायत करने वालों पर अब बकायदा केस चलाया जाएगा। जिलों ने किया बेहतरीन काम:जब पुलिस अपनी तफ्तीश में किसी मामले को झूठा पाती है तो न्यायालय में रिपोर्ट प्रस्तुत करती है। इसमें राज्य के कई जिलों ने बेहतरीन काम किया है।झूठी कहानियां रचने वालों को कोर्ट के कटघरे में खड़ा करने में नागौर जिला पूरे प्रदेश में अव्वल रहा, जहाँ अकेले जून महीने में 292 नए मामलों पर कोर्ट ने संज्ञान लिया, वहीं जयपुर ग्रामीण 247 नए मामलों के साथ दूसरे स्थान पर तथा अलवर (212) तीसरे स्थान पर रहा।इसके अलावा जयपुर दक्षिण में 139, कोटपुतली-बहरोड़ में 120, हनुमानगढ़ में 110, जयपुर पश्चिम में 71 और जयपुर उत्तर में 59 ऐसे मामलों में कानूनी शिकंजा कसा गया है। तथ्य छुपाकर गुमराह करने वालों को मिली सजाजून महीने में कुल 75 मामलों में कोर्ट ने दोषियों को सजा दी और जुर्माना ठोका।मजबूत विधिक पैरवी के दम पर हनुमानगढ़ पुलिस ने रिकॉर्ड 18 मामलों में दोषियों को कोर्ट से सजा व जुर्माना मुकर्रर कराया। इस अभियान के दौरान प्रतापगढ़ पुलिस की सटीक पैरवी कोर्ट ने 9 मामलों में दोषियों को सजा सुनाई।इसके अतिरिक्त जयपुर ग्रामीण में 6 मामलों, कोटा शहर में 5, अलवर, बांसवाड़ा व ब्यावर में 4-4, सवाई माधोपुर में 3, जयपुर दक्षिण, धौलपुर, झुंझुनू, डूंगरपुर, सिरोही, झालावाड़ और भीलवाड़ा में 2-2 तथा बीकानेर चूरू और जीआरपी अजमेर के 1-1 मामले में कोर्ट ने सख्त फैसला सुनाया।कई लोग जमीन के विवाद, पैसों के लेन-देन या आपसी रंजिश के कारण दूसरों को डराने के लिए पुलिस तंत्र का गलत इस्तेमाल करते हैं। इससे न केवल पुलिस का कीमती समय बर्बाद होता है, बल्कि उन वास्तविक पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी होती है जिन्हें पुलिस की सबसे ज्यादा जरूरत है।पुलिस मुख्यालय ने साफ चेतावनी दी है कि जो कोई भी व्यक्ति झूठे साक्ष्य गढ़ेगा या झूठी एफआईआर कराएगा, उसके खिलाफ कोर्ट के माध्यम से त्वरित ट्रायल कराया जाएगा। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation राजसमंद में दिलाई थी डमी कैंडिडेट को वनरक्षक की परीक्षा, एसओजी ने फर्जीवाड़े का किया पर्दाफाश