— आरा-बुचिया मार्ग पर डामोरवाड़ा की पहाड़ी व पादरा-कोकापुर की पहाड़ी पर खुलेआम चल रहा अवैध खनन 24 News Update सागवाड़ा (जयदीप जोशी)। उपखंड क्षेत्र में अवैध क्वार्ट्ज खनन का कारोबार प्रशासन के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से लगातार फैलता जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि खनन माफिया दिनदहाड़े भारी मशीनों से पहाड़ियों को खोदकर बहुमूल्य क्वार्ट्ज निकाल रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करने के बजाय मूकदर्शक बना हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन और खनिज विभाग को पूरे घटनाक्रम की जानकारी होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। इसका परिणाम यह है कि सरकारी भूमि, वन क्षेत्र और निजी जमीनों तक में अवैध खनन का जाल फैल चुका है।जानकारी के अनुसार आरा गांव से बुचिया मुख्य मार्ग पर स्थित डामोरवाड़ा के समीप सड़क किनारे स्थित पहाड़ी पर लंबे समय से अवैध रूप से क्वार्ट्ज का खनन किया जा रहा है। मौके पर जेसीबी मशीन की सहायता से पहाड़ी को काटकर क्वार्ट्ज पत्थर निकाले जा रहे थे। वहीं, एक ट्रैक्टर भी मौके पर खड़ा मिला, जिसमें निकाले गए पत्थरों की लोडिंग-अनलोडिंग की जा रही थी। पहाड़ी पर कई स्थानों पर बड़े-बड़े गड्ढे और खुदाई के निशान साफ दिखाई दे रहे थे, जिससे स्पष्ट होता है कि यहां काफी समय से लगातार खनन किया जा रहा है। संगठित तरीके से चल रहा अवैध कारोबारस्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में अवैध क्वार्ट्ज खनन किसी एक व्यक्ति का काम नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क के रूप में संचालित हो रहा है। छोटी-बड़ी एक दर्जन से अधिक गैंग अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय हैं। ये गैंग पहले खेतों, बिलानाम भूमि, वन क्षेत्र और पहाड़ियों में क्वार्ट्ज की उपलब्धता का पता लगाते हैं। इसके बाद रात और दिन, दोनों समय भारी मशीनों की सहायता से खुदाई शुरू कर दी जाती है। खनन के लिए जेसीबी, हिटाची, बोरवेल कंप्रेशर और अन्य आधुनिक मशीनों का उपयोग किया जाता है। मशीनों की मदद से पहाड़ियों की चट्टानों को तोड़कर बड़ी मात्रा में क्वार्ट्ज निकाला जाता है। इसके बाद मजदूरों की सहायता से उसे एकत्र कर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों एवं अन्य वाहनों में भरकर डंपिंग यार्ड तक पहुंचाया जाता है। डंपिंग यार्ड से दूसरे राज्यों तक पहुंच रहा मालखनन स्थल से निकाला गया क्वार्ट्ज पहले गुप्त डंपिंग यार्डों में एकत्र किया जाता है। इसके बाद ई-रवन्ना का उपयोग कर इसे वैध खनिज की आड़ में गुजरात सहित अन्य राज्यों के उद्योगों तक पहुंचाया जाता है। इस पूरे नेटवर्क में परिवहन, भंडारण और बिक्री का अलग-अलग तंत्र काम करता है, जिससे अवैध खनन का कारोबार लगातार फल-फूल रहा है। वन और पहाड़ियां हो रहीं बर्बादअवैध खनन के कारण क्षेत्र की पहाड़ियों का प्राकृतिक स्वरूप तेजी से बदल रहा है। कई स्थानों पर गहरे गड्ढे बन चुके हैं, जिससे बरसात के दौरान दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है। लगातार खुदाई से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है। वन क्षेत्र में खनन होने से जैव विविधता प्रभावित होने के साथ-साथ मिट्टी का कटाव और भू-क्षरण भी बढ़ने की आशंका है। खनन विशेषज्ञों के अनुसार, बिना रॉयल्टी और बिना वैध अनुमति के निकाले जा रहे क्वार्ट्ज से सरकार को भारी राजस्व हानि हो रही है। यदि अवैध खनन की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो करोड़ों रुपये के खनिज के अवैध दोहन का खुलासा हो सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले समय में क्षेत्र की अधिकांश छोटी पहाड़ियां पूरी तरह समाप्त हो सकती हैं। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation अहिंसा नगर में ध्वजारोहण के साथ हुआ पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का आगाज मांगें नहीं मानी तो नरेगा कार्य प्रभावित होगा, कार्मिकों ने दी बहिष्कार की चेतावनी