उदयपुर, 23 अगस्त। पूज्य बिलोचिस्तान पंचायत एवं श्री सनातन धर्म सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में शक्तिनगर स्थित सनातन धर्म मंदिर में भगवान झूलेलाल चालीहा महोत्सव का आयोजन 16 जुलाई से 25 अगस्त तक किया जा रहा है। महोत्सव के शुभारंभ पर भगवान झूलेलाल को 56 भोग का भव्य प्रसाद अर्पित किया गया, जिसके बाद शाम को संगीतमय भजन-कीर्तन, पंजड़ा, पल्लव और आरती का आयोजन हुआ। पंचायत के महासचिव विजय आहूजा ने बताया कि 40 दिनों तक चलने वाले इस चालीहा महोत्सव में प्रतिदिन रात 8 बजे महाआरती का आयोजन होगा, जिसमें सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। इस दौरान चालीहा के 40 दिनों तक भक्तों द्वारा प्रतिदिन अलग-अलग प्रकार के प्रसाद का भोग लगाया जाएगा। महोत्सव के अंतिम दिन, 25 अगस्त को पूज्य बहिराणा साहब का विसर्जन भव्य शोभायात्रा के साथ स्वरूप सागर में किया जाएगा। समारोह के दौरान समाज के गणमान्य व्यक्ति जैसे नानक राम कस्तूरी, विजय आहूजा, डब्बू, बसंत कस्तूरी, जेतुराम, कमल तलरेजा, क्विकि थदवानी, हेमंत गखरेजा, जय पुनीत सपरा, कशिश चेलानी और गुरुमुख कस्तूरी सहित कई अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।क्यों मनाया जाता है भगवान झूलेलाल चालीहा उत्सव?श्री बिलोचिस्तान पंचायत के महासचिव विजय आहूजा ने चालीहा उत्सव के धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: प्राचीन समय में सिंध के अत्याचारी शासक मिरखशाह के प्रजा पर बढ़ते अत्याचारों से मुक्ति पाने के लिए सिंधी समाज ने 40 दिनों तक कठिन जप, तप और साधना की थी। समाज की प्रार्थना पर सिंधु नदी में जल देवता (वरुणावतार) प्रकट हुए और 40 दिन बाद जन्म लेकर अत्याचारों का अंत करने का वचन दिया। चैत्र माह की द्वितीया को बालक ‘उडेरोलाल’ (भगवान झूलेलाल) का जन्म हुआ, जिन्होंने समाज को मिरखशाह के अत्याचारों से मुक्ति दिलाई।वरुणावतार और सर्वधर्म मान्यता: भगवान झूलेलाल को सिंधी हिंदू समाज अपना ‘इष्ट देव’ और जल देवता (वरुण देव) का अवतार मानता है। अपने चमत्कारों के कारण वे सिंधी समाज में ‘लाल सांई’ और मुस्लिम समाज में ‘ख्वाजा खिज्र जिंदह पीर’ के नाम से पूजे जाते हैं। व्रत व धार्मिक अनुष्ठान: प्रतिवर्ष जुलाई-अगस्त माह में मनाए जाने वाले इस चालिहा उत्सव के दौरान श्रद्धालु 40 दिनों तक कठिन नियमों का पालन करते हुए अखंड ज्योति की पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि इस दौरान निष्ठापूर्वक की गई उपासना से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। बहिराणा साहिब व छेज नृत्य: चालिहा के दौरान श्रद्धालु बहिराणा साहिब सजाते हैं। शोभायात्रा में ‘छेज’ (गुजरात के डांडिया की तरह सिंधी लोकनृत्य) खेलते हुए भगवान झूलेलाल की महिमा के गीत गाए जाते हैं। इस अवसर पर ताहिरी (मीठे चावल), छोले (उबले नमकीन चने) और शरबत का प्रसाद वितरित किया जाता है तथा अंतिम दिन बहिराणा साहिब का स्वरूप सागर में विसर्जन किया जाता है। सिंधी समाज जल और ज्योति की पूजा करते हुए भगवान झूलेलाल से यही मंगल कामना करता है कि पूरे विश्व में सुख, शांति, अमन-चैन और खुशहाली बनी रहे। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation ईएसआईसी पेंशनर्स एसोसिएशन की सामूहिक गोठ जयपुर में संपन्न, उदयपुर से रविन्द्र अग्रवाल ने लिया भाग मेवाड़ की विरासत और इतिहास से रूबरू हुए राज्यपाल बागड़े, एकलिंगनाथ मंदिर में की पूजा