दो महीने में करीब 40% तक बढ़े भाव, त्योहारी मांग से पहले सरकार ने खोला आयात का रास्ता; अक्टूबर से बाजार में बढ़ सकती है आपूर्ति 24 News update नई दिल्ली। त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों ने सरकार और उपभोक्ताओं दोनों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले दो महीनों में घरेलू बाजार में चीनी के भाव करीब 40 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं। इसी तेजी पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने करीब एक दशक बाद कच्ची चीनी के आयात का रास्ता खोला है। सरकार ने 31 अक्टूबर 2026 तक 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है।हालांकि, चीनी उद्योग का कहना है कि देश में वास्तविक अर्थों में चीनी की कमी नहीं है। भारतीय चीनी मिल संघ के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर ने कहा है कि मौजूदा तेजी मुख्य रूप से सट्टेबाजी और जमाखोरी के साथ कम उत्पादन के कारण बनी है। उनके मुताबिक अगस्त से नवंबर के बीच आने वाले त्योहारों की मांग पूरी करने के लिए देश में पर्याप्त भंडार मौजूद है और आने वाले दिनों में कीमतों में नरमी की उम्मीद है। आखिर अचानक इतनी महंगी क्यों हुई चीनी?चीनी के भाव बढ़ने के पीछे एक साथ कई कारण काम कर रहे हैं। मौसम से जुड़ी परिस्थितियों ने गन्ने के उत्पादन पर असर डाला, जबकि चीनी का कुछ हिस्सा इथेनॉल बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया। दूसरी ओर त्योहारों से पहले मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों में चीनी की मांग बढ़ने लगी है। इसके साथ बाजार में सट्टेबाजी और जरूरत से ज्यादा स्टॉक रखने की प्रवृत्ति ने भी कीमतों पर दबाव बढ़ाया। यही वजह है कि उद्योग एक तरफ पर्याप्त भंडार होने की बात कह रहा है, वहीं सरकार बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आयात का सहारा ले रही है। 10 लाख टन आयात का फैसला क्यों अहम?भारत आमतौर पर चीनी के आयात पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाता है। ऐसे में विदेश से आने वाली चीनी घरेलू बाजार के मुकाबले महंगी पड़ती है। इस बार सरकार ने सीमित मात्रा में कच्ची चीनी को बिना शुल्क आयात करने की अनुमति देकर आयातकों को घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ाने का रास्ता दिया है। यह लगभग एक दशक बाद भारत का बड़ा चीनी आयात कदम है। सरकार की योजना का तत्काल असर यह हो सकता है कि बंदरगाह आधारित कुछ रिफाइनरियों में पहले से मौजूद कच्ची चीनी को परिष्कृत कर घरेलू बाजार में उतारा जा सके। एक अनुमान के मुताबिक इससे करीब 3 लाख टन चीनी जल्दी बाजार में आ सकती है। हालांकि ब्राजील से नई खेप आने में लंबा समय लगेगा। यही इस पूरे फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति मिलने का मतलब यह नहीं है कि अगले दिन से दुकानों पर आयातित चीनी उपलब्ध हो जाएगी।उद्योग के अनुसार ब्राजील से जहाज द्वारा चीनी भारत पहुंचने में करीब 40 से 45 दिन लग सकते हैं। इसलिए नई आयातित खेप का बड़ा असर अक्टूबर के आसपास दिखाई देने की संभावना है। कुछ खेप 15 अक्टूबर से पहले पहुंच सकती हैं, लेकिन यह जहाज की उपलब्धता, बंदरगाहों की स्थिति, दस्तावेजी प्रक्रिया और आयात संबंधी मंजूरियों पर निर्भर करेगा। तटीय राज्यों को पहले फायदामहाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात और आंध्र प्रदेश जैसे तटीय राज्यों में आयातित कच्ची चीनी पहले पहुंचने की संभावना है, क्योंकि प्रमुख बंदरगाह इन्हीं क्षेत्रों में हैं। इसके बाद रेल और सड़क परिवहन के जरिए उत्तर भारत के राज्यों तक इसकी आपूर्ति की जाएगी। इसका अर्थ है कि आयात का असर पूरे देश में एक साथ दिखाई देने के बजाय चरणबद्ध तरीके से सामने आ सकता है। तुरंत बड़ी गिरावट की उम्मीद करना मुश्किल है। आयात का उद्देश्य बाजार में उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों की तेजी को रोकना है। लेकिन आयातित चीनी की बड़ी मात्रा भारत पहुंचने में समय लगेगा। दूसरी ओर भारतीय चीनी मिल संघ का कहना है कि देश में पर्याप्त स्टॉक है और बाजार में मौजूदा तेजी को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। संघ को उम्मीद है कि सरकार के कदमों और अतिरिक्त आपूर्ति के असर से आने वाले दिनों में खुदरा कीमतों में कमी शुरू हो सकती है। सरकार ने जमाखोरी पर भी कसा शिकंजासिर्फ आयात बढ़ाना ही सरकार की रणनीति नहीं है। बाजार में उपलब्ध चीनी को बड़े खरीदारों द्वारा अत्यधिक मात्रा में जमा करने से रोकने के लिए स्टॉक रखने की सीमा पर भी सख्ती की गई है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि चीनी गोदामों में फंसी न रहे और त्योहारी सीजन के दौरान बाजार में लगातार उपलब्ध होती रहे। उद्योग के मुताबिक 2025-26 सत्र में भारत का शुद्ध चीनी उत्पादन करीब 2.79 करोड़ टन रहने का अनुमान है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार यह देश की अनुमानित खपत 2.80 से 2.85 करोड़ टन के आसपास रहने की तुलना में लगभग बराबर है। साथ ही करीब 30 लाख टन चीनी इथेनॉल उत्पादन की ओर मोड़ी गई है।यानी देश में कुल उत्पादन और खपत का अंतर बहुत बड़ा नहीं है। असली चुनौती यह है कि उपलब्ध चीनी को पूरे बाजार में सही समय पर किस तरह पहुंचाया जाए। एक और दिलचस्प बदलाव- निर्यातक से आयातक बना भारतभारत दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादकों और उपभोक्ताओं में शामिल है। ऐसे में घरेलू कीमतों पर नियंत्रण के लिए आयात की अनुमति देना नीति में महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। इससे पहले सरकार ने चीनी निर्यात की अनुमति दी थी, लेकिन घरेलू उपलब्धता और कीमतों को देखते हुए निर्यात पर नियंत्रण लगाया गया। तय 20 लाख टन निर्यात कोटे में से करीब 8 लाख टन ही निर्यात हो सका। विदेश से आने वाली कच्ची चीनी सीधे दुकानों पर नहीं बिकेगी। इसे चीनी रिफाइनरी या संबंधित मिल में साफ और परिष्कृत किया जाएगा। इसके बाद इसे सफेद दानेदार चीनी में बदला जाएगा और फिर खुदरा बाजार में भेजा जाएगा। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover 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