पिछले सप्ताह 67 रुपए के रिकॉर्ड स्तर से भाव नीचे आए, सरकार की सख्ती और जमाखोरी पर कार्रवाई से बाजार को राहत 24 News Update नई दिल्ली, 25 अगस्त। केंद्र सरकार की ओर से चीनी के आयात की अनुमति दिए जाने और जमाखोरी पर सख्ती के बाद चीनी की कीमतों में तेजी से गिरावट आई है। मिल स्तर यानी एक्स-मिल कीमत करीब 18 प्रतिशत घटकर 55 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। पिछले सप्ताह यही भाव 67 रुपए प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था।केंद्रीय खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने पीटीआई को बताया कि चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। केंद्र ने हाल ही में 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात को मंजूरी दी। इसके साथ ही बड़े खरीदारों पर स्टॉक सीमा लागू करने और राज्यों को जमाखोरी रोकने के निर्देश दिए गए हैं। इन फैसलों के बाद मिल स्तर पर कीमतों में गिरावट शुरू हुई है। खुदरा बाजार में राहत पहुंचने में लगेगा कुछ समयनेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज के प्रबंध निदेशक प्रकाश नाइकनावरे के मुताबिक एक्स-मिल और थोक बाजार के भाव में सामान्य तौर पर 2 से 3 रुपए प्रति किलोग्राम का अंतर रहता है। वहीं एक्स-मिल और खुदरा कीमतों के बीच करीब 7 से 8 रुपए प्रति किलोग्राम का अंतर होता है।उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 24 अगस्त को देश में चीनी का औसत थोक भाव 58.29 रुपए प्रति किलोग्राम और औसत खुदरा भाव 63.05 रुपए प्रति किलोग्राम रहा। मिल स्तर पर कीमतों में आई गिरावट का असर आने वाले दिनों में खुदरा बाजार में भी दिखाई देने की संभावना है। जमाखोरी रोकने के लिए देशभर में निगरानीचीनी की कालाबाजारी और जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए देशभर में फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात किए गए हैं। ये टीमें बाजारों और स्टॉक रखने वाले कारोबारियों का निरीक्षण कर रही हैं। सरकार की सख्ती के चलते आने वाले दिनों में कीमतों में और कमी आने की संभावना जताई जा रही है।सरकार ने चीनी व्यापारियों और डीलरों के लिए स्टॉक रखने की सीमा भी निर्धारित की है। नए नियमों के अनुसार महीने में 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का कारोबार करने वाले डीलर 15 दिन से ज्यादा की खपत के बराबर स्टॉक नहीं रख सकेंगे। सरकार ने उठाए ये प्रमुख कदम10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात को मंजूरी दी गई। चीनी के आयात को कर-मुक्त किया गया। 30 सितंबर 2026 तक चीनी के निर्यात पर रोक लगाई गई। डीलरों के लिए 30 नवंबर तक 400 टन तक की स्टॉक सीमा निर्धारित की गई। जमाखोरी रोकने के लिए राज्यों को निर्देश दिए गए और निगरानी टीमें सक्रिय की गईं। खाद्य मंत्रालय के अनुसार विपणन वर्ष 2025-26 यानी अक्टूबर 2025 से सितंबर 2026 के दौरान देश में चीनी का उत्पादन करीब 306 लाख टन रहने का अनुमान है। यह शुरुआती अनुमान 343 लाख टन से कम है, लेकिन देश की सालाना घरेलू मांग लगभग 280 से 285 लाख टन के बीच है। इस हिसाब से घरेलू मांग पूरी करने के लिए देश में पर्याप्त चीनी उपलब्ध है। सरकार का कहना है कि बाजार में कमी की स्थिति नहीं है और उपलब्ध स्टॉक के साथ आयात की अनुमति से आपूर्ति व्यवस्था और मजबूत होगी। एक्स-मिल रेट का मतलब क्या है?एक्स-मिल रेट वह कीमत है जिस पर चीनी मिलें व्यापारियों या थोक विक्रेताओं को चीनी बेचती हैं। इसमें परिवहन खर्च, स्थानीय कर और खुदरा विक्रेता का मुनाफा शामिल नहीं होता। एक्स-मिल कीमत घटने के बाद आमतौर पर कुछ दिनों के अंतराल से इसका असर थोक और फिर खुदरा बाजार में दिखाई देता है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation कानपुर में कूड़े के ढेर पर चॉकलेट-टॉफी लूटने की मची होड़, बाइक-कार रोककर लोग भर ले गए डिब्बे