24 News Update Udaipur. तीन दिवसीय राज्य स्तरीय लोक जत्था कार्यशाला का आयोजन राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन, नई दिल्ली, राजस्थान स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी, जयपुर तथा मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में बप्पा रावल सभागार में किया गया। इस लोक कला जत्था कार्यशाला में प्रदेशभर से लोक कलाओं में निपुण 90 से अधिक लोक कलाकारों ने भाग लिया। इसमें ख्याल, कठपुतली, नुक्कड़ नाटक, गायन, जत्था कला, जादू, लोक नृत्य आदि विधाओं के कलाकार सम्मिलित हुए। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य एचआईवी/एड्स एवं यौन संचारित संक्रमण के प्रति लोक कला के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाना था, ताकि आमजन को इन बीमारियों से संबंधित जानकारी एवं उनके निदानात्मक उपायों से अवगत कराया जा सके। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कला महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. मदन सिंह राठौड़ ने की । उन्होंने अपने संबोधन में राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन एवं राजस्थान स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि एचआईवी/एड्स जैसी गंभीर बीमारियों के प्रति जागरूकता को लोक कला के माध्यम से आमजन तक पहुंचना अतिप्रासंगिक है जिससे दो तरह के कार्य एक साथ होते हैं। पहला तो लोककला जिसमें अपने राजस्थान की संस्कृति की महत्वपूर्ण झलक साफ दिखाई देती है । दूसरा इन कलाओं के माध्यम से एड्स जैसी घातक बीमारियों के प्रति सजगता को साझा करना अत्यंत आवश्यक है। सुखाड़िया विश्वविद्यालय दक्षिणी राजस्थान का सबसे बड़ा शैक्षणिक संस्थान है, जिससे क्षेत्र के लोगों का भावनात्मक जुड़ाव भी गहरा है। अतः इस प्रकार के आयोजन आवश्यक हैं। कार्यशाला के मुख्य वक्ता राजस्थान सरकार में स्वास्थ्य सेवायो के निदेशक डॉ एस. के. परमार ने अपने वक्तव्य में कहा कि क्षेत्रीय स्तर पर अधिकांश लोग ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करते हैं, जहां आज भी लोक संस्कृति की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसलिए एचआईवी एड्स जैसी घातक बीमारियों की जागरूकता के लिए लोक कला एक प्रभावी माध्यम बन सकता है।मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ अशोक आदित्य ने कार्यशाला के प्रतिभागियों को संबोधित करते कहा कि लोक कलाओं के माध्यम से दी गई जानकारी का प्रभाव गहरा होता है। सरकार द्वारा इस अभियान को लोक कला के माध्यम से संचालित करना एक सराहनीय कदम है। वर्तमान में देश तेज़ गति से प्रगति पथ पर अग्रसर है, और वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु प्रत्येक नागरिक को अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर एचआईवी/एड्स जैसी बीमारियों से मुक्त भारत का सपना साकार करना चाहिये । इसलिये ऐसे जनजागरूकता कार्यक्रम अति आवश्यक हैं, जो लोगों को उनकी अपनी भाषा और संस्कृति के माध्यम से सचेत करते हैं तथा संभावित कठिनाइयों के प्रति सचेत करते हैं। पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय प्रभारी विभागाध्यक्ष डॉ. पी. एस. राजपूत ने बताया कि यह आयोजन एचआईवी/एड्स जैसी घातक बीमारीयो के प्रति जागरूकता एवं रक्त दान को लोककलाओं के माध्यम से प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से किया गया। इस कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए कलाकारों ने भाग लिया। लोक कलाकार तीन दिवसीय प्रशिक्षण प्राप्त कर, दूर-दराज़ के गांवों में जाकर जनजागरूकता का संदेश देंगे। इस आयोजन के दौरान कलाकारों को यह प्रशिक्षण दिया गया कि किस प्रकार वे अपनी कला के माध्यम से एचआईवी/एड्स के प्रति जागरूकता फैला सकते हैं, लोगों को सजग बना सकते हैं तथा इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर कर सकते हैं। सभी कलाओं में एचआईवी/एड्स जैसे गंभीर विषय को प्रभावी ढंग से जोड़ा गया, ताकि यह संदेश आमजन तक सरलता से पहुंच सके। इस अवसर पर लोगों को 1097 टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर की जानकारी भी दी गई, और बताया गया कि यह नंबर एक क्लिक पर संबंधित सभी जानकारी आमजन तक पहुंचाने में सहायक है। इस आयोजन में राजस्थान स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी के निदेशक डॉ एस के परमार, उप निदेशक डॉ. प्रदीप चौधरी, सहायक निदेशक गरिमा भाटी, डॉ सीमा, डॉ मनु, ललित चौहान, रतन लाल माली आदि उपस्थित रहे । Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation करंट से गई ठेका कर्मचारी की जान, मॉर्च्युरी के बाहर पांच घंटे तक धरना, 12 लाख की आर्थिक सहायता निष्पक्ष जांच, जिम्मेदारों पर कार्रवाई के आश्वासन के बाद धरना समाप्त लोक कला के जरिए एड्स जागरूकता का संदेश, तीन दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित