24 News Update उदयपुर। राजस्थान विद्यापीठ के संस्थापक मनीषी पंडित जनार्दनराय नागर ‘जनुभाई’ की 115वीं जयंती पर मंगलवार को प्रतापनगर स्थित आईटी सभागार में आयोजित संगोष्ठी में शिक्षा, चरित्र निर्माण और नई शिक्षा नीति-2020 को लेकर व्यापक विचार-विमर्श हुआ। कार्यक्रम में वक्ताओं ने जनुभाई के शिक्षा दर्शन को आज के दौर में भी पूरी तरह प्रासंगिक बताते हुए उनके सपनों को साकार करने का संकल्प दोहराया।राजस्थान विद्यापीठ के कुलपति प्रो. शिवसिंह सारंगदेवोत ने कहा कि जनुभाई केवल एक शिक्षाविद् नहीं बल्कि लेखक, साहित्यकार, पत्रकार, कवि और समाज सुधारक थे, जिन्होंने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम बनाया। उन्होंने बताया कि आजादी से करीब दस वर्ष पहले जनुभाई ने लालटेन के प्रकाश में मेवाड़ के गांव-गांव जाकर शिक्षा की अलख जगाई और ग्रामीण समाज को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सामुदायिक केंद्रों की स्थापना की।प्रो. शिवसिंह सारंगदेवोत ने कहा कि आज शिक्षा को केवल सूचना देने तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि उसे विद्या और नैतिक मूल्यों से जोड़ने की आवश्यकता है। उनके अनुसार शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि व्यक्ति के चरित्र का निर्माण करना और उसके भीतर मानवीय एवं आध्यात्मिक मूल्यों का विकास करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति-2020 भारतीय ज्ञान परंपरा, मातृभाषा आधारित शिक्षण, कौशल विकास और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर बल देती है, जो जनुभाई के विचारों से पूरी तरह मेल खाती है।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलाधिपति एवं कुल प्रमुख भंवर लाल गुर्जर ने कहा कि जनुभाई का पूरा जीवन शिक्षा, सेवा और राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित रहा। उन्होंने शिक्षा को कभी केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं माना बल्कि व्यक्ति और समाज के समग्र विकास का आधार बनाया। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति भी रचनात्मकता, नवाचार, नैतिक मूल्यों और रोजगारपरक कौशल को बढ़ावा देकर उसी लोकमंगलकारी सोच को आगे बढ़ाती है जिसकी कल्पना जनुभाई ने की थी।भंवर लाल गुर्जर ने विद्यापीठ की स्थापना के शुरुआती संघर्षों का उल्लेख करते हुए बताया कि आजादी से पहले मात्र पांच कार्यकर्ताओं और तीन रुपये के बजट से शुरू हुई यह संस्था आज हजारों विद्यार्थियों, एक हजार से अधिक कार्यकर्ताओं और लगभग 80 करोड़ रुपये के वार्षिक बजट के साथ विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुकी है। उन्होंने कहा कि जनुभाई के कई सपनों को साकार किया जा चुका है और शेष लक्ष्यों को पूरा करने के लिए सभी मिलकर कार्य कर रहे हैं।संगोष्ठी से पहले प्रतापनगर परिसर में स्थापित जनुभाई की आदमकद प्रतिमा पर कुलपति प्रो. शिवसिंह सारंगदेवोत, कुलाधिपति एवं कुल प्रमुख भंवर लाल गुर्जर, पीठ स्थविर डॉ. कौशल नागदा तथा रजिस्ट्रार डॉ. तरूण श्रीमाली के सान्निध्य में पुष्पांजलि अर्पित की गई। इस दौरान तीनों परिसरों के कार्यकर्ताओं और शिक्षकों ने जनुभाई के आदर्शों पर चलते हुए विद्यापीठ के निरंतर विकास और समाजोन्मुख शिक्षा के विस्तार का संकल्प लिया।कार्यक्रम का संचालन डॉ. कुलशेखर व्यास ने किया जबकि आभार डॉ. कौशल नागदा ने व्यक्त किया। समारोह में प्रो. मलय पानेरी, प्रो. सरोज गर्ग, प्रो. जीवनसिंह खरकवाल, प्रो. मंजू मांडोत, प्रो. पारस जैन, प्रो. युवराज सिंह राठौड़, डॉ. धर्मेन्द्र राजौरा, प्रो. अवनीश नागर, प्रो. हेमेन्द्र चौधरी, डॉ. लीली जैन, प्रो. अमी राठौड़, प्रो. सुनिता मुर्डिया, प्रो. रचना राठौड़, प्रो. बीएल श्रीमाली, डॉ. सपना श्रीमाली, डॉ. गुणबाला आमेटा, डॉ. अपर्णा श्रीवास्तव, केके कुमावत, जितेन्द्र सिंह चौहान, उमराव सिंह राणावत, डॉ. ओम पारीक, डॉ. जयसिंह जोधा, डॉ. धीरेन्द्र सिसोदिया, डॉ. मोहसीन छीपा और भगवती लाल श्रीमाली सहित बड़ी संख्या में डीन, डायरेक्टर, शिक्षक एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने जनुभाई को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने और शिक्षा के माध्यम से समाज निर्माण के संकल्प को दोहराया। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation फतहसागर पर ‘प्रेंक’ बना मुसीबत, नकली सांप से लोगों को डराने वाले चार युवक पुलिस के शिकंजे में महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती की पूर्व संध्या पर राजस्थान विद्यापीठ में पुष्पांजलि कार्यक्रम, अश्वारूढ़ प्रतिमा पर किया नमन