24 News Update उदयपुर। अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के प्रतिनिधिमंडल ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में जलापूर्ति संबंधी समस्याओं को लेकर जलदाय विभाग के अधिशाषी अभियंता को ज्ञापन सौंपा। संगठन ने पंजाबी बाग, नाकोड़ा नगर, श्रीनाथ कॉलोनी, शिव नगर, कालका माता रोड, गांधी नगर एवं आदर्श नगर सहित कई क्षेत्रों में कम समय तक पानी सप्लाई होने, कम दबाव से जलापूर्ति तथा कुछ इलाकों में गंदा पानी आने की शिकायत उठाई।संगठन के जिला मंत्री नारायण पंचोली ने बताया कि भीषण गर्मी के चलते शहर और आसपास के क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था सुधारने की मांग की गई है। प्रतिनिधिमंडल ने जलदाय विभाग के गुलाब बाग कार्यालय पहुंचकर अधिशाषी अभियंता सृष्टि मेनारिया का उपरना पहनाकर स्वागत किया और समस्याओं से अवगत कराया।प्रांत संगठन मंत्री राकेश पालीवाल ने कहा कि यदि सीवरेज का पानी आयड़ नदी में प्रवाहित नहीं कर उदयसागर से जलापूर्ति की जाए तो बेड़वास और प्रतापनगर क्षेत्र में पेयजल संकट से राहत मिल सकती है। उन्होंने बताया कि संगठन पिछले दो वर्षों से इस संबंध में विभाग को सुझाव देता आ रहा है।इस पर अधिशाषी अभियंता सृष्टि मेनारिया ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि प्रस्ताव को राज्य सरकार की स्वीकृति मिल चुकी है और शीघ्र ही फिल्टर प्लांट निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी। उन्होंने गांधी नगर क्षेत्र में नई पानी की टंकी निर्माण की स्वीकृति मिलने तथा जलापूर्ति व्यवस्था सुधारने के प्रयास जारी होने की जानकारी भी दी।ज्ञापन देने वालों में महानगर अध्यक्ष करण सिंह कटारिया, फतेहलाल पारिक, राजेंद्र स्वर्णकार, महिला मंत्री मंजू भावसार, ओंकार जोशी, सत्यनारायण प्रजापत, नरपत सिंह कुमावत, जय प्रकाश भावसार, दशरथ कराड़िया, दिनेश श्रीमाली एवं अशोक शर्मा सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation भाजपा के दो दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण शिविर का समापन, बूथ प्रबंधन व संगठन मजबूती पर जोर यूडी टैक्स पर निगम के अफसर बन रहे ओवर स्मार्ट, बकायेदारों को करते हैं सार्वजनिक बदनाम, लेकिन आरटीआई में बन रहे ‘प्राइवेसी’ के चौकीदार