24 News Update उदयपुर। नगर निगम उदयपुर का नगरीय विकास कर (यूडी टैक्स) को लेकर रवैया सवालों के घेरे में आ गया है। एक ओर निगम वर्षों से यूडी टैक्स वसूली का पूरा काम निजी एजेंसी के भरोसे चलाता आ रहा है, वहीं दूसरी ओर सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत जानकारी मांगने पर अब वही निगम बड़े होटलों की निजता का हवाला देकर सूचना रोकने की तैयारी में दिखाई दे रहा है। याने सूचना की पहरेदारी और कुंडली मार कर चौकीदारी की जा रही है। ये क्यों हो रही है ये तो निगम के अफसर ही बता सकते हैं मगर यह जांच का विषय है कि यूडी टेक्स के बारे में बताना आखिर कैसे निजी सूचना हो सकता है। जनता को जानने का अधिकार है कि कौन कितना टेक्स दे रहा है, यह बताना भी जनहित में ही है और अफसर भी जनता के पैसों की तनखवाह लेकर इसलिए नहीं बिठा रखे हैं कि वो खुद मनमानी करने लग जाएं। वीआईपी संस्थानों की सूचना पर चौकीदार बनकर बैठ जाएं और सूचना मांगने पर उटपटांग जवाब दे दें। यह अब चलने वाला नहीं है।दरअसल, निगम की ओर से समय-समय पर यूडी टैक्स बकायेदारों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए सार्वजनिक रूप से नाम, बकाया राशि और संपत्तियों की तस्वीरें जारी की जाती रही हैं। निगम की टीम सीजिंग कार्रवाई के दौरान भवनों पर नोटिस चस्पा कर संबंधित प्रतिष्ठानों को खुलेआम नेम एंड शेम भी करती है। खबरें प्रकाशित व प्रसारित खुद निगम करता है। आयुक्त साहब चेतावनी देते हैं कि जमा करवा दें वरना कार्रवाई होती रहेगी। जिनके 80 हजार तक बकाया है, उनके नाम भी डिफाल्टर के रूप में सार्वजनिक करते हैं, पता भी होता है व कई बार पिता या फर्म का नाम भी। लेकिन अब जब आरटीआई आवेदन क्रमांक 199 दिनांक 14 मई 2026 के तहत शहर के प्रमुख होटलों — लेक पैलेस, द लीला पैलेस उदयपुर, उदय विलास और जगमंदिर — द्वारा वर्ष 2024 और 2025 में जमा कराए गए नगरीय विकास कर की जानकारी मांगी गई, तो निगम ने सूचना सीधे देने के बजाय संबंधित होटलों को पत्र भेजकर उनकी सहमति मांग ली। हद है ढीठता की।नगर निगम की ओर से जारी पत्र में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 11 का हवाला देते हुए कहा गया है कि संबंधित होटल “तृतीय पक्षकार” हैं, इसलिए उनसे पूछा जा रहा है कि सूचना दी जाए या नहीं। होटल प्रबंधन से सात दिन में सहमति या असहमति देने को कहा गया है। याने होटल वालों से कहा है कि प्लीज आप बता दीजिए कि हम सूचना दें या नहीं। क्या यह सूचना यूडीए के पास नहीं है, क्या सूचना निजी है, क्या सूचना देने से अधिकारियों के सुर्खाब के पर कतर दिए जाएंगे। आखिर राज क्या है यह बड़ा सवाल है।यहीं से निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारों का कहना है कि यदि यूडी टैक्स से जुड़ी जानकारी इतनी गोपनीय है तो फिर निगम आम नागरिकों, व्यापारियों और छोटे प्रतिष्ठानों के टैक्स बकाया सार्वजनिक क्यों करता है? और यदि सार्वजनिक हित में बकाया जानकारी जारी की जा सकती है, तो बड़े होटलों के मामले में अलग मानदंड क्यों अपनाए जा रहे हैं?सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि निगम खुद यूडी टैक्स का डेटा निजी एजेंसी के माध्यम से संचालित कर रहा है। ऐसे में डेटा की गोपनीयता को लेकर निगम का तर्क और भी कमजोर नजर आता है। आलोचकों का कहना है कि निगम छोटे बकायेदारों पर सख्ती और बड़े प्रतिष्ठानों पर नरमी का रवैया अपना रहा है। अब देखना यह होगा कि निगम आरटीआई आवेदक को सूचना उपलब्ध कराता है या “तृतीय पक्ष” की आड़ लेकर मामले को लंबा खींचता है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation जलापूर्ति सुधार की मांग को लेकर ग्राहक पंचायत ने जलदाय विभाग को सौंपा ज्ञापन एचिंग एवं सेरीग्राफी कार्यशाला का शुभारंभ