24 News Update उदयपुर। सोहराबुद्दीन शेख फर्जी एनकाउंटर मामला में 7 मई 2026 को बॉम्बे हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी 22 आरोपियों की बरी होने की कार्रवाई को बरकरार रखा। हाईकोर्ट ने सोहराबुद्दीन के भाइयों रुबाबुद्दीन शेख और नयाबुद्दीन शेख की अपीलें खारिज कर दीं। अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। विस्तृत आदेश बाद में जारी किया जाएगा।इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखाड़ की खंडपीठ ने की। अदालत ने दिसंबर 2018 में मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत द्वारा दिए गए बरी करने के आदेश को सही माना। क्या था पूरा मामला?सीबीआई के अनुसार नवंबर 2005 में गुजरात एटीएस और राजस्थान पुलिस के कुछ अधिकारियों ने कथित तौर पर सोहराबुद्दीन शेख को बस से उतारकर हिरासत में लिया था। बाद में 26 नवंबर 2005 को अहमदाबाद के पास पुलिस मुठभेड़ में उसे मार गिराया गया। पुलिस ने दावा किया था कि वह आतंकवादी था और किसी बड़े हमले की साजिश रच रहा था।सीबीआई की जांच में आरोप लगाया गया कि यह एनकाउंटर फर्जी था। जांच एजेंसी के मुताबिक सोहराबुद्दीन की पत्नी कौसर बी को भी बाद में मार दिया गया और शव जला दिया गया।इसके बाद दिसंबर 2006 में तुलसीराम प्रजापति की भी गुजरात-राजस्थान सीमा के पास कथित एनकाउंटर में मौत हो गई। सीबीआई का दावा था कि तुलसीराम इस पूरे घटनाक्रम का अहम गवाह था, इसलिए उसे रास्ते से हटाया गया। सुप्रीम कोर्ट की एंट्री और CBI जांचमामले ने राष्ट्रीय राजनीति और पुलिस व्यवस्था को झकझोर दिया था। सोहराबुद्दीन के भाई रुबाबुद्दीन शेख ने सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में याचिका दायर की थी। जनवरी 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने जांच गुजरात पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंप दी। बाद में निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए ट्रायल गुजरात से मुंबई ट्रांसफर किया गया। किन-किन बड़े नामों पर लगे आरोप?इस केस में गुजरात और राजस्थान के कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी आरोपी बनाए गए थे। इनमें आईपीएस अधिकारी डी.जी. वंजारा, दिनेश एम.एन., राजकुमार पंडियन समेत कई अफसर शामिल थे। तत्कालीन गुजरात गृह राज्य मंत्री अमित शाह का नाम भी सीबीआई की चार्जशीट में आया था। हालांकि 2014 में विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में उन्हें डिस्चार्ज कर दिया था। ट्रायल कोर्ट ने क्यों किया था बरी? मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत ने 21 दिसंबर 2018 को सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया था। अदालत ने कहा था कि अभियोजन पक्ष ठोस और भरोसेमंद सबूत पेश नहीं कर सका। कई गवाह मुकर गए थे और बड़ी संख्या में गवाह ‘होस्टाइल’ हो गए थे। अदालत ने यह भी कहा था कि कथित साजिश साबित नहीं हो सकी। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 210 गवाहों में से 90 से ज्यादा गवाह बाद में अपने पुराने बयानों से पलट गए थे। हाईकोर्ट में कौन-सी अपीलें लगी थीं?2019 में सोहराबुद्दीन के भाइयों रुबाबुद्दीन और नयाबुद्दीन शेख ने बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील दायर कर कहा था कि ट्रायल निष्पक्ष नहीं हुआ और कई अहम गवाहों के बयान सही तरीके से रिकॉर्ड नहीं किए गए। उन्होंने दोबारा ट्रायल की मांग भी की थी। लेकिन 7 मई 2026 को हाई कोर्ट ने इन अपीलों को खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट का फैसला कायम रखा। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation सवानिया गांव में बुजुर्ग दंपती से लूट, रात को घर में घुसे 7-8 बदमाश, मारपीट कर जेवर लूटे नेताओं पर फूटा गुस्सा, वकील बोले—छोड़ो 7 तारीख का इंतजार, अब करो आर या पार!!