24 News Update सराड़ा। विकास कार्यों के दावों और सरकारी उपलब्धियों के बीच सलूंबर जिले की सराड़ा तहसील का थाना गांव एक अलग ही तस्वीर पेश कर रहा है। यहां स्थित करीब 20 वर्ष पुराना मुख्य पुल बदहाल स्थिति में पहुंच चुका है। पुल की स्लैब से कंक्रीट उखड़ रही है, लोहे के सरिए बाहर निकल आए हैं और कई स्थानों पर पिलरों में भी दरारें एवं क्षति साफ दिखाई दे रही है। इसके बावजूद प्रतिदिन हजारों लोगों की आवाजाही इसी पुल से हो रही है, जिससे किसी भी समय बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है।ग्रामीणों के अनुसार पुल क्षेत्र की महत्वपूर्ण जीवनरेखा है, जिससे आसपास के गांवों का संपर्क बना हुआ है। रोजाना स्कूल बसें, निजी बसें, दुपहिया और चारपहिया वाहन ही नहीं, बल्कि भारी मालवाहक ट्रक भी इसी पुल से गुजरते हैं। पुल की मौजूदा हालत को देखकर ग्रामीणों में भय का माहौल है और लोग इसे ‘मौत का पुल’ तक कहने लगे हैं।स्थानीय लोगों का आरोप है कि सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) ने समय-समय पर मरम्मत के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान कभी नहीं किया गया। हर बार केवल ऊपरी मरम्मत कर पुल को कुछ समय के लिए उपयोग योग्य बना दिया गया, जबकि उसकी मूल संरचना लगातार कमजोर होती चली गई। परिणामस्वरूप आज पुल की स्थिति पहले से अधिक खतरनाक हो गई है।ग्रामीणों का कहना है कि लगातार शिकायतों और विरोध प्रदर्शन के बाद पिछले वर्ष विभाग ने पुल की मरम्मत के लिए टेंडर भी जारी किया था। उम्मीद जगी थी कि अब पुल की हालत सुधरेगी, लेकिन ठेकेदार द्वारा कार्य करने में असमर्थता जताने के बाद पूरा मामला ठंडे बस्ते में चला गया। इसके बाद न तो नया टेंडर जारी किया गया और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई।ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब क्षेत्र में विकास कार्यों और करोड़ों रुपये की योजनाओं का प्रचार किया जा रहा है, तब लोगों की सुरक्षा से जुड़ा यह महत्वपूर्ण पुल आखिर क्यों उपेक्षित पड़ा है। उनका कहना है कि बरसात का मौसम नजदीक है और यदि जलभराव या भारी यातायात के दबाव में पुल को नुकसान पहुंचा तो बड़ी जनहानि हो सकती है।ग्रामीणों ने प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और सार्वजनिक निर्माण विभाग से तत्काल तकनीकी जांच कराकर पुल के पुनर्निर्माण या मजबूत मरम्मत की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो क्षेत्रवासी आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। फिलहाल थाना गांव का यह जर्जर पुल विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच बढ़ती खाई की एक बड़ी मिसाल बनकर खड़ा है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation उदयपुर हॉस्पिटल में डॉक्टरों से मारपीट मामला: 9 आरोपी हिरासत में, चिकित्सा अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज; CCTV में कैद हुई पूरी घटना, IMA ने दी हड़ताल की चेतावनी बोहरा गणेशजी से मिला आशीर्वाद, अब घर-घर पहुंचेगी हल्दीघाटी विजय की गौरवगाथा; 17 जून को उदयपुर में राष्ट्र चेतना संकल्प सभा