24 News Update नई दिल्ली। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव पांचवें दिन और तीखा हो गया है। इस बीच सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको की रास तनूरा रिफाइनरी पर एक और ड्रोन हमला हुआ है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार यह हमला ऐसे समय हुआ है जब दो दिन पहले भी इसी रिफाइनरी को ईरानी ड्रोन ने निशाना बनाया था।रास तनूरा सऊदी अरब की प्रमुख तेल रिफाइनरियों में शामिल है, जहां प्रतिदिन लगभग 5.50 लाख बैरल कच्चे तेल की प्रोसेसिंग होती है। ऊर्जा बाजार के लिहाज से इसे रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए इस पर लगातार हो रहे हमलों ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है।उधर ईरान की राजनीति में भी बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। ईरान में यह दावा किया जा रहा है कि पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुना गया है। हालांकि आधिकारिक घोषणा खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद किए जाने की संभावना बताई जा रही है।इस बीच इजराइल ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है। इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने कहा कि ईरान में खामेनेई के बाद जो भी नेतृत्व संभालेगा, वह भी इजराइल के निशाने पर होगा। उनके मुताबिक नाम या ठिकाना मायने नहीं रखता, इजराइल अपने विरोधियों को ढूंढकर कार्रवाई करने में सक्षम है। अमेरिकी सैन्य अभियान के दावेअमेरिका ने ईरान के खिलाफ चल रहे अपने अभियान को “एपिक फ्यूरी” नाम दिया है। वॉशिंगटन के अनुसार इस ऑपरेशन में बड़े पैमाने पर सैन्य संसाधन तैनात किए गए हैं। अमेरिकी दावों के मुताबिक— ईरान के 17 नौसैनिक जहाज, जिनमें एक पनडुब्बी भी शामिल है, नष्ट किए जा चुके हैं। अभियान में 50 हजार से अधिक अमेरिकी सैनिकशामिल हैं।लगभग 200 फाइटर जेट, दो एयरक्राफ्ट कैरियर और रणनीतिक बमवर्षक विमान तैनात किए गए हैं। ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल नेटवर्क और ड्रोन क्षमता को भी भारी नुकसान पहुंचाने का दावा किया गया है। ईरान का सख्त रुखइस संघर्ष के बीच ईरान की ओर से भी सख्त बयान सामने आए हैं। ईरानी नेता मोहम्मद मोखबर ने सरकारी टीवी पर कहा कि तेहरान अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत के लिए तैयार नहीं है और उसे वॉशिंगटन पर कोई भरोसा नहीं है। वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने आरोप लगाया कि परमाणु बातचीत के दौरान अमेरिका की ओर से किया गया हमला कूटनीति के साथ विश्वासघात है।वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर की आशंकाविशेषज्ञों का मानना है कि अगर सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले जारी रहे तो इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति और कीमतों पर पड़ सकता है। सऊदी अरामको दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनियों में गिनी जाती है और वैश्विक ऊर्जा बाजार में इसकी भूमिका बेहद अहम है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation ट्रांसफॉर्मर में शॉर्ट सर्किट से भड़की आग, ग्रामीणों की तत्परता से टला बड़ा हादसा धुलंडी पर उदयपुर में हंगामा-ऑटो सवार युवकों ने ट्रैफिक पुलिस से की धक्का-मुक्की, एक आरोपी डिटेन