24 News Update नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को खनन और धातु क्षेत्र की प्रमुख कंपनी वेदांता समूह के ठिकानों पर छापेमारी कर कारोबारी जगत में हलचल मचा दी। एजेंसी की यह कार्रवाई समूह के मुंबई और दिल्ली स्थित कार्यालयों में की गई, जहां विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के कथित उल्लंघन से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की जांच की जा रही है।सूत्रों के अनुसार जांच का केंद्र भारतीय इकाई वेदांता लिमिटेड द्वारा अपनी ब्रिटेन स्थित मूल कंपनी वेदांता रिसोर्सेज को किए गए रॉयल्टी भुगतान हैं। ईडी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि विदेश भेजी गई राशि फेमा के प्रावधानों और नियामकीय मानकों के अनुरूप थी या नहीं।मामले को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वेदांता रिसोर्सेज पर भारी कर्ज का बोझ है। बाजार रिपोर्टों के अनुसार कंपनी पर लगभग 74 हजार करोड़ रुपये का ऋण है। जांच एजेंसी यह भी खंगाल रही है कि भारतीय इकाई से विदेशी मूल कंपनी को किए गए भुगतान का स्वरूप, उद्देश्य और अनुमोदन प्रक्रिया नियमानुसार थी या नहीं।ईडी की कार्रवाई के बीच वेदांता समूह ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि कंपनी जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग दे रही है। समूह के प्रवक्ता ने कहा कि मांगी गई सभी जानकारियां उपलब्ध कराई जा रही हैं और कंपनी सभी लागू कानूनों तथा नियमों के अनुपालन के लिए प्रतिबद्ध है। चूंकि मामला नियामकीय प्रक्रिया के अधीन है, इसलिए इस चरण में इससे अधिक टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।छापेमारी की खबर सामने आते ही निवेशकों की प्रतिक्रिया भी देखने को मिली। कारोबार के दौरान वेदांता लिमिटेड के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई और स्टॉक दबाव में आ गया। हालांकि बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जांच के नतीजों और कंपनी के आधिकारिक स्पष्टीकरण के बाद ही इसके दीर्घकालिक प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा।यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब वेदांता समूह अपने बहुप्रतीक्षित डिमर्जर प्लान को अंतिम रूप देने में जुटा है। हाल ही में कंपनी को कारोबार को पांच अलग-अलग इकाइयों में विभाजित करने के लिए आवश्यक नियामकीय मंजूरियां प्राप्त हुई थीं। प्रस्तावित पुनर्गठन के बाद समूह के विभिन्न व्यवसाय स्वतंत्र सूचीबद्ध कंपनियों के रूप में काम करेंगे। क्या है पूरा मामला?फेमा (विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम) भारत से बाहर धन के प्रवाह, विदेशी निवेश और विदेशी मुद्रा संबंधी लेन-देन को नियंत्रित करने वाला प्रमुख कानून है। यदि किसी भारतीय कंपनी द्वारा विदेशी इकाई को किया गया भुगतान निर्धारित नियमों या अनुमत सीमाओं से बाहर पाया जाता है, तो ईडी इस कानून के तहत जांच कर सकती है। रॉयल्टी भुगतान वह शुल्क होता है जो कोई कंपनी किसी ब्रांड, तकनीक, बौद्धिक संपदा या ट्रेडमार्क के उपयोग के बदले मूल कंपनी अथवा अधिकारधारी संस्था को देती है। ऐसे भुगतान वैध होते हैं, लेकिन उनकी प्रकृति, मूल्यांकन और अनुमोदन प्रक्रिया नियामकीय मानकों के अनुरूप होना आवश्यक होता है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation वैदिक मंत्रों के बीच शुरू हुआ ऐतिहासिक बावड़ी के जीर्णोद्धार का काम, पानी छलकने की खबर से गूंजा “हर-हर गंगे” खान सर को बड़ी राहत: पटना कोर्ट ने गिरफ्तारी पर लगाई रोक, 20 को अग्रिम जमानत याचिका पर अगली सुनवाई