रिपोर्ट– जयवंत भैरविया 24 News Update उदयपुर। उदयपुर की झीलों, पहाड़ियों और नदी तंत्र को बचाने के दावे खोखले व कागजी है क्योंकि सच जानने के लिए लगाई गई फाइलों पर तिलचट्टे छोड़ दिए गए हैं। सूचनाओं पर अफसर पहरा लगा कर कुंडली मार कर इतने ढीठ होकर बैठे हैं कि राज्य सूचना आयोग के आदेश भी उनके आगे पानी भरते नजर आ रहे हैं। उदयपुर विकास प्राधिकरण के अफसर खुद सवालों के घेरे में है। मामला शहर के चर्चित ताज अरावली होटल से जुड़ा है, जहां नदी क्षेत्र में सड़क निर्माण, पहाड़ी को काटने और सरकारी जमीन पर सरेआम कब्जे जैसे गंभीर आरोपों के बावजूद यूडीए की भूमिका और उसकी चुप्पी रहस्यमयी बनी गई है। सबसे बड़ा सवाल यह कि आखिर सूचना के अधिकार कानून के तहत मांगी गई जानकारी देने से यूडीए के अफसर इतना बच क्यों रहा है? इतना कतरा क्यों रहे हैं? आरटीआई कार्यकर्ता और वरिष्ठ पत्रकार जयवंत भैरविया की ओर से मांगी गई सूचनाओं को लेकर यूडीए का रवैया अब प्रशासनिक लापरवाही से आगे बढ़कर संदेहास्पद मौन के रूप में देखा जा रहा है। ऐसा मोन जिसमें आर्थिक हित व निहितार्थ प्रखर हो रहे हैं। राज्य सूचना आयोग के स्पष्ट आदेशों के बाद भी महीनों तक फाइलों पर धूल जमाई जा रही है। इस मामले में शहर के जन प्रतिनिधियों व नेताओं की चुप्पी भी अब आपराधिक नजर आने लगी है क्योंकि यही नेता ताज अरावली में होने वाली शाही शादियों में शाही मेहमान बनकर इठलाते हैं। लेकिन जब नदी में कब्जे की बात आती है तो इनके मुंह से एक शब्द तक नहीं निकलता। आम जनता पूछती है कि जब एक मामले में ये हाल हैं तो ये अरावली के पहाड़ बचाने का जिम्मा क्या लेंगे??? सूचना आयोग के आदेश भी बेअसरपूरे मामले में जयवंत भैरविया ने यूडीए में दो अलग-अलग आरटीआई आवेदन लगाए थे। एक मामले में राज्य सूचना आयोग का फैसला आए करीब आठ महीने गुजर चुके हैं, जबकि दूसरे मामले में लगभग एक साल बीत चुका है। इसके बावजूद आज तक पूरी सूचना उपलब्ध नहीं करवाई गई। आरोप यह है कि यूडीए के पूर्व आयुक्त राहुल जैन के कार्यकाल में प्रथम अपीलों की सुनवाई तक नहीं हुई। आवेदकों का कहना है कि ऐसा प्रतीत होता है मानो आरटीआई आवेदन सीधे रद्दी की टोकरी में फेंक दिए जाते हों। सूचना आयोग तक जाने के बाद भी हालात नहीं बदले। आपको बता दें कि उदयपुर के कोडियात क्षेत्र स्थित ताज अरावली होटल से जुड़ा है। होटल के पास बहने वाली अमरजोक नदी क्षेत्र में सड़क बनाई गई और जल संसाधन विभाग की कोडियात टनल के ऊपर पहाड़ी काटकर निर्माण कार्य किया गया।जब आरटीआई में पूछा गया था कि क्या यूडीए ने इस पहाड़ी कटान की अनुमति दी थी? यदि दी गई तो उसकी स्वीकृतियां और दस्तावेज क्या हैं? लेकिन इन्हीं सवालों पर यूडीए ने चुप्पी साध रखी है। जिस समय आरटीआई के आवेदन लगाए गए थे उस दौरान टनल के ऊपर पहाड़ी काटकर निर्माण कार्य जारी था। बताया जा रहा है कि यदि स्वीकृतियों और सीमांकन से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक हो जाएं तो नदी क्षेत्र और पहाड़ी निर्माण को लेकर बड़ा खुलासा हो सकता है। नदी पर सड़क, फिर भी कार्रवाई नहींसबसे गंभीर आरोप अमरजोक नदी में सड़क निर्माण को लेकर है। यह कोई छोटी बरसाती नाली नहीं, बल्कि उदयपुर की जल आपूर्ति व्यवस्था और देवास परियोजना से जुड़ा संवेदनशील जल स्रोत है। उदयपुर की पेयजल आपूर्ति की लाइफ लाइन है। आरटीआई में यह भी पूछा गया कि नदी का सीमांकन करने के लिए यूडीए ने आज तक क्या कार्रवाई की? लेकिन इसका जवाब भी नहीं दिया गया। इधर जल संसाधन विभाग भी असमंजस में नजर आ रहा है। या साफ कहें तो यूडीए की तरह से वह भी भ्रष्ट सिस्टम को सपोर्ट करता हुआ दिख रहा है। विभाग लगातार तहसीलदार गिर्वा को पत्र लिख रहा है, लेकिन जमीन पर कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई। तहसीलदार की आंखों पर ना जाने कौनसा चश्मा चढ़ा हुआ है। अधिग्रहित जमीन पर सड़क बनाने का आरोपआरटीआई आवेदन में एक और गंभीर सवाल उठाया गया कि टनल निर्माण के लिए एक किसान से अधिग्रहित की गई जमीन को पार्क विकसित करने के नाम पर लीज पर दिया गया, लेकिन वहां पार्क के बजाय होटल के पीछे जाने वाली सड़क बना दी गई। भैरविया ने पूछा कि अवैध निर्माण पर कार्रवाई करने का अधिकार किन अधिकारियों के पास है? संबंधित अधिकारियों के नाम, पदनाम और संपर्क विवरण भी मांगे गए, लेकिन यह जानकारी भी रोक ली गई। याने ऐसी कुंडली मार कर बैठै हैं कि डर के मारे सूचनामांगते ही थर थर कांप रहे हैं। आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया कि होटल के पीछे की कुछ जमीनें यूडीए की बताई जाती हैं, जिन पर अवैध कब्जे किए गए हैं। आरटीआई में पूछा गया था कि इन कब्जों को हटाने का अधिकार किन अधिकारियों के पास है, लेकिन इस पर भी यूडीए की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। इस पूरे मामले ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया ह कि क्या सरकारी संस्थाएं सूचना के अधिकार कानून को गंभीरता से लेती भी हैं या नहीं? यदि राज्य सूचना आयोग के आदेशों के बाद भी जानकारी नहीं दी जाती, तो आम नागरिक आखिर न्याय की उम्मीद कहां से करे? ताज अरावली से जुड़े आरोप सही हैं या गलत, इसका फैसला जांच और दस्तावेज करेंगे, लेकिन सूचना रोकने की प्रवृत्ति ने पूरे मामले को और अधिक संदेहास्पद बना दिया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या यूडीए जवाबदेही तय करेगा या यह मामला भी फाइलों के अंधेरे में दबा दिया जाएगा। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation जंगल कटाई हटाने पहुंची टीम पर हमले के फरार आरोपी दबोचे, ‘सुदर्शन चक्र-2’ में पानरवा पुलिस की बड़ी कामयाबी उदयपुर की मैसी गौड़ का IIM इंदौर एवं IIM रोहतक के आईपीएम इंटरव्यू राउंड के लिए चयन