24 News Upadte सागवाड़ा (जयदीप जोशी)। नगर के माण्डवी चौक स्थित चारभुजा मंदिर में रामस्नेही शाहपुरा के संत गोपालराम महाराज, कीर्ति राम महाराज, बाल व्यास संत रविराम एवं गोविंदराम महाराज द्वारा आयोजित हो रही भक्तमाल नानीबाई रो मायरो कथा में संत गोपालराम महाराज ने भक्तमाल के प्रसंगों के माध्यम से ईश्वर और भक्त के बीच के अनन्य, निस्वार्थ एवं अटूट प्रेम का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि भगवान को पाने का सबसे सरल मार्ग प्रेम और भक्ति है। उन्होंने कहा कि भक्तमाल केवल संतों की जीवनगाथा नहीं, बल्कि प्रेम की सर्वोच्च परिभाषा है। बाल व्यास संत रविरामजी का ब्यावर के सोमेश्वर महादेव मंदिर परिसर में 2 जून से श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ होगा।संत ने कहा कि जहाँ प्रेम है, वहाँ कृष्ण हैं, जहाँ भक्ति है, वहाँ राधा हैं और जहाँ राधा-कृष्ण का नाम है, वहीं सच्चा आनंद और सुख है। किसी भी घर की वास्तविक शक्ति धन-दौलत, वैभव और शौहरत नहीं होती, बल्कि प्रेम, सद्भाव और आपसी अपनापन होता है। प्रेम के बिना धन और यश भी निरर्थक हैं, जबकि जिस घर में प्रेम रहता है, वहाँ सुख, समृद्धि और सम्मान स्वयं चले आते हैं। उन्होंने कहा कि जिस परिवार में सास-बहू प्रेमपूर्वक रहती हैं, भाई-भाई परस्पर स्नेह से मिलते हैं तथा बच्चे प्रतिदिन बड़े-बुजुर्गों का सम्मान कर उनका आशीर्वाद लेते हैं, वह घर धरती पर स्वर्ग के समान बन जाता है। संत ने कहा कि माता-पिता के लिए सबसे बड़ा सौभाग्य यह है कि उनके पुत्र आपस में प्रेम और एकता के साथ रहें। यदि माता-पिता के रहते हुए भाई-भाई अलग हो जाएँ तो इससे बड़ा दुर्भाग्य और कोई नहीं हो सकता। संत ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए कहा कि यदि कोई संत नहीं बन सकता तो उसे एक आदर्श गृहस्थ बनने का प्रयास करना चाहिए और अपने घर को प्रेम, संस्कार एवं सदाचार से स्वर्ग बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि घर का वातावरण कलह, तनाव और कटुता से भरा होगा तो मंदिर में भी मन को शांति नहीं मिलेगी। लेकिन यदि घर में प्रेम, सम्मान और सद्भाव का वातावरण होगा तो वही घर परिवार के लिए तीर्थ और मंदिर बन जाएगा।बाल संत रविराम महाराज, गोविंद राम महाराज ने भजन सुनाए – देखो मर्द नरसी मेहता माहरो ले जावे है… आजा आजा रे सांवरिया भात भरा जा रे सांवरिया, भरजा नानी बाई को मायरो, नानी बाई के माहिरा की ठाकुर जी ने लाज। घणी दूर सूं दौड़ियो आओ गाड़ूली के लार, गाड़ी में बैठा ले बाबा जानो नगर अंजार। संत कीर्ति राम महाराज ने नरसिंह के बारे में बताया कि जैसे पुष्प खिलने पर सुगंध स्वतः ही चारों ओर फैलती है, वैसे ही साधना के परिपाक से सेवा का प्रस्फुटन होता है। जहाँ साधन नहीं, वहाँ सेवा प्रायः दिखावा या बाध्यता बन जाती है; किंतु जहाँ साधना है, वहाँ सेवा प्रेम, त्याग और आत्मीयता से परिपूर्ण होती है। अतः यह कहा जा सकता है कि सेवा साधना का फल है, सेवा साधना की परिपक्वता है, उसकी परिणति है, उसका साकार रूप है। साधना भीतर की यात्रा है और सेवा उसी यात्रा का बाह्य विस्तार है। जब दोनों का समन्वय हो जाता है, तब मनुष्य का जीवन न केवल स्वयं के लिए, अपितु संपूर्ण सृष्टि के लिए मंगलकारी बन जाता है।प्रवक्ता बलदेव सोमपुरा ने बताया कि रामस्नेही बाल व्यास संत रविरामजी का सोमेश्वर महादेव मंदिर परिसर, ब्यावर में 2 से 8 जून 2026 तक श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ रहेगा। कथा प्रारंभ में यजमान एवं समिति के सदस्यों द्वारा पोथी-पूजन किया गया। आरती यजमान सुधीर वाडेल, हेमंत गुप्ता, नवनीत सोनी, दिलीप कोठारी, अनिल सोनी, नानूलाल मोड पटेल, सपना-बिंदिया सेवक एवं मुख्य यजमान मनोहरलाल पंचाल द्वारा की गई। आज का संत-प्रसाद मनोज शाह तथा जयप्रकाश गुप्ता का रहा। इस अवसर पर पुनित वाडेल, कल्पना वाडेल, संगीता सेवक, चाहना सेवक, पुष्पा सेवक, मुकेश कोठारी, विनोद कोठारी, जितेंद्र सुथार, भरत शर्मा, अनीता सुथार, लक्ष्मण मोची, यशवंत शाह, राहुल भाटिया, देवीलाल सोनी, अशोक भावसार, हेमंत सोमपुरा, देवीलाल पंचाल, ईश्वर सेवक, देवीलाल मोची सहित कई महिला व पुरुष भक्त उपस्थित थे। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation आचार्य श्रेय सागरजी महाराज ससंघ का चातुर्मास पाडवा में होगा ओलंपियन व अर्जुन अवॉर्डी तीरंदाज मीणा के निधन पर भावभीनी श्रद्धांजलि दी