उदयपुर। उदयपुर शहर विधायक तराचंद जैन विधानसभा में मार्मिक अपील कर रहे हैं कि साहब, अरावली की पहाड़ियों को बचा लीजिए। ऐसा बंदोबस्त कीजिए कि पहाड़ परमानेंट संरक्षित हो जाएं। एक इंच जमीन भी ना ली जाए पहाड़ों की। तो दूसरी तरफ जिला प्रशासन ओल इज वेल का मंत्र जप रहा है। आज अपने एसी चैम्बरों से अफसर फिर बाहर निकले व पहाड़ों के दर्शन करके कहा कि —प्रशासन मुस्तैद है संरक्षण के लिए। ये कैसा संरक्षण है कि जिसमें विधायकजी खुद विधानसभा में अपील करते नजर आ रहे हैं तो शहर में ही प्रशासनिक अमला सब कुछ ठीक होने का राग अलाप रहा है। एक और बात ये हो रही है कि जब जनता जवाब मांग रही है आरटीआई में तो यही अफसर कह रहे हैं कि खान विभाग से पूछो। कलेक्टर साहब टरका रहे हैं और बात यूडीए पर ढोल रहे हैं। यूडीए कह रहा है कि कहां पहाड़ियां कट रही है खान विभाग से पूछो। ये चल क्या रहा है भाई साहब उदयपुर में। लोग कह रहे हैं कि अरावली फाइल्स चल रही है। जगह जगह काम चल रहा है। बार बार शिकायतें आ रही है कि आज यहां कटा, कल वहां कटा। सब जगह कटे—सब जग बंटे। मगर प्रशासन की रिपोर्ट एकदम ओके वाली आ रही है। तो प्रशासन सबसे पहले विधायकजी को कोन्फिडेंस में क्यों नहीं लेता?? जो जयपुर जाकर सवाल उठा रहे हैं सरकार के सामने। उनके सामने तथ्य क्यों नहीं रखती ब्यूरोक्रेसी। आज खबर जारी की गई कि जिला कलक्टर नमित मेहता स्वयं इसकी नियमित निगरानी कर रहे हैं। जिला कलक्टर ने बड़गांव उपखंड अंतर्गत ईसवाल एवं लोसिंग क्षेत्र का औचक दौरा कर जमीनी हकीकत का जायजा लिया। इस दौरान उदयपुर विकास प्राधिकरण आयुक्त राहुल जैन भी उनके साथ रहे। कलेक्टर तथा आयुक्त ने जैन गुरूवार शाम बड़गांव क्षेत्र के दौरे पर उपखंड अधिकारी एवं तहसीलदार से क्षेत्र में अब तक की गई कार्रवाई, जब्ती, एफआईआर, सीज की गई मशीनरी तथा निगरानी तंत्र की स्थिति की विस्तृत जानकारी ली। यही तो जानकारी चाहिए थी जनता को। पता तो चले कि जहां रिसोर्ट बने हैं खनन हुआ है वो सही था या नहीं। बाकी पहाडों पर बोर्ड लगवा दीजिए, ओनलाइन कर दीजिए डेटा कि ये पहाड अभी ऐसे हैं जिन पर कोई खनन नहीं हुआ है व भविष्य में नहीं हो पाएगा। मगर प्रशासन ये डेटा लगता है विधायक के साथ भी शेयर नहीं कर रहा, इसलिए विधायकजी को सवाल विधानसभा में गूंजाना पड़ रहा है।कलेक्टर का कहना है कि अरावली क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। दौरे के दौरान कलेक्टर मेहता ने लोसिंग तालाब की पाल का निरीक्षण कर उसकी स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने उपखंड अधिकारी को आवश्यकतानुसार सौंदर्यीकरण कार्य करवाने, साफ-सफाई, हरियाली बढ़ाने तथा संरचनात्मक मजबूती के उपाय करने के निर्देश दिए, ताकि क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और पर्यावरणीय संतुलन बना रहे। इस दौरान बड़गांव उपखंड अधिकारी लतिका पालीवाल, तहसीलदार हितेश जोशी सहित यूडीए एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। सवाल बरकरार, डेटा पर पहरा क्यों सवाल अब भी बरकरार है कि अगर खनन का कोई डेटा है पहाडों को कोटने की कार्रवाई का कोई ब्योरा है तो उसे जनता के सामने रखने में क्या हर्ज है। अगर यूडीए ठीक से काम कर रहा है। राहु—ल काल में पारदर्शिता का बोलबाला है तो फिर डर काहे का। पर्देदारी से तो लोगों में भ्रम हो रहा है। इसके अलावा अधिकारियों को मौके पर जाने की जरूरत ही क्या है, उनका अमला क्या कर रहा हैं। हर इंच की रिपोर्ट पटवारियों के पास है। तहसीलदारों से एक मिनट में व्हाटसएप पर रिपोर्ट मंगवाई जा सकती है। अन्य इलेक्ट्रोनिक साधन हैं तो फिर सूचनाओं पर पहरा आखिर क्यों। यूडीए व जिला प्रशासन आखिर ऐसा हैल्पलाइन नंबर या आपात नंबर क्यों नहीं जारी कर रहा जिस पर पहाड़ों की कटिंग की जानकारी तत्काल दी जा सके??? पारदर्शिता नहीं होगी तो सवाल उठेंगे व सवालों के जवाब नहीं दिए जाएंगे तो भी बड़े सवाल उठेंगे। सवाल पहाड़ बन जाएंगे और परेशान भी करते रहेंगे। जब तक कि पारदर्शी जवाब नहीं दिए जाएंगे। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation सायरा थाना पुलिस की बड़ी सफलता: गिरफ्तार आरोपी से तीन चोरी की मोटरसाइकिलें बरामद नकारा अधिकारियों को हटाए सरकार, खुद ले संज्ञान – सिंघवी, ट्रैवल व्यापारियों का उग्र प्रदर्शन