24 News Updateउदयपुर। हाईकोर्ट ने सुविवि के प्रोफेसर डॉ. महेंद्र सिंह ढाका की सेवामुक्ति के आदेश पर रोक लगा दी है। लगभग पांच महीने पहले विश्वविद्यालय ने 23 दिसंबर 2025 को उनकी सेवाएं समाप्त कर दी थीं। राजस्थान उच्च न्यायालय ने आज मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय उदयपुर से जुड़े इस बेहद खास मामले में अंतरिम राहत प्रदान करते हुए अपने अवलोकन में स्पष्ट कहा कि कुलाधिपति द्वारा कराई गई जांच केवल तथ्य-खोज याने कि fact-finding inquiry है, जिसे किसी भी स्थिति में विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही का विकल्प नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि बिना नियमित जांच और प्राकृतिक न्याय के पालन के की गई सेवामुक्ति प्रथम दृष्टया मनमानी प्रतीत होती है। यह याचिका 14 मई को लगाई गई थी। प्रो. ढाका ने आज खुद पैरवी की । पूरा मामला क्या हैडॉ. महेंद्र सिंह ढाका वर्ष 2012 में MLSU के भौतिकी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में नियुक्त हुए थे। उनकी नियुक्ति ओबीसी आरक्षित पद पर हुई थी। इसके बाद 19 दिसंबर 2015 को यूजीसी कैरियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत प्रोफेसर पद पर पदोन्नति दी गई। वे बाद में प्रशासनिक जिम्मेदारियों में भी रहे और 18 जुलाई 2019 को डीएसडब्ल्यू तथा 21 अक्टूबर 2024 को डीन साइंस कॉलेज सहित अन्य पदों पर कार्यरत रहे। विवाद की पृष्ठभूमियह विवाद वर्ष 2010 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है, जिस पर बाद में शिकायतें दर्ज हुईं। इसके आधार पर वर्ष 2022 में राज्यपाल (कुलाधिपति) के निर्देश पर एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की गई। समिति ने 30 मई 2023 को अपनी रिपोर्ट में यह टिप्पणी की कि नियुक्ति प्रक्रिया में अनियमितताएं पाई गईं तथा ओबीसी प्रमाण पत्र की वैधता पर प्रश्नचिह्न है। इसी रिपोर्ट के आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासनिक कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ी। जांच, FIR और बर्खास्तगी तक की प्रक्रियाविश्वविद्यालय की बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट (BOM) की बैठक 01 जुलाई 2023 में यह निर्णय लिया गया कि मामले में आगे विधिक कार्रवाई की जाए। इसके बाद 14 अक्टूबर 2025 को थाना प्रतापनगर, उदयपुर में FIR संख्या दर्ज की गई, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धाराएं 181, 199, 200 और 420 लगाई गईं। आरोप है कि नियुक्ति के समय गलत शपथ पत्र एवं प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए गए थे। इसके बाद विश्वविद्यालय ने 24 नवंबर 2025 को स्पष्टीकरण की प्रक्रिया प्रारंभ की और अंततः 23 दिसंबर 2025 को बोर्ड ने डॉ. ढाका की सेवाएं समाप्त करने का निर्णय लिया। हाईकोर्ट का विधिक विश्लेषणन्यायमूर्ति कुलदीप माथुर की एकलपीठ ने रिकॉर्ड का परीक्षण करते हुए महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांतों पर टिप्पणी की—फैक्ट-फाइंडिंग बनाम विभागीय जांच में अदालत ने स्पष्ट किया कि कुलाधिपति द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट केवल तथ्यात्मक निष्कर्ष देती है और इसे विभागीय अनुशासनात्मक जांच का विकल्प नहीं बनाया जा सकता। ड्यू प्रोसेस ऑफ लॉ अनिवार्य है। कोई भी स्थायी कर्मचारी सेवा से हटाने से पहले ड्यू प्रोसेस ओफ लॉ और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है। प्रथम दृष्टया अवैध कार्रवाईबिना नियमित विभागीय जांच के दी गई सेवामुक्ति प्रथम दृष्टया अवैध, मनमानी एवं अधिकार क्षेत्र से परे प्रतीत होती है। अदालत ने यह भी कहा कि किसी भी उच्च प्रशासनिक प्राधिकारी के निर्देश होने पर भी नियमों और सेवा विधि के प्रावधानों को दरकिनार नहीं किया जा सकता।अंतरिम राहतहाईकोर्ट ने 23 दिसंबर 2025 के सेवामुक्ति आदेश पर रोक लगाते हुए निर्देश दिए— कि डॉ. महेंद्र सिंह ढाका को फिलहाल प्रोफेसर पद पर कार्य जारी रखने दिया जाए। विश्वविद्यालय चाहे तो सेवा नियमों के तहत वैध विभागीय जांच प्रारंभ कर सकता है। FIR मामले में पूर्व में दी गई अंतरिम राहत जारी रहेगी, हालांकि जांच में सहयोग अनिवार्य होगा।इस मामले से यह साफ हो गया है कि किसी भी कर्मचारी के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई बिना सुनवाई और निर्धारित प्रक्रिया के विधिसम्मत नहीं हो सकती।” अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कुलाधिपति या प्रशासनिक स्तर की जांच, किसी भी परिस्थिति में नियमित अनुशासनात्मक प्रक्रिया का स्थान नहीं ले सकती। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation भारत रत्न पण्डित जवाहर लाल नेहरू जी की पुण्यतिथि पर कांग्रेसजनों ने दी श्रद्धांजलि