24 News update सागवाड़ा (जयदीप जोशी)। माण्डवी चौक स्थित चारभुजा मंदिर में कान्हडदास धाम बड़ा रामद्वारा रामस्नेही संप्रदाय के संत गोपालराम महाराज, कीर्ति राम महाराज, बालव्यास संत रविराम, गोविंदराम महाराज द्वारा पुरुषोत्तम मास में आयोजित सात दिवसीय भक्तमाल नानी बाई रो मायरो कथा के चौथे दिन संत गोपालराम महाराज ने कहा कि प्रेम की दिशा ही उसके स्वरूप को निर्धारित करती है। जब प्रेम केवल संसार की वस्तुओं, धन, पद, प्रतिष्ठा और नश्वर संबंधों तक सीमित रह जाता है, तब वह माया और मोह का रूप ले लेता है। ऐसा प्रेम मनुष्य को बंधनों में जकड़ता है, चिंता और दु:ख का कारण बनता है।संत ने कहा कि भगवान को जिस भाव से पुकारा जाता है, वे उसी भाव के साथ भक्त के जीवन में प्रकट होते हैं। प्रभु को प्रभाव, वैभव, पद या धन आकर्षित नहीं करता, बल्कि वे केवल निर्मल हृदय और निष्कपट प्रेम को देखते हैं। भगवान प्रभाव नहीं, भाव देखते हैं; धन नहीं, प्रेम देखते हैं; जाति नहीं, निर्मल हृदय देखते हैं। भक्त शिरोमणि नरसी मेहता के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान और भक्त का संबंध प्रेम का संबंध होता है। नरसी मेहता की पुकार पर स्वयं द्वारकाधीश उनकी सहायता के लिए आए और भक्त की लाज रखी। उन्होंने कहा कि इतिहास और संत परंपरा इस बात की साक्षी है कि कभी भक्त भगवान की सेवा करते हैं तो कभी भगवान भक्त की सेवा करते हैं। जहां सच्चा प्रेम होता है, वहां न कोई छोटा होता है और न कोई बड़ा। उन्होंने कहा कि प्रेम ही परमात्मा है और प्रेम ही समाज, नगर, प्रदेश तथा पूरे भारत को जोड़ने वाली सबसे बड़ी शक्ति है। जो सबको जोड़ता है, वही प्रेम है। भगवान और नरसी मेहता के बीच ऐसा ही प्रेम का रिश्ता था, जहां औपचारिक नियमों से अधिक महत्व प्रेम और समर्पण का था। कथा के दौरान संत ने कहा कि जब मनुष्य के हृदय में प्रेम जागृत होता है तो उसका रोम-रोम ईश्वरमय हो जाता है। प्रेम मनुष्य को अहंकार, भेदभाव और संकीर्णताओं से ऊपर उठाकर मानवता और ईश्वर से जोड़ देता है। कथा के दौरान संतों के भजन सुनाए “मोहन आओ तो सही…” “माधव के मंदिर में मीरा अकेली खड़ी…” सहित भजनों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। संत ने अंत में कहा कि जिस हृदय में प्रेम का दीपक जलता है, वहां स्वयं परमात्मा निवास करते हैं। बाल संत रवि राम और गोविंद राम महाराज ने कहा कि प्रेम ही जीवन का प्राण है। संसार में कोई भी रिश्ता प्रेम के बिना जीवित नहीं रह सकता। प्रेम के अभाव में संबंध केवल औपचारिकता बनकर रह जाते हैं। माता-पिता और संतान का संबंध हो, पति-पत्नी का हो, मित्रता का हो या समाज का कोई भी बंधन—उनकी आत्मा प्रेम ही है। प्रेम के बिना रिश्ता वैसे ही है जैसे प्राण के बिना शरीर। संत ने कहा कि जब यही प्रेम परमात्मा की ओर मुड़ जाता है, तब वह भक्ति बन जाता है। भक्ति वह दिव्य प्रेम है जिसमें स्वार्थ नहीं, समर्पण होता है; मांग नहीं, विश्वास होता है; अहंकार नहीं, विनम्रता होती है। भक्त और भगवान का संबंध किसी नियम या तर्क पर नहीं, बल्कि प्रेम पर आधारित होता है। परमात्मा को न धन से पाया जा सकता है, न बल से और न ही विद्वता से; उन्हें केवल निष्कपट प्रेम से पाया जा सकता है। जिस हृदय में प्रेम का दीपक जलता है, उसी हृदय में परमात्मा का प्रकाश प्रकट होता है। इसलिए संसार में रहते हुए भी अपने प्रेम को परमात्मा की ओर मोड़ना ही जीवन की सबसे बड़ी साधना और सच्ची भक्ति है। प्रेम जब भगवान से जुड़ जाता है, तब वही प्रेम मुक्ति का मार्ग बन जाता है। संत कीर्तिराम ने कहा कि भगवान के प्रति भक्तों का अटूट विश्वास ही उन्हें सही मार्ग प्रदान करता है। कथा के प्रारंभ में यजमान मनोहर पंचाल एवं समिति अध्यक्ष सुधीर वाडेल व समिति सेवा के सदस्यों द्वारा पोथी पूजन किया गया व कथा के पश्चात आरती यजमान मधु भाई संचावत, संगीता सेवक, नवनीत सोनी, अनिल सोनी, मंगलेश वाडेल, जगदीश गुप्ता, गोपाल मोची, मुख्य यजमान मनोहर पंचाल एवं उनके परिवार के सदस्यों ने आरती उतारी। इस अवसर पर प्रवक्ता बलदेव सोमपुरा, मणिलाल मोची, पुरुषोत्तम मोची, देवीलाल सोनी, संजय गुप्ता, मंगलेश गुप्ता, सपना सेवक, भानु सेवक, श्याम भट्ट, दामोदर दलाल, महेश भावसार, देवीलाल पंचाल, जगदीश टेलर, गंगाराम भोई, पूनमचंद दर्जी, राहुल भाटिया, बालमुकुंद शर्मा, रमेश भोई, मनोज ठाकुर, भरत पंड्या सहित बड़ी संख्या में महिला व पुरुष उपस्थित रहे। आज का संत प्रसाद सुधीर वाडेल तथा हेमंत गुप्ता का रहा। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation हर्षोल्लास के साथ मुस्लिम समाज ने मनाई ईद-उल-अजहा आचार्य श्रेय सागरजी महाराज ससंघ का चातुर्मास पाडवा में होगा