24 न्यूज अपडेट, उदयपुर। निर्वाचन कार्य के लिए हेतु भोजन व्यवस्था में “VIP”एवं “Non-VIP” श्रेणीकरण कर असंवैधानिक,भेदभावपूर्ण एवं मनमाना प्रबंध किए जाने संबंधी खबर 24 न्यूज अपडेट में प्रकाशित होने के बाद से विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। दो साल के लिए निकाले गए 60 लाख के टेण्डर में चुनावी भोजन में प्रशासन की ओर से किए गए इस भेदभाव का अब शिक्षक संगठनों सहित अन्य संगठनों ने भारी विरोध शुरू कर दिया है। आज इस बारे में संभागीय आयुक्त को ज्ञापन सौंपा गया। बताया गया कि निर्वाचन कार्य हेतु भोजन व्यवस्था में “VIP”एवं “Non-VIP”श्रेणीकरण कर असंवैधानिक,भेदभावपूर्ण एवं मनमाना प्रबंध किए जा रहे हैं। संभागीय आयुक्त को मुख्यमंत्री राजस्थान सरकार, मुख्य चुनाव आयुक्त राज्य निर्वाचन आयोग राजस्थान, मुख्य सचिव राजस्थान सरकार, जयपुर के नाम का ज्ञापन सौंपा। राजस्थान पंचायती राज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ प्रदेश अध्यक्ष व अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ के प्रदेश उपाध्यक्ष शेरसिंह चौहान ने बताया कि राजस्थान सरकार के राज्य कर्मचारी/अधिकारी निर्वाचन कार्य मे भागीदारी निभाते हैं।
इसमें समानता के साथ उत्कृष्टता का सेवा का भाव सर्वोच्च होता है और लोकतांत्रिक गरिमा के अनुकूल समानता का अधिकार रखता है। इस भावना के विपरीत आगामी चुनावों के मद्देनज़र जिला कलेक्टर, उदयपुर द्वारा ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर NIB / 189 17 फरवरी को जारी भोजन व्यवस्था निविदा/सूची (Annexure-E) का अवलोकन करने पर यह तथ्य प्रकाश में आया कि उसमें “VIP भोजन”, “Officer’s Tea”आदि शीर्षकों के अंतर्गत पृथक एवं विशेष श्रेणी की भोजन व्यवस्था निर्धारित की गई है,जबकि अन्य कार्मिकों/मतदान दलों हेतु पृथक एवं निम्न स्तर की व्यवस्था दर्शाई गई है।

भोजन में भेदभाव नहीं करेंगे बर्दाश्त

अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ के जिलाध्यक्ष हेमंत कुमार पालीवाल ने बताया कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 राज्य को समानता का दायित्व देता है तथा मनमाने वर्गीकरण को निषिद्ध करता है। निर्वाचन कार्य में नियुक्त सभी कार्मिक राज्य के अधीन लोक सेवक की श्रेणी में कार्यरत होते हैं। अतः भोजन जैसी मूलभूत सुविधा में वर्ग आधारित अंतर करना समानता सिद्धांत के प्रतिकूल है। राज्य की कोई भी प्रशासनिक कार्यवाही तर्कसंगत गैर-भेदभावपूर्ण एवं सार्वजनिक उद्देश्य से संबंधित होना आवश्यक है अन्यथा वह न्यायिक परीक्षण में अवैध ठहराई जा सकती है। VIP शब्द कोई वैधानिक या संवैधानिक पदनाम नहीं है तथा यह किसी विधि सेवा नियम या संविधान में लोक सेवकों की आधिकारिक श्रेणी के रूप में परिभाषित नहीं है। लोक सेवक समान संवैधानिक दायित्वों के अधीन कार्य करते हैं अतः प्रशासनिक दस्तावेजों में “VIP”शब्द का प्रयोग कर विशेषाधिकारयुक्त वर्ग बनाना विधि सिद्धांतों के प्रतिकूल है। सार्वजनिक प्रशासन में पद आधारित प्रोटोकॉल संभव है किन्तु “VIP”” जैसी अनौपचारिक एवं गैर-संवैधानिक शब्दावली का प्रयोग कर भेदभावपूर्ण सुविधाएँ देना अनुचित एवं आपत्तिजनक है।

नाश्ते से लेकर भोजन तक में भेदभाव

अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ के जिला महामंत्री लच्छीराम गुर्जर ने बताया कि सूची में “VIPभोजन” श्रेणी हेतु उच्च स्तरीय व्यंजन (पनीर,शाही पुलाव,ड्राईफ्रूट मिठाई,रायता,सलाद आदि) निर्धारित हैं,जबकि सामान्य कार्मिकों हेतु सीमित भोजन दर्शाया गया है। सामान्य चाय 75 मि.ली. जबकि “Officer’s Tea”125 मि.ली. पृथक रूप से प्रदर्शित है। VIP नाश्ता सूची में फल प्लेट,विशेष मिठाइयाँ,सैंडविच आदि सम्मिलित हैं जबकि अन्य कार्मिकों के लिए साधारण विकल्प निर्धारित हैं। यह विभाजन किसी स्पष्ट नियम,अधिसूचना या सक्षम प्राधिकारी की विधिक स्वीकृति पर आधारित प्रदर्शित नहीं होता बल्कि एक तथा कथित VIPसंस्कृति की भावना ओर राजकीय धन का अपव्यय की मानसिकता ओर भ्रष्टाचार का उदाहरण हे जबकी सरकार ध्येय हर स्तर पर सादगी ओर पारदर्शिता पूर्वक राजकीय धन का व्यय किया जाना है। यह कृत्य सरकार के सामान्य आचरण व्यवहार के विपरीत है।

विधिक रूप से अनुचित

अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ के जिला महामंत्री लच्छीराम गुर्जर ने बताया कि सार्वजनिक धन का उपयोग समानता, पारदर्शिता एवं सार्वजनिक हित के सिद्धांतों के अनुरूप होना आवश्यक है। किसी विशेष वर्ग को अतिरिक्त आतिथ्य सुविधा देना,जब वह विधिक रूप से अधिकृत न हो,वित्तीय अनुशासन एवं प्रशासनिक निष्पक्षता के सिद्धांतों के विरुद्ध है। निर्वाचन प्रक्रिया लोकतांत्रिक तटस्थता पर आधारित होती है। निर्वाचन ड्यूटी में लगे कार्मिकों के बीच “VIP” एवं “Non-VIP”का वर्गीकरण प्रशासनिक मनोबल प्रभावित करता है पक्षपात की धारणा उत्पन्न करता है निर्वाचन की निष्पक्षता की सार्वजनिक छवि को आघात पहुँचाता है।

उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए

अतः प्रार्थना है कि उक्त प्रकरण की स्वतंत्र एवं उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। .संबंधित अधिकारियों का उत्तरदायित्व निर्धारित कर आवश्यक वैधानिक/अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। भविष्य में निर्वाचन कार्यों हेतु भोजन/आतिथ्य व्यवस्था में समानता सुनिश्चित करने के स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए जाएँ। जांच प्रतिवेदन की प्रमाणित प्रति प्रार्थी को उपलब्ध कराई जाए।

ये रहे मौजूद

उक्त ज्ञापन में राजस्थान पंचायती राज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ प्रदेश अध्यक्ष व अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ के प्रदेश उपाध्यक्ष शेर सिंह चौहान, सयुंक्त महासंघ के जिलाध्यक्ष हेमंत कुमार पालीवाल, जिला महामंत्री लच्छीराम गुर्जर, आईटी प्रभारी जसवंत सिंह चौहान, राजस्थान पंचायती राज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ प्रदेश कोषाध्यक्ष सतीश जैन प्रदेश प्रचार मंत्री सुरेश खंडारिया जिला अध्यक्ष चंद्रशेखर परमार जिला महामंत्री कमलेश शर्मा ब्लॉक अध्यक्ष गिरवा प्रेम राज बैरवा ब्लॉक अध्यक्ष बड़गांव प्रेम सिंह भाटी ब्लॉक शहर महामंत्री चेतराम मीणा मनोज मोची सुनील मखीजा रईस खान प्रदीप भानावत सुरेश गरासिया गजेंद्र शर्मा नानकराम बैरवा देवेंद्र सिंह महावीर गढ़वाल आकाश पाल अशोक मीणा राजस्थान पर्यटन विकास विभाग के जिलाध्यक्ष कमलेश वर्मा, राजस्थान शिक्षक संघ प्रगतिशील से विनोद शर्मा, हीरालाल गमेती, महिला संगठन मंत्री कमलेश चौधरी, महिला संयुक्त मंत्री कैलाश कुंवर, संगठन महामंत्री मदनलाल सिंगाडिया, राजस्थान हाउसिंग बोर्ड से मुकेश शर्मा, पशुपालन संघ से खेमराज मीणा, मंसाराम अहारी, राजस्थान हैंडपंप मिस्त्री संघ से नन्दलाल लबाना, हीरालाल चंदेरिया, राजस्थान राज्य अधीनस्थ संघ से प्रकाश चंद खटीक, राजस्थान पंचायतीराज एवं माध्यमिक शिक्षा संघ से भेरुलाल कलाल, ग्राम विकास अधिकारी संघ से कमलेश सेन, राजस्थान कृषि पर्यवेक्षक स्नातक से शंकर नकवाल, निलेश यादव, पटवार संघ से प्रवीन मेनारिया, आयुर्वेद परिचारक संघ से अशोक भट्ट, आदि उपस्थित थे। यह जानकारी अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ उदयपुर के आई.टी. प्रभारी जसवन्त सिंह चौहान ने दी।


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