24 News Udpate कानपुर, 2 जून। वर्षों से उपेक्षा का शिकार रही ग्राम कानपुर की ऐतिहासिक पथवारी चौक बावड़ी अब नए स्वरूप में नजर आएगी। राजस्थान सरकार के “गंगा जल संरक्षण एवं संवर्धन अभियान” तथा “कैच द रेन” अभियान के तहत राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल (आरएसपीसीबी) के तकनीकी मार्गदर्शन में कोरोमंडल इंटरनेशनल लिमिटेड द्वारा सीएसआर पहल के अंतर्गत बावड़ी के संरक्षण, संवर्धन एवं जीर्णोद्धार कार्य का मंगलवार को विधिवत शुभारंभ किया गया।वैदिक मंत्रोच्चार और हवन की पावन ध्वनि के बीच आयोजित कार्यक्रम में उस समय भावनात्मक माहौल बन गया जब बावड़ी में कार्य कर रहे श्रमिकों ने पानी आने और बावड़ी के छलक उठने की सूचना दी। यह खबर सुनते ही मौजूद ग्रामीणों में उत्साह की लहर दौड़ गई और पूरा परिसर “हर-हर गंगे” के जयघोष से गूंज उठा। कई ग्रामीणों ने इसे मां गंगा की कृपा और शुभ संकेत बताया।कार्यक्रम का शुभारंभ राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी शरद सक्सेना ने पौधारोपण कर किया। इस दौरान बावड़ी परिसर में छायादार एवं फलदार पौधे लगाए गए। आयोजन में पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए हवन में पारंपरिक लकड़ियों के साथ गोकाष्ठ का भी उपयोग किया गया।समारोह में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश राहुल चौधरी, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के प्रतिनिधि, कोरोमंडल इंटरनेशनल लिमिटेड के यूनिट प्रमुख अखिल द्विवेदी सहित कंपनी के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। वहीं पूर्व उपसरपंच मदनलाल डांगी, समाजसेवी अर्चना चारण, पूर्व उपसरपंच सुरेश कुमार पटेल, राधाकृष्ण पुष्करणा, गणेशलाल मेनारिया, कन्हैयालाल पुष्करणा, जीएस क्लब कानपुर के किशन बागावत, प्रवीण वातडा, शंकर पटेल, निखिल पटेल, तारा पटेल सहित हजारों ग्रामीण कार्यक्रम के साक्षी बने।ग्रामीणों ने इस अवसर पर बावड़ी को पूर्ण रूप से हेरिटेज स्वरूप में विकसित करने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि बावड़ी के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए यहां पारंपरिक रहट प्रणाली स्थापित की जाए तथा आकर्षक प्रकाश व्यवस्था सहित अन्य सुविधाएं विकसित कर इसे पर्यटन स्थल के रूप में संवारा जाए। अधिकारियों ने ग्रामीणों की मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए आश्वासन दिया कि जीर्णोद्धार कार्य में ऐतिहासिक स्वरूप को प्राथमिकता दी जाएगी।गांव के बुजुर्गों ने बावड़ी से जुड़ी पुरानी यादें साझा करते हुए बताया कि एक समय इस बावड़ी से इतना स्वच्छ जल निकलता था कि लोग सीधे इसका पानी पीते थे। बदलते समय और उपेक्षा के कारण यह जीवनदायिनी धरोहर सूखने लगी, लेकिन अब इसके पुनर्जीवन की शुरुआत ने ग्रामीणों में नई उम्मीद जगा दी है। कार्यक्रम के दौरान मां गंगा की भव्य महाआरती भी आयोजित की गई, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। करतल ध्वनि और भक्ति गीतों के बीच पूरा वातावरण आध्यात्मिक रंग में रंग गया। विशेषज्ञों का मानना है कि बावड़ी का पुनर्जीवन केवल एक ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और ग्राम की जल सुरक्षा को भी मजबूती प्रदान करेगा। साथ ही यह स्थल नवरात्रि मेले, धार्मिक आयोजनों और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र भी बन सकेगा। कार्यक्रम के अंत में पूर्व उपसरपंच मदनलाल डांगी ने सभी अतिथियों एवं ग्रामवासियों का आभार व्यक्त करते हुए जल संरक्षण के इस अभियान में जनभागीदारी को सबसे बड़ी ताकत बताया। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation मानसून की दस्तक में देरी, लेकिन देशभर में बदला मौसम: 27 राज्यों में बारिश का अलर्ट, राजस्थान में ओले-आंधी से गर्मी ढही वेदांता समूह पर ईडी की दबिश: मुंबई-दिल्ली दफ्तरों में छापेमारी, विदेशी रॉयल्टी भुगतान जांच के घेरे में