24 News Update जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने एक रिपोर्टेबल जजमेंट में यौन अपराधों से जुड़े मामलों में पीड़िता की निजी, अश्लील फोटो और वीडियो के उपयोग को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने स्पष्ट कहा है कि ऐसे संवेदनशील डिजिटल साक्ष्य केवल सीलबंद लिफाफे या पासवर्ड-लॉक इलेक्ट्रॉनिक फोल्डर में ही प्रस्तुत किए जाएं।यह आदेश न्यायमूर्ति जस्टिस अनूप ढंढ की अदालत ने एक आपराधिक मामले की सुनवाई के दौरान दिया। अदालत ने टिप्पणी की कि वर्तमान समय में जमानत याचिकाओं, आपराधिक रिवीजन और अपील जैसे मामलों में आरोपी या पुलिस द्वारा पीड़िता की निजी तस्वीरें और वीडियो सीडी, पेन ड्राइव या खुले दस्तावेजों के रूप में पेश किए जा रहे हैं, जो गंभीर चिंता का विषय है।कोर्ट ने कहा कि इस तरह के साक्ष्य सार्वजनिक होने से उनके वायरल होने का खतरा रहता है, जिससे पीड़िता के वर्तमान जीवन, भविष्य और वैवाहिक जीवन पर गंभीर और अपूरणीय असर पड़ सकता है। अदालत ने इसे महिलाओं की गरिमा और गोपनीयता का स्पष्ट उल्लंघन बताया।अदालत ने यह भी कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर व्यक्ति को गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार प्राप्त है। लेकिन जब जांच प्रक्रिया ही अपमान का माध्यम बन जाए, तो वह अपने मूल उद्देश्य से भटक जाती है और न्याय प्रक्रिया स्वयं पीड़ा का कारण बन सकती है। कोर्ट ने कहा कि जब ट्रायल का स्वरूप सार्वजनिक शर्मिंदगी का कारण बनने लगे, तो यह संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।अदालत ने अपने आदेश में यह भी टिप्पणी की कि कई बार आरोपी या उनके वकील यह साबित करने के लिए कि संबंध सहमति से थे, निजी फोटो और वीडियो जांच अधिकारी या अदालत के समक्ष खुले तौर पर प्रस्तुत कर देते हैं, जिससे पीड़िता की पहचान उजागर होने का गंभीर खतरा पैदा होता है।इसी को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिए हैं कि यौन अपराधों से जुड़े सभी मामलों की सख्त स्क्रीनिंग की जाए, ताकि किसी भी स्थिति में नाम, पता, फोटो या सोशल मीडिया से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक न हो। साथ ही रजिस्ट्रार न्यायिक को यह मामला प्रशासनिक स्तर पर मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि पूरे राज्य के लिए एक समान स्टैंडिंग ऑर्डर जारी किया जा सके।अदालत ने यह भी आदेश दिया कि रजिस्ट्रार जनरल सभी न्यायिक अधिकारियों को यह निर्देश भेजें और एसीएस होम, डीजीपी, पुलिस महानिदेशक, मुख्य विधि सचिव और अभियोजन विभाग को इसकी प्रति भेजकर सभी थानों के एसएचओ को सूचित किया जाए, ताकि जमीनी स्तर पर इसका सख्ती से पालन सुनिश्चित हो सके। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation राजस्थान है तो मुमकिन है : जयपुर सेंट्रल जेल में फिर मिला मोबाइल, पूरा सिस्टम भ्रष्ट तो जेल कैसे बचेगा??? ऑपरेशन त्रिनेत्र: प्रतापगढ़ पुलिस का नशा माफिया पर महाप्रहार, दो बड़े तस्करों की ₹3.20 करोड़ की संपत्ति फ्रीज