— शौर्य चक्र विजेता मेजर मुस्तफा बोहरा के परिवार को तीन साल बाद भी नहीं मिला आवास और भूखंड का लाभ

— राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री तक भेजा गया ज्ञापन

24 News Update उदयपुर। जब भी मेवाड़ की धरती के शौर्य की बात होती है, तो सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। यह वही धरती है, जिसने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने बेटों को हंसते-हंसते रणभूमि में भेजा। हर राष्ट्रीय पर्व पर नेताओं के भाषणों में शहीदों के बलिदान का गुणगान होता है। मंचों से कहा जाता है कि “देश अपने शहीदों का हमेशा ऋणी रहेगा” और “शहीदों के परिवारों का सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता है।” लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सम्मान सिर्फ शब्दों तक सीमित है? अगर नहीं, तो फिर देश के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले शौर्य चक्र विजेता शहीद मेजर मुस्तफा बोहरा के परिवार को आज भी अपने अधिकारों के लिए सरकारी दफ्तरों की चौखट क्यों घिसनी पड़ रही है?
ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि मेजर मुस्तफा बोहरा के शहीद होने के लगभग तीन वर्ष बाद भी उनके परिवार को सरकार की ओर से मिलने वाले कई अधिकार और सुविधाएं अब तक नहीं मिल सकी हैं।

राष्ट्रपति से लेकर मुख्यमंत्री तक भेजा गया ज्ञापन
इस मामले को लेकर समाजसेवी एवं भाजपा उदयपुर देहात के पूर्व कार्यवाहक जिलाध्यक्ष वीरेन्द्र सिंह सोलंकी ने शनिवार को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और राजस्थान के मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि वर्ष 2022 में देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले मेजर मुस्तफा बोहरा को वर्ष 2024 में मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। लेकिन सम्मान मिलने के बाद भी उनके परिवार को सरकार द्वारा घोषित योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पाया।
सबसे बड़ा मुद्दा आवास और भूखंड आवंटन का है। वर्ष 2023 से यह मामला राजस्थान हाउसिंग बोर्ड, उदयपुर विकास प्राधिकरण और संबंधित सरकारी विभागों में लंबित पड़ा है। तीन साल बीतने के बावजूद फाइलें आगे नहीं बढ़ सकीं और शहीद का परिवार आज भी सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर है।

देश के लिए जान दी, अब परिवार न्याय की प्रतीक्षा में
यह केवल एक प्रशासनिक देरी नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है, जो हर मंच से शहीदों के सम्मान की बात करती है। जिस परिवार ने देश को अपना बेटा दिया, क्या उसे अपने अधिकारों के लिए बार-बार गुहार लगानी पड़े? क्या एक शौर्य चक्र विजेता शहीद का परिवार भी सामान्य आवेदकों की तरह वर्षों तक फाइलों के निस्तारण का इंतजार करेगा?
यदि शहीदों के परिवारों के मामले भी वर्षों तक लंबित रहेंगे, तो फिर आम नागरिक व्यवस्था से क्या उम्मीद करेगा?

15 दिन में समाधान की मांग
ज्ञापन में मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि इस पूरे मामले के लिए तत्काल एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए, जो अधिकतम 15 दिनों के भीतर सभी लंबित प्रकरणों का निस्तारण कराए और शहीद परिवार को सरकार द्वारा घोषित सभी सुविधाएं उपलब्ध करवाए।

ऐसा था वह आखिरी मिशन, जिसने मेजर मुस्तफा को अमर बना दिया
21 अक्टूबर 2022 को असम के लिकाबाली क्षेत्र में आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन के मेजर मुस्तफा बोहरा अपने साथी पायलट मेजर विकास भाम्भू के साथ एक महत्वपूर्ण सैन्य मिशन पर थे।
उड़ान के दौरान अचानक हेलीकॉप्टर में तकनीकी खराबी आ गई और उसमें आग लग गई। स्थिति बेहद गंभीर थी। दोनों अधिकारी चाहते तो अपनी जान बचाने की कोशिश कर सकते थे। लेकिन उन्होंने अपने जीवन से पहले देशवासियों की सुरक्षा को चुना। दोनों जांबाज अधिकारियों ने जलते हुए हेलीकॉप्टर को आबादी वाले इलाके से दूर जंगल की ओर मोड़ दिया, ताकि नीचे रह रहे निर्दोष लोगों की जान बचाई जा सके। कुछ ही क्षण बाद हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया और दोनों वीर अधिकारी मातृभूमि पर बलिदान हो गए। 23 अक्टूबर 2022 को मेजर मुस्तफा बोहरा का पार्थिव शरीर पूरे सैन्य सम्मान के साथ उदयपुर लाया गया, जहां हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।
उनके अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2024 में उन्हें मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया।

सवाल, जिनका जवाब व्यवस्था को देना होगा
देश अपने शहीदों का सम्मान केवल पदक देकर पूरा नहीं कर सकता। असल सम्मान तब होगा, जब उनके परिवारों को उनके अधिकारों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। यदि शौर्य चक्र विजेता शहीद के परिवार की फाइल भी वर्षों तक सरकारी अलमारियों में धूल फांकती रहे, तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि व्यवस्था की संवेदनशीलता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न है। मेजर मुस्तफा बोहरा ने अपनी आखिरी सांस तक देश और देशवासियों की रक्षा की। अब बारी सरकार और प्रशासन की है कि वह यह साबित करे कि शहीदों का सम्मान सिर्फ भाषणों, माल्यार्पण और पदकों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके परिवारों के सम्मानजनक जीवन और समय पर न्याय में भी दिखाई देता है।


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By desk 24newsupdate

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