24 News Update नई दिल्ली, 1 सितंबर। NEET-UG पेपर लीक के विरोध में जुलाई में हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व वाले छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने 20 से 25 जुलाई के प्रदर्शन से संबंधित FIRs को रद्द करने का आदेश दिया, लेकिन गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 2,873 लोगों से जुड़े मामले को इससे अलग रखा है। दिल्ली पुलिस को इन लोगों की भूमिका की जांच के लिए एक अलग FIR की अनुमति दी गई है।सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह राहत मामले की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए दी गई है और इसे दूसरे मामलों के लिए मिसाल या बाध्यकारी फैसला नहीं माना जाएगा। साथ ही आदेश का आधार यह है कि सरकार और प्रदर्शनकारी संगठन के बीच अदालत के समक्ष दिए गए आश्वासनों का पालन किया जाएगा। 13 FIR वापस लेने की थी मांगमामले की शुरुआत 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन के बाद हुई थी। दिल्ली पुलिस ने अलग-अलग घटनाओं को लेकर 13 FIR दर्ज की थीं। इनमें दंगा, हत्या के प्रयास, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अन्य गंभीर धाराएं शामिल थीं। 31 अगस्त को दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में आवेदन देकर इन मामलों को आगे नहीं चलाने की अनुमति मांगी थी।सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि 25 जुलाई को CJP नेताओं के साथ सरकार की बातचीत में जो आश्वासन दिए गए थे, उन्हें पूरा करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। इन्हीं आश्वासनों के तहत प्रदर्शन से जुड़ी व्यापक FIR वापस लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। 2,873 लोगों का मामला अलग क्यों?यह इस पूरे फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया कि प्रदर्शन स्थल पर मौजूद 2,873 लोगों की पहचान ऐसे व्यक्तियों के रूप में हुई है, जिनके गंभीर आपराधिक पूर्ववृत्त बताए गए हैं। पुलिस ने इन लोगों के खिलाफ एक अलग और सीमित FIR दर्ज कर जांच करने की अनुमति मांगी थी। कोर्ट ने इस अपवाद को बरकरार रखा है। इसका मतलब यह नहीं है कि इन सभी 2,873 लोगों को प्रदर्शन के दौरान हिंसा या तोड़फोड़ का दोषी मान लिया गया है। पुलिस को जांच के जरिए यह पता लगाना होगा कि इनमें से किसकी प्रदर्शन के दौरान मारपीट, शारीरिक नुकसान या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में वास्तविक भूमिका थी। चेहरे पहचानने वाली तकनीक से हुई थी पहचानइस मामले में पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान इस्तेमाल की गई फेस रिकग्निशन तकनीक को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट में जानकारी दी थी। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार प्रदर्शन स्थल पर बड़ी संख्या में लोगों की पहचान की गई थी और पुलिस ने दावा किया था कि सिस्टम ने खास तौर पर पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड वाले व्यक्तियों को चिन्हित किया। इस प्रक्रिया को लेकर निगरानी और निजता के सवाल भी उठे थे। 5 सितंबर का प्रस्तावित मार्च भी वापससुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद CJP ने 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित मार्च वापस लेने का ऐलान कर दिया। संगठन की ओर से कोर्ट को बताया गया कि केंद्र के सकारात्मक रुख और FIR वापस लेने की कार्रवाई के बाद मार्च का आह्वान वापस लिया जा रहा है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation यूपी में चुनाव से करीब 9 महीने पहले ‘फ्री’ फैसलों की झड़ी, 25 लाख युवाओं को टैबलेट, 60+ महिलाओं को आजीवन मुफ्त बस यात्रा, एमबीबीएस छात्रों का भत्ता दोगुने से ज्यादा 7.8% GDP ग्रोथ, PM मोदी की फिर अपील- जरूरत न हो तो सोना न खरीदें, विदेश यात्रा से भी बचें