भारत के 17 पदक, अब नीरज चोपड़ा पर गोल्ड की उम्मीद ग्लासगो, 31 जुलाई। कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। शुक्रवार को प्रतियोगिता के आठवें दिन भारतीय मुक्केबाजों ने दमदार प्रदर्शन करते हुए पांच वर्गों के फाइनल में जगह बना ली। इसके साथ ही भारत के लिए कम से कम पांच रजत पदक सुनिश्चित हो गए हैं और अब इन खिलाड़ियों से स्वर्ण पदक की उम्मीद बढ़ गई है। दिन के मुकाबलों में जादुमणि सिंह ने पुरुष 55 किलोग्राम वर्ग के सेमीफाइनल में नामीबिया के फिलिप हाउसेब को हराकर फाइनल में प्रवेश किया। इससे पहले अंकुश पंघाल, अरुंधति चौधरी, जैस्मीन लम्बोरिया और प्रीति पवार भी अपने-अपने वर्गों के स्वर्ण पदक मुकाबले में जगह बना चुके थे। प्रीति, जैस्मीन और अंकुश का एकतरफा प्रदर्शन महिला 54 किलोग्राम वर्ग में प्रीति पवार ने जाम्बिया की कैथरीन म्वापे को 5-0 से हराकर फाइनल का टिकट कटाया। वहीं 57 किलोग्राम वर्ग में जैस्मीन लम्बोरिया ने लेसोथो की रेप्लेंग मसेला को आरएससी से पराजित कर स्वर्ण पदक मुकाबले में प्रवेश किया। पुरुष 80 किलोग्राम वर्ग में अंकुश पंघाल ने कनाडा के जोशुआ ओफोरी को 5-0 से शिकस्त दी। अंकुश ने तीनों राउंड में दबदबा बनाए रखा और आसानी से फाइनल में पहुंच गए। जूडो में भी भारत का दम, तीन पदक तय जूडो प्रतियोगिता में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। पुरुष 60 किलोग्राम वर्ग के सेमीफाइनल में हर्ष सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के पेड्रो कार्लोस एंटुन नेटो को हराकर फाइनल में जगह बनाई। महिला 48 किलोग्राम वर्ग में अस्मिता डे ने स्कॉटलैंड की समर शॉ को गोल्डन स्कोर में मात देकर फाइनल में प्रवेश किया। वहीं महिला 57 किलोग्राम वर्ग में यामिनी मौर्या ने भी फाइनल में पहुंचकर भारत के लिए एक और पदक सुनिश्चित कर दिया। भारत के खाते में अब तक 17 पदक आठवें दिन के मुकाबलों तक भारत ने कुल 17 पदक अपने नाम कर लिए हैं। इनमें 3 स्वर्ण, 9 रजत और 5 कांस्य पदक शामिल हैं। कई भारतीय खिलाड़ी अभी भी विभिन्न स्पर्धाओं में पदक की दौड़ में बने हुए हैं। नीरज चोपड़ा की निगाहें स्वर्ण पदक पर देर रात होने वाले पुरुष भाला फेंक (जेवलिन थ्रो) फाइनल में भारत की सबसे बड़ी उम्मीद नीरज चोपड़ा होंगे। उनके साथ भारत के रोहित यादव और यशवीर सिंह भी पदक के लिए चुनौती पेश करेंगे। फाइनल में नीरज का मुकाबला पाकिस्तान के ओलंपिक चैंपियन अरशद नदीम और श्रीलंका के रुमेश पाथिराजे से होगा। क्वालिफिकेशन राउंड में रुमेश 82.84 मीटर के साथ पहले स्थान पर रहे, जबकि नीरज 79.61 मीटर के साथ पांचवें स्थान पर रहे थे। नीरज बनाम अरशद की दिलचस्प टक्कर नीरज चोपड़ा और अरशद नदीम वर्ष 2016 से अब तक 11 अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में आमने-सामने आ चुके हैं। इनमें 10 बार नीरज विजेता रहे हैं, जबकि अरशद को केवल एक जीत पेरिस ओलंपिक 2024 में मिली थी, जहां उन्होंने 92.97 मीटर के ओलंपिक रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता था। नीरज 90 मीटर की दूरी पार करने वाले भारत के पहले और एकमात्र भाला फेंक खिलाड़ी हैं। उन्होंने 2025 दोहा डायमंड लीग में 90.23 मीटर का राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था। उनके नाम टोक्यो ओलंपिक 2020, विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2023 और एशियाई खेल 2023 का स्वर्ण तथा पेरिस ओलंपिक 2024 का रजत पदक भी दर्ज है। लॉन बॉल्स में लगातार चौथी जीत लॉन बॉल्स की पुरुष पेयर्स स्पर्धा में दिनेश कुमार और नवनीत सिंह की भारतीय जोड़ी ने फॉकलैंड आइलैंड्स को 2-0 से हराकर लगातार चौथी जीत दर्ज की। इस जीत के साथ भारतीय टीम सेमीफाइनल की दौड़ में मजबूत स्थिति में पहुंच गई है। बॉक्सिंग में अभी और पदकों की उम्मीद भारतीय मुक्केबाजी दल के कुल 10 खिलाड़ी सेमीफाइनल में पहुंचे हैं। इनमें से पांच फाइनल में पहुंच चुके हैं, जबकि साक्षी चौधरी, प्रिया घंघास, लवलीना बोरगोहेन, सचिन सिवाच और नरेंद्र बरवाल अपने-अपने सेमीफाइनल मुकाबले खेलेंगे। विशेष रूप से टोक्यो ओलंपिक कांस्य पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन से भी स्वर्ण पदक की उम्मीदें जुड़ी हैं। आज 22 स्वर्ण पदकों का फैसला कॉमनवेल्थ गेम्स के आठवें दिन कुल 22 स्वर्ण पदक दांव पर हैं। इनमें एथलेटिक्स और पैरा एथलेटिक्स के 10, ट्रैक साइक्लिंग एवं पैरा ट्रैक साइक्लिंग के 7 तथा जूडो के 5 स्वर्ण पदक मुकाबले शामिल हैं। भारत की नजरें इन स्पर्धाओं में पदकों की संख्या बढ़ाने पर टिकी हैं। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation एंथ्रोपिक के “मिथोस” ने बढ़ाई वैश्विक बेचैनी : क्या कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब मानव नियंत्रण, लोकतंत्र और डिजिटल सुरक्षा के लिए बन रही है सबसे बड़ा चुनौतीपूर्ण खतरा?