‘जड़ें और लचीलापन : वैश्विक कल्याण के लिए भारत’ विषय पर बैंकॉक में कार्यक्रम, मेवाड़ को बताया भारत की जड़ों और लचीलेपन का सार्थक उदाहरण बैंकॉक। भारत की प्राचीन विरासत, सांस्कृतिक जड़ों और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालने की क्षमता को समझने के लिए मेवाड़ भारत के इतिहास का एक अत्यंत सार्थक उदाहरण है। भारत की जड़ें जितनी गहरी हैं, उसका लचीलापन भी उतना ही समृद्ध है। यह बात इतिहासकार डॉ. अजात शत्रु सिंह शिवरती ने बैंकॉक में आयोजित एक कार्यक्रम में कही। रेम्ब्रांट होटल, बैंकॉक में ‘जड़ें और लचीलापन : वैश्विक कल्याण के लिए भारत’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में डॉ. शिवरती ने भारत की ऐतिहासिक विरासत और वर्तमान वैश्विक भूमिका पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत का उदय किसी को डराने या चुनौती देने के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के कल्याण के लिए है। भारत अपनी प्राचीन विरासत को संजोते हुए आधुनिक विज्ञान और तकनीक के साथ आगे बढ़ रहा है और ऐसे विश्व के निर्माण में योगदान दे रहा है, जो सुरक्षित, स्वस्थ और समृद्ध हो। उन्होंने कहा कि जब हम भारत की ‘जड़ों और लचीलेपन’ को समझने का प्रयास करते हैं, तो मेवाड़ का इतिहास इस अवधारणा को बेहद प्रभावी ढंग से सामने रखता है। मेवाड़ ने लंबे संघर्ष और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपनी सांस्कृतिक पहचान, परंपराओं और मूल्यों को बनाए रखा। परिस्थितियों के अनुसार रणनीति और संसाधनों में बदलाव करते हुए अपनी मूल पहचान से जुड़े रहना भारत के व्यापक सांस्कृतिक चरित्र और उसके लचीलेपन को समझने का महत्वपूर्ण उदाहरण है। डॉ. शिवरती ने कहा कि भारत की शक्ति केवल उसकी प्राचीन परंपराओं में नहीं, बल्कि उन परंपराओं को समय के साथ नए संदर्भों में अपनाने की क्षमता में भी निहित है। आज आधुनिक विज्ञान, तकनीक और नवाचार के साथ भारत अपनी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को जोड़कर वैश्विक स्तर पर नए अवसरों का निर्माण कर रहा है। इसका अंतिम उद्देश्य मानव कल्याण और विश्व को अधिक सुरक्षित, स्वस्थ तथा समृद्ध बनाने में योगदान देना है। चुनौतियों के दौर में भारत की भूमिका इस अवसर पर बैंकॉक में भारत के राजदूत पुनीत अग्रवाल ने कहा कि आज दुनिया जलवायु परिवर्तन, मानसिक तनाव और युद्ध जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही है। ऐसे समय में भारत एक मार्गदर्शक के रूप में सामने आ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत के अनुभव, ज्ञान और दृष्टिकोण से वैश्विक समुदाय को इन चुनौतियों से निपटने के लिए नई दिशा मिल सकती है। कार्यक्रम में भारत की सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक अनुभव, आधुनिक विकास और वैश्विक कल्याण में भारत की भूमिका को लेकर विचार-विमर्श हुआ। वक्ताओं ने भारत की प्राचीन जड़ों और वर्तमान समय की जरूरतों के बीच समन्वय पर भी चर्चा की। कार्यक्रम में थाईलैंड के कई शिक्षाविदों, उद्योग जगत से जुड़े प्रमुख व्यक्तियों और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। भारत और थाईलैंड के बीच सांस्कृतिक एवं बौद्धिक संवाद को आगे बढ़ाने के दृष्टिकोण से भी कार्यक्रम को महत्वपूर्ण माना गया। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों का जलवा, पांच मुक्केबाज फाइनल में; जूडो में भी पदक पक्के