24 News Update उदयपुर 24 जुलाई। सर्वऋतु विलास स्थित महावीर दिगम्बर जैन मंदिर में राष्ट्रसंत आचार्यश्री पुलक सागर महाराज ससंघ का चातुर्मास भव्यता के साथ संपादित हो रहा है। गुरुवार को टाउन हॉल नगर निगम प्रांगण में 27 दिवसीय ज्ञान गंगा महोत्सव के पांचवें दिन नगर निगम प्रांगण में विशेष प्रवचन हुए।चातुर्मास समिति के अध्यक्ष विनोद फान्दोत ने बताया कि गुरुवार को कार्यक्रम में कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री बाबूलाल खराड़ी, महामंत्री राजस्थान कांग्रेस कमेटी लाल सिंह झाला, किकाभाई गज मंदिर ऋषभदेव अध्यक्ष गजेन्द्र भंसाली, यूसीसीआई अध्यक्ष मनीष गलुण्डिया, ओसवाल बड़े साजन समाज अध्यक्ष आलोक पगारिया, ओसवाल छोटे साजन अध्यक्ष प्रकाश कोठारी, समाजश्रेष्ठी कुंथु कुमार गणपतोत, युवा उद्यमी नमन पचोरी, जैन सोशल ग्रुप के आर सी मेहता थे। पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट भंवरलाल जैन परिवार ने किया, मंगलाचरण कुंद कुंद पाठशाला, केशवनगर के विद्यार्थियों द्वारा किया गया । इस अवसर पर विशेष गुरु-वंदना, बच्चों ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया और अपनी कला के माध्यम से गुरु भक्ति को प्रस्तुत किया। मंच पर प्रस्तुत किए गए मंगलाचरण नृत्य एवं भजन में गुरु के जीवन, त्याग, तपस्या और मार्गदर्शन के प्रसंगों को इतनी भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत किया गया कि पूरा वातावरण भक्ति रस में डूब गया।चातुर्मास समिति के महामंत्री प्रकाश सिंघवी व प्रचार संयोजक विप्लव कुमार जैन ने बताया कि ज्ञान गंगा महोत्सव के पांचवें दिन आचार्य पुलक सागर महाराज ने कहा हरे कपड़ों से अमावस्या हरी नहीं होती, रिश्तों को हरा रखो, जीवन हरा भरा हो जाता है । कोई मंगल पर जीवन ढूंढ रहा है, कोई चांद पर जीवन ढूंढ रहा है, मैं पुलक सागर तुम्हारे जीवन में मंगल ढूंढना चाहता हूं । मकान बड़े हो गए, पैसा बहुत कमा लिया । आज घरों में अपने तो है लेकिन अपनापन कम नजर आता है । मकान तो सदियों तक खड़े रहेंगे, लेकिन घर में रहने वाले सदियों से पहले चले जाते है । रिश्तों को पकड़ कर रखो, इसको बिखरने मत दो, किसी भी परिवार में बंटवारा होता है, तो पैसे की जगह भावनाओं और रिश्तों का बंटवारा हो जाता है । जब दो भाई मकान की वजह से अलग हो तो कोई बात नहीं, लेकिन मन की वजह से अलग रहेंगे तो वह परिवार के लिए सही नहीं है । बड़े होकर ऐसे लड़ते हो की एक दूसरे से बात नहीं करते हो । मकान बनाना आसान है, लेकिन घर बसाना मुश्किल है । पैसे से मकान तो बना सकते हो, लेकिन रिश्ते नहीं खरीद सकते । कितना भी सुंदर मकान बनालो, लेकिन अंदर से मन सुंदर नहीं तो इस जीवन का कोई मतलब नहीं । जो परिवार संयुक्त रहते है, उन्हें किसी तीर्थ पर जाने की जरूरत नहीं, क्योंकि तीर्थ खुद स्वयं उस घर में हुआ करता है । रूठो मत, लड़ो मत, झगड़ों मत । अगर तुम्हारा भाई नहीं होगा तो तुम्हारे रिश्ते कैसे बनेंगे । रिश्तों की माला बिखरने ना पाए । माला कभी भी टूटती है और उसे वापस जोड़े तो वह माला छोटी हो जाती है । नारी यदि चाहे तो घर को जोड़ सकती है, और नारी यदि चाहे तो घर को तोड़ सकती है, तुम्हे घर वाली कहा जाता है । घर को जोडक़र रखना नारी का काम हुआ करता है । अफसोस है कि फेसबुक और इंस्टाग्राम पर हजारों लोगों से दोस्ती कर रखी है और घर में सगे भाई से इंसान नहीं बोल रहा है ।आचार्य ने भाईयों पर विशेष प्रवचन देते हुए कहा कि रावण की मृत्यु का क्षण आया, मृत्यु शय्या पर लेटा था, कुछ सांसे बची थी । श्रीराम ने लक्ष्मण से कहा कि जाओ रावण का अंतिम समय है, रावण अलौकिक ताकत है, ब्राह्मण है, सिद्ध पुरुष है, जाओ उससे कुछ जीवन की शिक्षा लेकर आओ । लक्ष्मण ने कहा नहीं भैया वो हमारा शत्रु है, तो राम ने कहा जब तक वह युद्ध के मैदान में था तब तक वह शत्रु था, अब तो वह मृत्यु शय्या पर है अब वह शत्रु नहीं मित्र है । लक्ष्मण गए और कहा है लंकेश भैया ने कहा कि आप मुझे जीवन के सूत्र प्रदान करे । लक्ष्मण ने कहा कि एक बात बता दो कि तुम्हारे पास बहुत सी शक्तियां थी, राम के पास कुछ नहीं, तो आज वह रावण धराशायी क्यों है । तो रावण ने कहा कि ना राम जीते और ना मैं हारा । कारण सिर्फ इतना था राम के पास लक्ष्मण जैसा भाई था, और मेरे पास विभीषण कैसा भाई था, तुम्हारे जैसा भाई किस्मत से प्राप्त हुआ करता है । भाईयों पर प्रवचन हो और राम लक्ष्मण और भरत बाहुबली का नाम नहीं आए, ऐसा हो नहीं सकता । राम के वनवास पर भाई भरत और लक्ष्मण द्वारा दिया गया एक भाई को प्रेम, आदर और सम्मान अनुकरणीय है । भारत की प्राचीन संस्कृति ऐसी अनमोल है, जिसे वापस जीवित करने की आवश्यकता है । राम ने भरत से कहा कि मैने तो पिता के लिए राज छोड़ा है, लेकिन तूने तो एक भाई के लिए अपना राज छोड़ दिया, तेरा त्याग मुझसे बड़ा है । दो भाई जब सिंहासन के लिए लड़ते है तो महाभारत हुआ करती है, और जब दो भाई सिंहासन छोड़ने की बात करते है तो रामायण की रचना हो जाया करती है । महाभारत का युद्ध इस देश के लिए कलंक था और रामायण की रचना इस देश की संस्कृति एवं प्रेम को प्रदर्शित करता है ।चातुर्मास समिति के पमर संरक्षक राजकुमार फत्तावत व मुख्य संयोजक पारस सिंघवी ने बताया कि इस अवसर पर विनोद फान्दोत, राजकुमार फत्तावत, शांतिलाल भोजन, आदिश खोडनिया, पारस सिंघवी, अशोक शाह, शांतिलाल मानोत, नीलकमल अजमेरा, शांतिलाल नागदा सहित उदयपुर, डूंगरपुर, सागवाड़ा, साबला, बांसवाड़ा, ऋषभदेव, खेरवाड़ा, पाणुन्द, कुण, खेरोदा, वल्लभनगर, रुंडेडा, धरियावद, भीण्डर, कानोड़, सहित कई जगहों से हजारों श्रावक-श्राविकाएं मौजूद रहे। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... 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