24 News Update दौसा। राजस्थान में नकली नोटों के बढ़ते नेटवर्क के खिलाफ चल रही कार्रवाई में दौसा पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। फर्जी करेंसी मामले की जांच के दौरान पुलिस ने नकली नोटों की डिजाइनिंग और एडिटिंग करने वाले कथित मुख्य आरोपी को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी नकली नोट तैयार करने की पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था और उसके जरिए राजस्थान सहित अन्य राज्यों में भी फर्जी नोटों की सप्लाई की जा रही थी।गिरफ्तार आरोपी की पहचान गुलशन (39) पुत्र प्रेमनाथ निवासी रोहिणी, दिल्ली के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार गुलशन नकली नोटों की डिजाइन तैयार करने, उनमें तकनीकी बदलाव करने और प्रिंटिंग के लिए फाइलें तैयार करने का काम करता था। जांच एजेंसियों का मानना है कि गिरोह के संचालन में उसकी भूमिका बेहद अहम थी। 40 हजार की नकली करेंसी से खुला पूरा नेटवर्क पूरे मामले का खुलासा 28 मई 2026 को हुआ, जब कोतवाली थाना पुलिस ने फेक करेंसी से जुड़े एक प्रकरण में कार्रवाई करते हुए आयुष कुमार मीणा को गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से 40 हजार रुपए की नकली करेंसी बरामद हुई थी। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया। इसके बाद एक किशोर को निरुद्ध किया गया, जिसके कब्जे से 47 हजार रुपए के नकली नोट बरामद हुए। लगातार सामने आ रहे सुरागों ने पुलिस को यह संकेत दे दिया था कि मामला किसी संगठित गिरोह से जुड़ा हो सकता है। फरीदाबाद से पकड़ा गया गिरोह का सरगना एसपी पीयूष दीक्षित के निर्देशन में गठित टीम ने तकनीकी और मानव खुफिया सूचनाओं के आधार पर जांच आगे बढ़ाई। इसी दौरान पुलिस फरीदाबाद तक पहुंची और वहां से नकली नोट छापने तथा उन्हें बाजार में खपाने वाले कथित सरगना संतोष सिंह वाल्मीकि और उसके सहयोगी विशाल उपाध्याय को गिरफ्तार किया। दोनों आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने 24 लाख 37 हजार रुपए मूल्य की नकली भारतीय मुद्रा, बड़ी मात्रा में विशेष कागज, प्रिंटिंग सामग्री, स्याही, वाटरमार्क डाई, लैपटॉप, हाई-रेजोल्यूशन प्रिंटर और अन्य तकनीकी उपकरण बरामद किए। बरामद सामग्री से संकेत मिला कि गिरोह संगठित तरीके से नकली नोट तैयार कर विभिन्न राज्यों में सप्लाई कर रहा था। गुलशन करता था नोटों की डिजाइनिंग और एडिटिंग फरीदाबाद से गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान पुलिस को गुलशन के बारे में अहम जानकारी मिली। जांच में सामने आया कि नकली नोटों को असली जैसा दिखाने के लिए डिजाइनिंग और डिजिटल एडिटिंग का काम वही करता था। पुलिस सूत्रों के अनुसार गुलशन कंप्यूटर आधारित तकनीक का उपयोग कर नोटों की डिजिटल फाइलें तैयार करता था, जिन्हें बाद में प्रिंटिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता था। इसी सूचना के आधार पर पुलिस ने दिल्ली के रोहिणी क्षेत्र में दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया। राजस्थान तक सप्लाई का खुलासा पूछताछ में यह भी सामने आया है कि गिरोह द्वारा तैयार किए गए नकली नोट राजस्थान में भी सप्लाई किए जा रहे थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि राज्य के किन-किन जिलों तक यह नेटवर्क पहुंचा हुआ था और कितने लोग इसके संपर्क में थे। जांच एजेंसियां यह भी खंगाल रही हैं कि नकली नोटों को बाजार में खपाने के लिए किन माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा था और क्या गिरोह के तार अन्य राज्यों से भी जुड़े हुए हैं। रिमांड में हो सकती है और गिरफ्तारियां पुलिस के अनुसार गुलशन और विशाल उपाध्याय दोनों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ में नकली नोटों के निर्माण, वितरण और सप्लाई चेन से जुड़े कई और लोगों के नाम सामने आ सकते हैं। एसपी पीयूष दीक्षित के निर्देशन में पुलिस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हुई है। जांच का फोकस अब उन लोगों पर भी है जो नकली नोटों को बाजार में चलाने, खरीदने या सप्लाई करने में भूमिका निभा रहे थे। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation ‘हमारा राजस्थान’ के लेखक से पीएम ई-विद्या विशेषज्ञ तक: शिक्षा जगत में नई मिसाल बने प्रशांत चौधरी, होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड, शिक्षक प्रशिक्षण, शोध, मूल्यांकन और डिजिटल नवाचारों के माध्यम से बनाई राज्य स्तरीय पहचान सूदखोरी का साम्राज्य बेनकाब: पिता-पुत्र के ठिकानों से 32 तोला सोना, 47.5 किलो चांदी और दर्जनों वाहन बरामद; प्रतापगढ़ पुलिस की बड़ी कार्रवाई