24 News update नई दिल्ली/झज्जर। गुरुवार को दिल्ली, एनसीआर और आस-पास के राज्यों में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, भूकंप का केंद्र हरियाणा के झज्जर जिले में था और इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.4 मापी गई। हालांकि किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है। भूकंप के झटके दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद, बहादुरगढ़ और जींद के अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कई हिस्सों में भी करीब 10 सेकंड तक महसूस किए गए। झटकों के कारण कई स्थानों पर लोग घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए। बीते छह महीने में तीसरी बार भूकंप दिल्ली-एनसीआर में इस साल यह तीसरी बार है जब भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। इससे पहले 17 फरवरी और 19 अप्रैल को भी राजधानी में कंपन दर्ज किया गया था। 🔸 19 अप्रैल – अफगानिस्तान से आया झटका दोपहर 12:17 बजे अफगानिस्तान में 5.8 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसका असर दिल्ली-एनसीआर और जम्मू-कश्मीर तक महसूस किया गया। श्रीनगर में एक कार्यालय कर्मचारी ने बताया कि उसकी कुर्सी अचानक हिलने लगी, जिससे दहशत फैल गई थी। 🔸 17 फरवरी – केंद्र नई दिल्ली सुबह 5:36 बजे दिल्ली में 4.0 तीव्रता का भूकंप आया। इसका केंद्र नई दिल्ली था और गहराई केवल 5 किलोमीटर थी। ढाई घंटे बाद बिहार के सिवान में भी इसी तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। दिल्ली में झटकों के कारण लोग अचानक घरों से बाहर निकल आए थे, हालांकि कोई नुकसान नहीं हुआ। डर और दहशत का माहौल गुरुवार को आए झटके इतने तेज थे कि कई स्थानों पर पार्किंग में खड़ी कारें भी हिलती दिखीं। लोग घरों और बहुमंजिला इमारतों से बाहर निकल आए। कई इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया, हालांकि प्रशासन ने स्थिति सामान्य होने की पुष्टि की है। हर 2-3 साल में आते हैं झटके विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों में हर दो से तीन साल में हल्के भूकंप महसूस किए जाते हैं। 2015 में भी झज्जर में 3.3 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसके साथ तेज आवाज सुनाई दी थी। आखिर क्यों आता है भूकंप? धरती की ऊपरी सतह सात बड़ी और कई छोटी टेक्टोनिक प्लेटों से बनी होती है। ये प्लेटें लगातार गतिशील रहती हैं और कभी-कभी आपस में टकरा जाती हैं। इस टकराव से जब अत्यधिक दबाव बनता है तो प्लेटें टूटने लगती हैं और अचानक निकलने वाली ऊर्जा से धरती हिलती है – जिसे हम भूकंप के रूप में महसूस करते हैं। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation 9 जुलाई 2025 — इतिहास का सबसे छोटा दिन! 1.51 मिली सेकेंड पहले खत्म होगा दिन Live….उदयपुर फाइल्स पर कोर्ट में ऐसे चली गर्मागर्म बहस, इन तर्कों और तथ्यों के कारण लग गई रिलीज पर रोक…..सिब्बल बोले-यह कला नहीं, सिनेमाई बर्बरता