24 News Update भीलवाड़ा। सेना में कमांडो रह चुका एक शख्स दस साल तक पुलिस की आंखों में धूल झोंकता रहा, लेकिन आखिरकार प्रतापनगर थाना पुलिस ने उसे इंदौर में उसकी ससुराल से गिरफ्तार कर लिया। 15 हजार रुपए के इनामी और वर्ष 2016 के चर्चित बैंक कैश लूट प्रयास मामले के फरार आरोपी अशोक कुमार चौहान को पुलिस ने उस समय दबोचा, जब वह गिरफ्तारी से बचने के लिए पहचान छिपाकर रह रहा था।

पुलिस के अनुसार आरोपी कभी आलीशान मकान और लग्जरी वाहनों का मालिक था, लेकिन कानून के शिकंजे से बचने के लिए वह अलग-अलग ठिकानों पर भटकता रहा। आखिरकार इंदौर में एक कच्ची झोपड़ी में छिपे होने की सूचना पर पुलिस टीम ने दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया।

24 लाख की नकदी पर थी बदमाशों की नजर

मामला 18 फरवरी 2016 का है। इंडसइंड बैंक की गांधीनगर शाखा से कैशियर रविराज सिंह और सुरक्षा गार्ड रामलाल 24 लाख 33 हजार 800 रुपए की नकदी लेकर मुख्य शाखा की ओर जा रहे थे। दोनों शाखाओं के बीच दूरी कम होने के कारण कर्मचारी पैदल ही रकम लेकर निकले थे।
रास्ते में पहले से घात लगाए बैठे बदमाशों ने कैश बैग छीनने की कोशिश की। विरोध करने पर संघर्ष शुरू हो गया। इसी दौरान एक आरोपी के चेहरे पर बंधा कपड़ा हट गया और हाथ में मौजूद पिस्तौल से गोली चल गई। गोली सुरक्षा गार्ड रामलाल की पीठ में लगी, लेकिन घायल होने के बावजूद उसने कैश बैग नहीं छोड़ा। वारदात विफल होते देख आरोपी अपने एक अन्य साथी के साथ बाइक पर फरार हो गए।

तीन गिरफ्तार हुए, लेकिन कमांडो बना रहा चुनौती

घटना के बाद पुलिस ने जांच करते हुए ललित कुमार सैन, कुलदीप सिंह उर्फ कल्लू चौहान और संगीता भदौरिया को गिरफ्तार कर लिया था। हालांकि साजिश में शामिल अशोक कुमार चौहान लगातार फरार रहा। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर 15 हजार रुपए का इनाम भी घोषित कर रखा था।

यूनिवर्सिटी की नौकरी से अपराध की दुनिया तक

जांच में सामने आया कि सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद अशोक कुमार चौहान मेवाड़ यूनिवर्सिटी में सुरक्षा प्रभारी के पद पर कार्यरत था। वहीं उसकी पहचान कुलदीप चौहान और ललित सैन से हुई। पुलिस के अनुसार तीनों ने मिलकर बैंक कर्मचारियों की गतिविधियों पर नजर रखी और नकदी लूटने की योजना बनाई। पैसों के लालच में पूर्व कमांडो भी इस आपराधिक साजिश का हिस्सा बन गया।

चचेरी बहन बनी पुलिस की कड़ी

आरोपी तक पहुंचने के लिए पुलिस ने पुराने मोबाइल नंबरों, रिश्तेदारों और परिचितों की गतिविधियों का विश्लेषण किया। इसी दौरान उसकी चचेरी बहन से अहम सुराग मिले, जो पहले इसी मामले में गिरफ्तार हो चुकी थी। संपर्कों की निगरानी के दौरान पुलिस को आरोपी के इंदौर में छिपे होने की जानकारी मिली। मार्च में भी पुलिस ने उसे पकड़ने का प्रयास किया था, लेकिन वह हाथ नहीं आया। हाल ही में जब पुलिस टीम एक अन्य कार्रवाई से लौट रही थी, तब मिली नई लोकेशन के आधार पर इंदौर में दबिश दी गई और आरोपी को ससुराल में सोते हुए गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस बोली- लंबे समय से थी तलाश

एसपी सागर राणा ने बताया कि आरोपी पिछले एक दशक से फरार चल रहा था और लगातार अपनी पहचान तथा ठिकाने बदल रहा था। प्रतापनगर थानाधिकारी सुनील ताड़ा के नेतृत्व में गठित टीम ने तकनीकी विश्लेषण और मुखबिर तंत्र की मदद से उसे गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की।
करीब दस साल पुराने इस बहुचर्चित मामले में फरार मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी को पुलिस बड़ी सफलता मान रही है।


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By desk 24newsupdate

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