24 News Update उदयपुर। उदयपुर के नगर निगम के चुनाव में चुनाव आयोग की मनमानी देखने को मिली है। आज वोटिंग के दिन जब लोग सपरिवार वोट डालने घरों से खुशी—खुशी मतदान केंद्र पहुंचे तो पता पड़ा कि चुनाव आयोग उनके चुनावी सौभाग्य में शनिचर बनके बैठा है और आयोग ने चुन—चुन कर बदला लिया है। आज उदयपुर में मतदान केंद्रों पर अजीब स्थिति बन गई। परिसीमन के बाद जब उदयपुर के 80 वार्डों में बांट दिया गया तो उस पर चुनाव आयोग ने भी अपना मकड़जाल फैला दिया और एसआईआर के नाम पर लोगों से 2002 की वोटर लिस्ट में नाम मांग लिया। लोगों ने भी भरपूर प्रयास करके नाम ढूंढ कर दे दिए, फार्म भर दिए और आश्वस्त हो गए कि अब कोई झंझट नहीं रहेगा, निष्पक्षता से चुनाव होंगे। लेकिन तूं डाल—डाल मैं पात—पात वाली कहावत आज फिर चुनाव आयोग ने चरितार्थ कर दी और यह साबित कर दिया कि वह अपनी करतूतों और घोंचेबाजियों से बाज नहीं आने वाला है।उदयपुर में आज कई वार्डों में वोट डालने गए वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से गायब मिले। हद तो तब हो गई कि लिस्ट में परिवार के कुछ लोगों का तो नाम है मगर बाकी लोगों के नाम डिलीट कर दिए गए। जब इस बारे में बीएलओ से पूछा गया तो वे भी चकित रह गए। उन्होंने कहा कि एसआईआर के दौरान फार्म जमा करवाने से पहले हमने चुनाव आयोग को एक लिस्ट भेज दी थी। उसके बाद कई फार्म प्राप्त हुए व नाम जोड़ने व हटाने की अंतिम प्रक्रिया पूरी की गई। मगर चुनाव आयोग ने मनमानी करते हुए कई लोगों के नाम मन मर्जी से उड़ा दिए। ये किस आधार पर हुआ, किसी को नहीं पता। भाई साहब, पत्नी और भाभी का नाम, पति का नाम गायबआज वार्ड संख्या 36 में सुबह वोट डालने गए एक परिवार के साथ भी ऐसा ही हुआ। वोटर पर्ची बनाने के बाद पता चला कि परिवार में भाई साहब का नाम है, पत्नी और भाभीजी का भी मगर जो पूरे परिवार को कार ड्राइव करके बूथ तक लेकर गया, उन पतिदेव का नाम ही गायब हो गया। बूथ पर हास्यास्पद स्थिति बन गई। जब पतिदेव ने बीएलओ को फोन लगाया तो उन्होंने साफ मना कर दिया कि उनकी ओर से कोई नाम नहीं काटा गया है। ये आगे से ही कटा है, उसमें मैं क्या कर सकती हूं। यह वाकया बूथ नंबर एक, महावीर विद्या मंदिर स्कूल सेक्टर 11 उदयपुर का है। वोटर आईडी कार्ड बनवाया मगर वोटर लिस्ट से ही नाम काट दियापतिदेव ने बताया कि उनका पैत्रक निवास सेक्टर 13 महाराणा प्रताप कॉलोनी में था व वे अभी गायरियावास में शिफ्ट हो गए हैं। बड़े भाई साहब भी सेक्टर—9 में शिफ्ट हो गए हैं। शिफ्टिंग के दौरान व बाद में उन्होंने बीएलओ को इसकी सूचना दी व जरूरी फार्म भी भरे। एसआईआर की प्रक्रिया भी पूरी की। बीएलओ ने आश्वस्त किया कि नाम एक जगह से कट कर दूसरी जगह जोड़ने से पहले भी आपको सूचित कर दिया जाएगा। मगर आज वोटिंग के दिन पता चला कि नाम केवल पतिदेव का कटा, बाकी सब का नाम मतदाता सूची में था। खास बात ये रही कि बीएलओ ने मौके पर ही बताया कि आप अकेले नहीं हो, जिनके साथ यह सब हुआ है। पूरे शहर में ऐसे कई मामले हैं जिनमें शिफ्टिंग करने वालों के नाम उड़ा दिए गए हैं। या तो पूरे परिवार के नाम गायब हैं, या फिर परिवार में से कुछ लोगों के। पतिदेव ने बताया कि वोटर आईडी कार्ड तक बीएलओ से कह कर बनवाया। वोटर आईडी कार्ड तो बन गया मगर पीछे से वोटर लिस्ट से ही नाम डिलीट कर दिया गया।एक व्यक्ति के साथ तो ये हुआ कि मां और बेटा वार्ड 33 में एक ही मकान में निवास करते हैं मगर मां का नाम वार्ड 33 में और बेटे का नाम वार्ड 36 की वोटर लिस्ट में डाल दिया गया। बड़े स्तर पर महाघपले की आशंकाइस मामले को देखते हुए यह साफ हो रहा है कि उदयपुर की वोटर लिस्ट में महाघपला हुआ है। उदयपुर के कई वार्डों में पिछली बार हार जीत का मार्जिन 50 से कम वोटों का था। ऐसे में अगर एक वार्ड से 50 नाम भी कटते हैं तो फिर फ्री एंड फेयर इलेक्शन का मतलब ही क्या रह जाता है। एक ही सूची से केवल पतिदेव का नाम गायब होना किसी बहुत बड़ी अनियमितता की ओर इशारा कर रहा है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर बीएलओ से उपर ऐसा कौन अफसर है जो मनमानी तरीके से चुन—चुन कर लोगों के नाम डिलीट कर रहा है। सबसे पहले उसे सजा दी जाए, उसके कंप्यूटर से डिलीट का बटन हटाया जाए। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation वोट डालने जाओ तो अंदर फोन जरूर ले जाओ, कोई रोके तो ये खबर दिखा दो, नियमों का उड़ रहा है खुल्ला मजाक, नेताओं के आगे प्रशासन नतमस्तक उदयपुर में 3 बजे बाद भी घर से नहीं निकले 47.87% मतदाता, राजस्थान में साढ़े 85% तक पहुंची वोटिंग