24 News Update सलूंबर। विकास कार्यों के नाम पर सरकारी योजनाओं से स्वीकृत परियोजनाओं की जमीनी हकीकत कई बार कागजों से बिल्कुल अलग नजर आती है। जयसमंद पंचायत समिति क्षेत्र की नेवा तलाई पंचायत में डीएमएफटी से स्वीकृत सड़क निर्माण इसका ताजा उदाहरण है। वर्ष 2024 में स्वीकृत हुई इस सड़क का काम निर्धारित अवधि में पूरा होना था, लेकिन सितंबर 2026 तक भी सड़क ग्रामीणों को डामर की सुविधा नहीं दे पाई है। मौके पर सड़क के नाम पर बड़ी मात्रा में गिट्टी बिछी हुई है और निर्माण अधूरा पड़ा है। 7 सितंबर 2024 को शुरू हुआ था कामनेवा तलाई पंचायत के बेड़ा दरा क्षेत्र में सड़क निर्माण के लिए डीएमएफटी के तहत काम स्वीकृत किया गया था। पीडब्ल्यूडी ने टेंडर प्रक्रिया पूरी करने के बाद निर्माण कार्य शुरू करवाया। वर्क ऑर्डर के अनुसार सड़क का काम 7 सितंबर 2024 से शुरू होकर 8 दिसंबर 2024 तक पूरा होना था।निर्धारित समयसीमा खत्म हुए लंबा समय बीत चुका है, लेकिन सड़क आज भी पूरी नहीं हो सकी। सवाल यह है कि जिस काम को करीब 3 महीने में पूरा होना था, वह लगभग 2 साल बाद भी अधूरा क्यों है? सड़क पर डामर नहीं, गिट्टी से बढ़ी परेशानीमौके के हालात ग्रामीणों की परेशानी बयां कर रहे हैं। सड़क पर बिछी गिट्टी के कारण दोपहिया वाहन चलाना मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि गिट्टी पर वाहन फिसलने का खतरा लगातार बना रहता है और कई बार हादसे भी हो चुके हैं। ग्रामीण वीडियो में हाथ में गिट्टी उठाकर सड़क की स्थिति दिखाते हुए अपनी परेशानी बता रहे हैं। उनका कहना है कि आम आवाजाही के साथ सबसे बड़ी परेशानी उस समय होती है जब किसी बीमार या घायल व्यक्ति को इस रास्ते से अस्पताल ले जाना पड़ता है। कलेक्टर और अधिकारियों से गुहार, फिर भी नहीं बनी सड़कग्रामीणों के मुताबिक सड़क निर्माण पूरा करवाने के लिए कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों के माध्यम से अधिकारियों से संपर्क किया गया। जिला कलेक्टर और पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को ज्ञापन भी दिए गए, लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं हुआ। सरपंच किशन लाल मीणा का आरोप है कि सड़क को लेकर अधिकारियों से लगातार संपर्क किया जा रहा है, लेकिन काम पूरा करवाने की दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। डीएमएफटी के काम की मॉनिटरिंग पर सवालनेवा तलाई पंचायत जावर माइंस से प्रभावित क्षेत्र में आती है। ऐसे क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट यानी डीएमएफटी की राशि का उपयोग किया जाता है। ऐसे में इस सड़क का अधूरा निर्माण केवल ग्रामीणों की परेशानी तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि सरकारी विकास कार्यों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। जब सड़क के लिए राशि स्वीकृत हुई, पीडब्ल्यूडी ने टेंडर किया, वर्क ऑर्डर जारी हुआ और काम भी शुरू हो गया, तो फिर तय समयसीमा में निर्माण पूरा क्यों नहीं हुआ? अब जवाब मांग रहे हैं ये सवालसड़क निर्माण की तय समयसीमा के बावजूद काम पूरा क्यों नहीं हुआ?करीब 2 साल की देरी के लिए कौन जिम्मेदार है?क्या पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने नियमित रूप से निर्माण कार्य की मॉनिटरिंग की? क्या अधिकारियों ने मौके पर जाकर सड़क की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण किया? निर्माण में देरी करने वाले ठेकेदार के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई? डीएमएफटी से स्वीकृत इस काम की गुणवत्ता और प्रगति की जांच किस स्तर पर हुई? सड़क अधूरी रहने के बावजूद अब तक जिम्मेदारी तय क्यों नहीं हुई? नेवा तलाई की यह सड़क फिलहाल ग्रामीणों के लिए सुविधा का रास्ता बनने के बजाय गिट्टी और परेशानी का रास्ता बनी हुई है। डीएमएफटी जैसी विकास निधि का उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं मजबूत करना है, ऐसे में ग्रामीणों का सवाल सीधा है—जब सड़क की स्वीकृति और टेंडर समय पर हो गया, तो सड़क आखिर अब तक पूरी क्यों नहीं हुई? Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation सलूंबर में 78.69 प्रतिशत मतदान, 62 प्रत्याशियों का भाग्य ईवीएम में बंद