24 News Update. उदयपुर, 18 सितंबर। महाराणा प्रताप की वीरता और दिवेर विजय की गाथा अब केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित नहीं है। दिवेर विजय महोत्सव-2026 के तहत शहर में नाटक, निबंध, रील मेकिंग और इतिहास से जुड़ी कार्यशालाओं के जरिए नई पीढ़ी को मेवाड़ के गौरवशाली अतीत से जोड़ने की पहल की जा रही है। महोत्सव के तहत शुक्रवार को बोहरा गणेशजी मंदिर से ‘दिवेर का रणघोष’ नुक्कड़ नाटक का मंचन हुआ, जबकि शनिवार से प्राचीन भारतीय लिपियों और फारसी भाषा की सात दिवसीय कार्यशालाएं शुरू होंगी।वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति के अंतर्गत प्रताप गौरव केन्द्र ‘राष्ट्रीय तीर्थ’ की ओर से आयोजित महोत्सव में शुक्रवार को नुक्कड़ नाटक के कलाकारों ने बोहरा गणेशजी के दर्शन के बाद तिराहे पर प्रस्तुति दी। यह नाटक का दूसरा सार्वजनिक मंचन था। मीरा गर्ल्स कॉलेज और विद्या भवन पॉलिटेक्निक कॉलेज के विद्यार्थियों ने महाराणा प्रताप के संघर्ष, शौर्य और स्वाभिमान पर आधारित संवादों के जरिए प्रस्तुति दी। युवा कलाकारों की प्रस्तुति के दौरान वीर रस से जुड़े संवादों ने लोगों का ध्यान खींचा। आयोजन के अगले चरण में शनिवार को पिछोला की पाल स्थित दूधतलाई पार्क में शाम 5 से 6 बजे के बीच नुक्कड़ नाटक का मंचन होगा। निबंध प्रतियोगिता में 750 प्रविष्टियांमहोत्सव की शैक्षणिक गतिविधियों में भी विद्यार्थियों और युवाओं की भागीदारी सामने आई है। प्रताप गौरव केन्द्र के निदेशक अनुराग सक्सेना के अनुसार निबंध प्रतियोगिता के लिए 17 सितंबर तक प्रविष्टियां आमंत्रित की गई थीं। विद्यालय श्रेणी में करीब 600 और महाविद्यालय श्रेणी में 150 प्रविष्टियां प्राप्त हुई हैं। आयोजकों के अनुसार राजस्थान के बाहर से भी प्रतिभागियों ने अपनी प्रविष्टियां भेजी हैं।महोत्सव के संयोजक रमन सूद के अनुसार शनिवार को रील मेकिंग प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इसके लिए सुबह 10 से 12 बजे तक रील्स वॉक रखी गई है। 19 और 20 सितंबर को प्रतिभागी सुबह 10 से 12 बजे तथा शाम 5 से 7 बजे के बीच अपनी रील की शूटिंग कर सकेंगे। प्रतियोगिता के लिए महाराणा प्रताप का शौर्य और स्वाभिमान, दिवेर विजय, चेतक और महाराणा प्रताप, प्रताप का संघर्ष और संकल्प, मेवाड़ की संस्कृति, मेवाड़ की धरती और वीरता, नई पीढ़ी और महाराणा प्रताप तथा ‘प्रताप के विचार और आज का युवा’ जैसे विषय तय किए गए हैं। ब्राह्मी से शारदा तक पढ़ेंगी प्राचीन लिपियांमहोत्सव का एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक पक्ष प्राचीन भारतीय लिपियों पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला होगी। 19 से 26 सितंबर तक प्रताप गौरव केन्द्र परिसर में होने वाली सात दिवसीय कार्यशाला में ब्राह्मी, खरोष्ठी सहित विभिन्न प्राचीन एवं विकसित भारतीय लिपियों को पढ़ने और समझने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह आयोजन साहित्य संस्थान, राजस्थान विद्यापीठ के सहयोग से होगा। कार्यशाला में अशोककालीन ब्राह्मी के साथ सातवाहन, कुषाण, इक्ष्वाकु, गुप्त और बॉक्स-हेडेड ब्राह्मी, सिद्धमात्रिका, प्रोटो-बंगाली तथा शारदा लिपियों का अध्ययन कराया जाएगा। प्रतिभागियों को अभिलेखों के छायाचित्र और ई-प्रतिलिपियों के जरिए अभ्यास कराया जाएगा। क्षेत्रीय भ्रमण के दौरान वास्तविक अभिलेखों के दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया से भी परिचित कराया जाएगा। पहली बार फारसी भाषा पर भी फोकसइस बार कार्यशाला में फारसी भाषा और लिपि का प्रशिक्षण भी शामिल किया गया है। आयोजकों के अनुसार भारतीय इतिहास, अभिलेखों और भाषाई स्रोतों के अध्ययन में फारसी के महत्व को देखते हुए इसे महोत्सव की शैक्षणिक गतिविधियों से जोड़ा गया है। फारसी कार्यशाला में डॉ. चन्द्रशेखर, डॉ. शम्सुल हुदा शेरवाली और डॉ. सोलत अली प्रशिक्षण देंगे। साहित्य संस्थान के निदेशक डॉ. कुलशेखर व्यास के अनुसार विभिन्न सत्रों में विशेषज्ञ प्रतिभागियों को प्राचीन लिपियों की पहचान, पठन और अभिलेखीय सामग्री के अध्ययन की जानकारी देंगे। कार्यशाला में डॉ. धर्मवीर शर्मा, डॉ. अभिजीत दांडेकर, डॉ. रवि शंकर, डॉ. सूरज राव और डॉ. राजेंद्र कुमार विशेषज्ञ के रूप में शामिल होंगे। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation हुनर को सलाम: विश्वकर्मा जयंती पर 50 कामगारों का सम्मान जयसमंद में मछुआरों को मिला योजनाओं और आधुनिक मत्स्य कारोबार का मंत्र, 62 सदस्यों ने लिया ‘एक्वा रीच’ में हिस्सा