नई दिल्ली, 18 सितंबर। अस्पताल में भर्ती मरीज के लिए इस्तेमाल होने वाले IV सेट, सिरिंज और कैथेटर जैसी चीजों की कीमतों को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हुआ है। महाराष्ट्र FDA के सर्वे में कुछ मेडिकल कंज्यूमेबल्स की खरीद कीमत और पैकेट पर छपी MRP के बीच कई गुना अंतर सामने आया है। सबसे चौंकाने वाला मामला 11.05 रुपए के IV इन्फ्यूजन सेट का है, जिस पर 325 रुपए MRP दर्ज थी। FDA के मुताबिक यह अंतर 2,841% तक बैठता है।महाराष्ट्र FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले मेडिकल सामान की कीमतों का सर्वे कराने के बाद यह मामला उठाया। सर्वे में 6.75 रुपए में खरीदी गई 10 ML सिरिंज पर 57.20 रुपए MRP और 29.41 रुपए के कैथेटर पर 310 रुपए MRP दर्ज मिली। दूसरे मेडिकल कंज्यूमेबल्स में भी खरीद कीमत और MRP के बीच बड़ा अंतर सामने आया। मरीज के पास कीमत जांचने का विकल्प नहींFDA का कहना है कि ये ऐसे उत्पाद हैं जिनकी जरूरत इलाज के दौरान पड़ती है और भर्ती मरीज आमतौर पर इनकी कीमत की तुलना करने या दूसरे विकल्प तलाशने की स्थिति में नहीं होता। ऐसे में सवाल सिर्फ MRP का नहीं, बल्कि मेडिकल सामान की खरीद कीमत से लेकर मरीज के बिल तक पूरी कीमत-श्रृंखला में पारदर्शिता का है।मुंढे ने केंद्र के संबंधित विभाग और NPPA के सामने इस मुद्दे को उठाते हुए मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों की समीक्षा और खरीद कीमत तथा घोषित MRP के बीच अंतर को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देशों की जरूरत बताई है। रिपोर्टों के मुताबिक केंद्र ने इस मामले में NPPA से रिपोर्ट भी मांगी है। दवाओं जैसा नहीं है मेडिकल डिवाइस का पूरा प्राइस कंट्रोलमौजूदा व्यवस्था में दवाओं पर DPCO के तहत कीमत नियंत्रण का ढांचा है, लेकिन अधिकांश मेडिकल डिवाइस और कंज्यूमेबल्स उसी तरह के प्रत्यक्ष मूल्य नियंत्रण के दायरे में नहीं आते। इसी वजह से अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली कई वस्तुओं की कीमतों को लेकर अलग नियामक व्यवस्था की मांग उठ रही है।FDA की पहल के बाद मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री ने भी कीमतों में पारदर्शिता की जरूरत का समर्थन किया है। हालांकि उद्योग की ओर से यह भी कहा गया है कि किसी भी नए नियम में निर्माताओं, अस्पतालों, सप्लाई चेन और मरीजों—सभी के हितों को ध्यान में रखना होगा। अब सवाल—MRP और असली लागत के बीच इतना अंतर क्यों?महाराष्ट्र FDA के सर्वे ने अस्पताल के बिल में शामिल उन छोटे-छोटे मेडिकल सामानों पर ध्यान खींचा है, जिनकी कीमत मरीज अक्सर अलग से जांच नहीं कर पाता। 11 रुपए के आसपास खरीदा गया IV सेट 325 रुपए MRP पर कैसे पहुंचता है और इस अंतर में किस स्तर पर कितना मार्जिन जुड़ता है, यही अब नियामकों के सामने मुख्य सवाल है। केंद्र की ओर से NPPA से रिपोर्ट मांगे जाने के बाद इस पूरे प्राइसिंग सिस्टम की समीक्षा की संभावना बढ़ गई है। अंतिम नियम या मूल्य सीमा को लेकर फैसला संबंधित केंद्रीय प्राधिकरण और हितधारकों की प्रक्रिया के बाद ही होगा। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation बंगाल में TMC के ममता गुट को फुटबॉल खिलाड़ी , दूसरे को लिफाफा