24 न्यूज अपडेट, नशेनल डेस्क। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में सोमवार को पहलगाम में हुए बर्बर हमले में जान गंवाने वाले पर्यटकों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का हृदय पीड़ा से भर आया। उन्होंने कहा, “एक मेजबान के नाते, मैं इन निर्दोषों की सुरक्षा का उत्तरदायित्व लेता हूं। उन पीड़ित परिवारों के समक्ष मैं किस प्रकार क्षमा याचना करूं, मेरे पास कोई शब्द नहीं हैं।” उमर अब्दुल्ला ने आगे कहा, “यद्यपि जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा का दायित्व निर्वाचित सरकार का नहीं है, फिर भी मुख्यमंत्री और पर्यटन मंत्री के रूप में, मैंने इन पर्यटकों को आमंत्रित किया था। उन्हें सुरक्षित भेजना मेरा कर्तव्य था, जिसमें मैं विफल रहा।”उन्होंने उस असहनीय पीड़ा का वर्णन किया, “उन बच्चों को मैं क्या जवाब देता, जिन्होंने अपने पिता को लहूलुहान अवस्था में देखा? उस नवविवाहित नौसेना अधिकारी की विधवा को मैं क्या कहूं? उन पर्यटकों के प्रश्न का क्या उत्तर दूं, जिन्होंने पहली बार कश्मीर में छुट्टियां मनाने का निर्णय लिया था, और जिन्हें इस निर्णय का जीवन भर पश्चाताप रहेगा?” उमर अब्दुल्ला ने कहा, “कुछ दिनों पहले, जब हम इस सदन में बजट और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा कर रहे थे, तो हमने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि हमें इस प्रकार के दुखद क्षणों का सामना करना पड़ेगा। सदन के माननीय अध्यक्ष, आपके आसपास वे लोग बैठे हैं, जिन्होंने अपने परिजनों को खोया है। हम सभी किसी न किसी रूप में इस हिंसा के शिकार हुए हैं। हम इस सदन से इस हमले की भर्त्सना करते हैं और 26 शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी सहानुभूति व्यक्त करते हैं।”उमर अब्दुल्ला ने आगे कहा, “माननीय अध्यक्ष, यह हमला केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। यह पहली बार नहीं है; हमने अमरनाथ यात्रा, डोडा के गांवों, कश्मीरी पंडितों और सिख बस्तियों पर भी हमले देखे हैं। 21 वर्षों के अंतराल के बाद, बैसरन में हुआ यह हमला निर्दोष नागरिकों पर सबसे बड़ा आक्रमण है। यह हमारे भविष्य की नहीं, बल्कि हमारे अतीत की कहानी है। अब यह प्रश्न उठता है कि अगला हमला कहां होगा। मेरे पास उन शोक संतप्त परिवारों से क्षमा मांगने के लिए शब्द नहीं हैं।”कश्मीरियत पर आघातविधानसभा द्वारा पारित प्रस्ताव में इस आतंकी हमले को ‘कश्मीरियत’, देश की एकता, शांति और सद्भावना पर सीधा प्रहार बताया गया। विधानसभा ने पीड़ितों और उनके परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और उनके दुःख में सहभागी होने का संकल्प लिया। विधानसभा ने इस कठिन समय में जम्मू-कश्मीर के लोगों द्वारा प्रदर्शित एकता, करुणा और साहस की सराहना की। प्रस्ताव में यह भी उल्लेख किया गया कि पूरे प्रदेश में शांतिपूर्ण प्रदर्शन हुए और नागरिकों ने पर्यटकों का समर्थन किया।कश्मीरी छात्रों की सुरक्षा का आह्वानविधानसभा ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से कश्मीरी छात्रों और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनके साथ किसी भी प्रकार के भेदभाव या उत्पीड़न को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया।पाकिस्तान के विरुद्ध कार्रवाई का समर्थनपहलगाम हमले पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का यह पहला सार्वजनिक वक्तव्य था। यह विशेष विधानसभा सत्र विशेष रूप से पहलगाम नरसंहार में मारे गए पर्यटकों को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित किया गया था। इससे पहले, उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने इस हमले के विरुद्ध निंदा प्रस्ताव प्रस्तुत किया था।सत्र की शुरुआत में, विधानसभा सदस्यों ने 26 मृतकों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखा। विधानसभा ने केंद्रीय कैबिनेट सुरक्षा समिति (CCS) द्वारा पाकिस्तान के विरुद्ध उठाए गए कदमों का भी समर्थन किया। पर्यटकों को बचाने के प्रयास में शहीद हुए टट्टू चालक सैयद आदिल हुसैन शाह को भी श्रद्धांजलि दी गई। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation देश की एकता ही आतंकवाद पर निर्णायक विजय का आधार : प्रधानमंत्री मोदी, मन की बात में पहलगाम हमले पर दुख और संकल्प प्रकट किया रतलाम में एक साथ उठीं 8 अर्थियां, बिलख पड़े परिजन: मंदसौर हादसे में 12 की मौत, उज्जैन-मंदसौर में भी अंतिम संस्कार