उदयपुर, 20 सितंबर। चुनाव हो गया। नतीजे आ गए। 80 पार्षद चुन लिए गए। अब 11 दिन की कठिन फाइव स्टार तपस्या के बाद
सोमवार को 80 पार्षद मिलकर तय करेंगे कि उदयपुर नगर निगम की अगली राजनीतिक कमान किसके हाथ होगी। मतदान होगा, मतगणना होगी और मेयर का नाम सामने आ जाएगा। जो पहले बहुतम के आधार पर आ चुका है। लेकिन इस पूरे चुनावी घटनाक्रम में एक तस्वीर ऐसी है, जो शायद नतीजे से ज्यादा चर्चा में रहेग और वह होगी बाड़ेबंदी से निकलते पार्षदों की ‘मुंह दिखाई’।
जनता ने जिन्हें पांच साल के लिए चुना, वे 11 दिन से रिसोर्ट रिसोर्ट भागते फिर रहे हैं। अज्ञातनवास में छिपते फिर रहे हैं। जिनको जनता के बीच होना चाहिए था वे होटल-रिसोर्ट की चारदीवारी में पंचतारा सुविधाओं का उपभोग करते दिखाई दे रहे हैं। यह राजनीतिक गिरावट की पराकष्ठा नहीं तो और क्या है। कारण बताया गया कि क्रॉस वोटिंग का डर होता है। एक-एक वोट की सुरक्षा और राजनीतिक रणनीति तय होती है। यानी चुनाव जीतने के बाद भी राजनीतिक दलों को अपने ही निर्वाचित पार्षदों जिनको उन्होंने टिकट दिया था उन पर भरोसा ही नहीं है। तो सवाल उठता है कि विश्वास नहीं था तो जनता का विश्वास जीतने क्यों भेज दिया?? जनता को जवाब कौन देगा कि उनका चुनाव हुआ प्रतिनिधि आखिर क्यों बाड़े का टट्टू बन गया???


खुद को गुप्त स्थान पर रखने के बाद गुप्त मतदान में जीते यही पार्षद गुप्त मतदान करेंगे। किसी को पता नहीं चलेगा कि किसने किसे वोट दिया। लेकिन जनता जरूर देखेगी कि बाड़े के भीतर से निकला जनप्रतिनिधि लोकतंत्र के खुले मैदान में याने कि उसकी सेवा में कब लौटता है। जमीन पर आते ही उसके पांव जमीन पर रहते भी हैं या नहीं।

उदयपुर नगर निगम के चुनाव की बात करें तो भाजपा के 53, कांग्रेस के 23, निर्दलीय 3 और माकपा का 1 पार्षद निर्वाचित हुआ है। बहुमत का आंकड़ा 41 है। संख्या बल का गणित साफ है। भाजपा की ओर से पारस सिंघवी और कांग्रेस की ओर से डॉ. पूनम कुंवर मेयर पद की दौड़ में हैं। भाजपा के पास संख्या बल ज्यादा है, इसके बावजूद पार्षदों की बाड़ेबंदी ने एक अलग राजनीतिक संदेश दिया है कि बहुमत हो सकता है, लेकिन भरोसा भी चाहिए। यहां डर के आगे जीत नहीं है, बल्कि जीत के आगे डर का साम्राज्य है।
यही वजह है कि होटल, रिसोर्ट, संपर्क, निगरानी, आवाजाही और क्रॉस वोटिंग जैसे शब्द पिछले कुछ दिनों में उदयपुर की स्थानीय राजनीति के सबसे चर्चित शब्द बन गए। राजनीतिक दल इसे रणनीति कह सकते हैं। समर्थक सावधानी कह सकते हैं। विरोधी इसे अविश्वास कह सकते हैं। लेकिन जनता के नजरिए से सवाल सीधा है कि अगर पार्षद स्वतंत्र होकर मतदान कर सकते हैं तो बाड़ा क्यों, और अगर नहीं कर सकते तो फिर चुनावी जनादेश की स्वतंत्रता कहां है?

असली सवाल—चुनावी वादों का क्या हुआ?
अब कहानी मेयर की कुर्सी की नहीं है। प्रचार के दौरान उदयपुर की जनता को पानी, सड़क, सफाई, झील, यातायात और शहरी सुविधाओं से जुड़े कई वादे सुनाए गए। कांग्रेस के स्थानीय संकल्प पत्र में हर वार्ड में समान दबाव के साथ स्वच्छ और नियमित पेयजल, झीलों में गंदे पानी की आवक रोकने के लिए आधुनिक एसटीपी, बेड़च नदी और उदयसागर की निगरानी के लिए टास्क फोर्स, हेल्थ क्लीनिक, ई-लाइब्रेरी, फ्री वाई-फाई, रिंग रोड और सैटेलाइट टाउन जैसे मुद्दे शामिल रहे। भाजपा के नगरीय विकास संकल्प पत्र में भी बेहतर पेयजल आपूर्ति सहित शहरी सुविधाओं को लेकर कई लक्ष्य रखे गए। चुनाव के समय वादों की फेहरिस्त लंबी थी। अब बोर्ड बनने के बाद जनता के पास हिसाब मांगने के लिए पांच साल होंगे। वो पंचतारा में आज ब्लू है पानी—पानी कर रहे थे और पीछे पानी पांतरे से तीन दिन में एक बार हो गया। चुनावी राजनीति में नियमित और बेहतर पेयजल की बात हुई थी। दूसरी तरफ उदयपुर शहर में जलापूर्ति का अंतराल बढ़कर 72 घंटे किए गए हैं। परिस्थितियां और खराब होने पर अंतराल 96 घंटे तक पहुंचने की आशंका भी सामने आई है। यानी चुनाव खत्म होते ही शहर के सामने सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल किसी पार्टी के झंडे का नहीं, नल का है। तीन दिन बाद आने वाला पानी किसी राजनीतिक भाषण का हिस्सा नहीं होता हैं वह सीधे घर की रसोई में पहुंचता है। टंकी खाली हो तो पार्टी का झंडा पानी नहीं भरता। वार्ड में सड़क टूटी हो तो पोस्टर उसे नहीं जोड़ता। नाली जाम हो तो चुनावी घोषणा-पत्र उसे साफ नहीं करता। यही वह जगह है जहां चुनावी राजनीति और जनता की रोजमर्रा की जिंदगी आमने-सामने खड़ी होती है। इसलिए कल मेयर चाहे कोई भी हो, अगली सुबह से शहर का असली एजेंडा शुरू होगा—पानी कितने घंटे में आएगा?

सोमवार का मतदान, मंगलवार से जवाबदेही

सोमवार सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक नगर निगम में अध्यक्ष पद के लिए मतदान होगा। मतदान के बाद मतगणना होगी और परिणाम सामने आ जाएगा। प्रशासन ने नगर निगम परिसर में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की है और अनधिकृत प्रवेश पर रोक रहेगी।

राजनीतिक दलमेयर पद का उम्मीदवारनिगम में निर्वाचित पार्षदबहुमत से स्थिति
भाजपापारस सिंघवी53बहुमत के 41 से 12 ज्यादा
कांग्रेसडॉ. पूनम कुंवर23बहुमत से 18 कम
निर्दलीय3निर्णायक भूमिका संभव
माकपा11 वोट
कुल80बहुमत का आंकड़ा 41

कल मेयर चुनाव का सीधा गणित

पदभाजपाकांग्रेस
मेयर उम्मीदवारपारस सिंघवीडॉ. पूनम कुंवर
पार्षद संख्या5323
बहुमत का आंकड़ा4141
अतिरिक्त/कम वोट का गणित+12-18

निकाय वार यह हैं प्रत्याशी
उदयपुर नगर निगम के लिए भाजपा की ओर से पारस सिंघवी एवं कांग्रेस से डॉ पूनम कुंवर अध्यक्षीय पद की दौड़ में हैं। नगरपालिका भीण्डर में भाजपा से मीना देवी तथा कांग्रेस से सुंदरलाल, नगरपालिका वल्लभनगर में कांग्रेस से रामी और भाजपा से सोवनी, नगरपालिका मावली में कांग्रेस से पुष्पा कुमारी, भाजपा से राकेश कुमार मीणा, नगरपालिका कानोड़ में कांग्रेस से रोनक स्वर्णकार व भाजपा से शिवकुमार सोनी तथा फतहनगर-सनवाड़ में भाजपा से सीमा तथा निर्दलीय ममता के बीच मुकाबला है।


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