कश्मीर, सेना और धार्मिक-सामाजिक मुद्दों से जुड़े पुराने बयानों का हवाला; आयोजकों से स्पष्टीकरण मांगने की मांग

उदयपुर, 20 सितंबर। 23 सितंबर को विद्या भवन ऑडिटोरियम में प्रस्तावित रमा मेहता स्मृति व्याख्यान में जेएनयू की सेवानिवृत्त प्रोफेसर निवेदिता मेनन को मुख्य वक्ता बनाए जाने को लेकर सर्वसमाज के कुछ संगठनों और प्रतिनिधियों ने आपत्ति जताई है। प्रेस वार्ता में प्रतिनिधियों ने मेनन के पुराने बयानों और हालिया सार्वजनिक टिप्पणियों का हवाला देते हुए कार्यक्रम निरस्त करने की मांग की। साथ ही आयोजकों और संबंधित संस्थाओं से यह स्पष्ट करने की मांग की गई कि कार्यक्रम के लिए वक्ता का चयन किन आधारों पर किया गया।

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए डॉ. परमवीर सिंह दुलावत ने आरोप लगाया कि निवेदिता मेनन के कई बयानों को लेकर पहले भी विवाद सामने आ चुके हैं। उनका कहना था कि ऐसे विषयों को उदयपुर जैसे सामाजिक एवं सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील शहर में मंच दिए जाने से पहले आयोजकों को उसके संभावित प्रभाव पर विचार करना चाहिए।

कश्मीर को लेकर 2016 का विवाद फिर चर्चा में

प्रतिनिधियों ने वर्ष 2016 में कश्मीर को लेकर निवेदिता मेनन के एक व्याख्यान का हवाला दिया। उस समय उनके कथित बयान को लेकर पुलिस शिकायत भी दर्ज हुई थी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उन पर कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा नहीं मानने संबंधी टिप्पणी करने का आरोप लगा था। मेनन ने उस समय आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि उनके वक्तव्य को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा किया गया और इसे अफवाहों पर आधारित बताया था।

इसी पुराने विवाद का हवाला देते हुए प्रेस वार्ता में कहा गया कि राष्ट्रीय महत्व के संवेदनशील मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से व्यक्त किए गए विचारों को देखते हुए उदयपुर कार्यक्रम को लेकर आयोजकों को अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए।

जोधपुर में सेना संबंधी टिप्पणी पर भी हुआ था विवाद

प्रेस वार्ता में वर्ष 2017 में जोधपुर स्थित जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय में हुए एक कार्यक्रम का भी उल्लेख किया गया। उस कार्यक्रम में निवेदिता मेनन के कश्मीर और भारतीय सैनिकों से संबंधित कथित बयानों को लेकर विवाद हुआ था। विश्वविद्यालय के तत्कालीन रजिस्ट्रार ने पुलिस शिकायत भी दर्ज कराई थी। रिपोर्टों में मेनन पर यह कहने का आरोप था कि सैनिक देश के लिए नहीं बल्कि आजीविका के लिए काम करते हैं। हालांकि मेनन ने इन आरोपों से इनकार किया था। विवाद के बाद कार्यक्रम की आयोजक शिक्षिका राजश्री रणावत के खिलाफ विश्वविद्यालय स्तर पर कार्रवाई भी हुई थी, जिसे बाद में राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।

हिंदू समाज पर टिप्पणी का भी उठाया मुद्दा

सर्वसमाज के प्रतिनिधियों ने मेनन के एक पुराने व्याख्यान में हिंदू समाज और जाति व्यवस्था को लेकर की गई टिप्पणी का भी उल्लेख किया। इस टिप्पणी की अलग-अलग मंचों पर आलोचना हुई थी। दूसरी ओर, मेनन ने 2016 में प्रकाशित अपने लेख में कहा था कि उनके वक्तव्य के वीडियो को संदर्भ से अलग करके पेश किया गया और उन्होंने मीडिया पर वीडियो के साथ छेड़छाड़ के आरोप भी लगाए थे।

हालिया पॉडकास्ट टिप्पणी को लेकर भी आपत्ति

प्रेस वार्ता में वर्ष 2026 के एक पॉडकास्ट में लव जिहाद की अवधारणा और हिंदू-मुस्लिम रिश्तों को लेकर हुई बातचीत का भी उल्लेख किया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार बातचीत में हिंदू लड़कियों के मुस्लिम पुरुषों की ओर आकर्षित होने के सवाल पर मेनन की टिप्पणी सामने आई थी। इस टिप्पणी की आलोचना कुछ संगठनों और ऑनलाइन मंचों पर हुई है।

सर्वसमाज प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि इस तरह के संवेदनशील धार्मिक-सामाजिक विषयों को जिस तरह सार्वजनिक बहस में रखा जा रहा है, उससे सामाजिक तनाव की स्थिति पैदा हो सकती है। हालांकि इस टिप्पणी की व्याख्या और उसके संदर्भ को लेकर अलग-अलग मत भी सामने आए हैं।

जौहर को लेकर भी उठाए सवाल

प्रेस वार्ता में मेवाड़ के इतिहास और रानी पद्मिनी से जुड़े जौहर प्रसंग का भी उल्लेख किया गया। प्रतिनिधियों ने अभिनेत्री स्वरा भास्कर की फिल्म ‘पद्मावत’ के जौहर दृश्य को लेकर की गई पूर्व टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा कि मेवाड़ की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक कार्यक्रमों में वक्ताओं और विषयों का चयन किया जाना चाहिए।

प्रतिनिधियों का कहना था कि रानी पद्मिनी मेवाड़ की ऐतिहासिक-सांस्कृतिक स्मृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और इस विषय पर किसी भी टिप्पणी को लेकर स्थानीय स्तर पर संवेदनशीलता बनी रहती है।

रमा मेहता ट्रस्ट और संबद्ध संस्थाओं से स्पष्टीकरण की मांग

डॉ. परमवीर सिंह दुलावत ने कहा कि कार्यक्रम रमा मेहता ट्रस्ट की ओर से आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों और उदयपुर की कुछ सामाजिक-शैक्षणिक संस्थाओं के बीच संस्थागत संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे में कार्यक्रम के आयोजन को लेकर जवाबदेही भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

उन्होंने सेवा मंदिर, विद्या भवन और रमा मेहता ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों से कार्यक्रम के उद्देश्य और वक्ता के चयन को लेकर स्पष्टीकरण देने की मांग की। साथ ही प्रशासन से भी कार्यक्रम के संबंध में आयोजकों से आवश्यक जानकारी लेने की मांग रखी।

कार्यक्रम रद्द करने की मांग, कानून-व्यवस्था पर भी जोर

सर्वसमाज के प्रतिनिधियों ने 23 सितंबर को प्रस्तावित कार्यक्रम को निरस्त करने की मांग की। उन्होंने कहा कि उनकी आपत्ति किसी व्यक्ति की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर नहीं, बल्कि उनके अनुसार पूर्व में विवादों में रहे बयानों और उदयपुर की सामाजिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम के आयोजन पर है।

प्रेस वार्ता में प्रतिनिधियों ने कहा कि विरोध शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से दर्ज कराया जाएगा। साथ ही प्रशासन से कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी स्थिति में शहर का सामाजिक माहौल प्रभावित नहीं होने देने की मांग की गई।

डॉ. परमवीर सिंह दुलावत ने कहा कि आयोजकों को कार्यक्रम और वक्ता के चयन को लेकर अपना पक्ष सार्वजनिक करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कार्यक्रम आयोजित होता है तो सर्वसमाज की ओर से आगे की रणनीति तय की जाएगी।


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