24 न्यूज अपडेट, उदयपुर। “हर व्यक्ति को शुद्ध जल मिले, और जल की हर जरूरत पूरी हो — यही है जल स्वावलंबन की सच्ची परिभाषा।” विद्या भवन पॉलिटेक्निक सभागार में शुक्रवार को आयोजित ऑस्ट्रेलिया अवार्ड फेलोशिप संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने यही संदेश दिया। संगोष्ठी में विशेषज्ञों, विभागीय अधिकारियों और सामाजिक संगठनों ने पारंपरिक जल परंपराओं, अंतरराष्ट्रीय अनुभवों और तकनीकों को साझा करते हुए जल स्वावलंबन के रोडमैप पर व्यापक चर्चा की। संगोष्ठी में व्यापक सहभागिता, विविध संस्थानों की उपस्थिति इस संगोष्ठी का आयोजन विद्या भवन सोसायटी, महाराणा प्रताप कृषि एवं तकनीकी विश्वविद्यालय, डेवलपमेंट सपोर्ट सेंटर, आईएफएसडी तथा संबंधित सरकारी विभागों — जलग्रहण क्षेत्र विकास विभाग, जलदाय विभाग, नगर निगम — की सक्रिय भागीदारी से किया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता अतिरिक्त मुख्य अभियंता प्रज्ञा सक्सेना ने की। ‘Catchment to Tap’ और ‘Catchment to Street’ मॉडल पर डॉ. अनिल मेहता के विचार संगोष्ठी के प्रमुख वक्ता डॉ. अनिल मेहता (प्राचार्य, विद्या भवन पॉलिटेक्निक) ने ऑस्ट्रेलिया अवार्ड फेलोशिप के अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि: ऑस्ट्रेलिया में Catchment to Tap मॉडल के तहत जल स्रोत (झील) से लेकर व्यक्ति के नल तक प्रत्येक बिंदु पर जल गुणवत्ता सुनिश्चित की जाती है। उन्होंने कहा कि “ऑस्ट्रेलिया में जल गुणवत्ता का इतना ध्यान रखा जाता है कि प्रधानमंत्री से लेकर फाइव स्टार होटल तक, सभी सरकारी नलों का पानी पीते हैं।” उन्होंने इस बात पर बल दिया कि उदयपुर में भी जल शुद्धिकरण तकनीक कमोबेश समान है, लेकिन वहाँ जैसी जल स्वीकृति और जनविश्वास नहीं बन पाया है। डॉ. मेहता ने यह भी सुझाव दिया कि शहरों को छोटे-छोटे वाटरशेड में विभाजित कर जल आधारित विकास योजनाएं बनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि Catchment to Street मॉडल के कारण जलभराव, बाढ़ जैसी समस्याएं नियंत्रित रहती हैं और जल निकास साफ रहता है, जिससे समुद्र और नदियों में जाने वाला पानी प्रदूषित नहीं होता। डॉ. मेहता, डॉ मनजीत सिंह तथा डॉ सुषमा जैन ने जोर देते हुए कहा कि “हमारी पारंपरिक जल परंपराएं ही आज विश्व की प्रेरणा बन रही हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश हम ही उन्हें भूलते जा रहे हैं।”उन्होंने संगठनों, संस्थानों और सरकार से जल संस्कृति को पुनर्जीवित करने के लिए साझा प्रयास करने का आह्वान किया। विभागों ने साझा किए प्रयास: जलदाय, जलग्रहण, नगर निगम की भूमिका नगर निगम के मुकेश पुजारी और अखिल गोयल ने बताया कि पेयजल स्रोतों में एयरेटर लगाकर जल गुणवत्ता सुधारने की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं। जलदाय विभाग के अखिलेश शर्मा ने विभाग की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि हर व्यक्ति तक शुद्ध जल पहुंचाना हमारा ध्येय है। जलग्रहण विभाग के एम.एस. अत्री और नरेंद्र सोनी ने ग्रामीण क्षेत्रों में कैचमेंट क्षेत्र विकास योजनाओं पर विस्तार से जानकारी दी। सामाजिक संगठनों की सराहनीय पहल संगोष्ठी में उपस्थित सामाजिक संस्थाओं —अर्पण सेवा संस्थान (लीलाधर पालीवाल), महान सेव संस्थान (अमन जैन), सृष्टि सेवा समिति (विष्णु यादव), गायत्री सेवा संस्थान (चेतन पांडे), रेनोवर्स फाउंडेशन (सुरेश जाट) — ने जल संरक्षण हेतु जन-जागरूकता के प्रयासों पर प्रकाश डाला।इन संगठनों ने बताया कि जल उपयोग में मितव्ययिता तथा सामाजिक व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए वे सतत कार्य कर रहे हैं। विशेष जानकारी और अध्यक्षीय संदेश मोहन शर्मा ने MARVI भूजल संवर्धन योजना की जानकारी साझा की।प्रज्ञा सक्सेना, अतिरिक्त मुख्य अभियंता ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि “आपसी समन्वय और सहभागी दृष्टिकोण ही जल स्वावलंबन का आधार हैं।”विद्या भवन प्रबंधन की ओर से हरीश माथुर और रेवतीरमण श्रीमाली ने भी विचार रखे।कार्यक्रम का आभार विद्या भवन के मानद सचिव गोपाल बंब ने व्यक्त किया। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation वंडर सीमेंट लि. में विष्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित पंडितजी के कहने पर सोनम की उल्टी तस्वीर लटकाई, चमत्कार की उम्मीद में पिता