उदयपुर। नीमचमाता मंदिर की सीढ़ियों पर बनी सीमेंट की रेलिंग टूट कर नीचे गिर गई, हादसे में कुछ युवाओं को चोट लगी। फोटो शूट करवा रहे 6 जने नीचे गिर गए। प्रत्यक्षदर्शियों बताया कि अधिकतर जगह पर रेलिंग जर्जर हो चुकी है जिसे तत्काल ठीक कराने की जरूरत है वरना बड़े हादसे की आशंका है। फतहसागर झील के देवाली छोर के पास पहाड़ी के ऊपर यह मंदिर है। इस मंदिर में जाने के लिए देवाली छोर के आगे नीचे पैदल चढ़ाई होती है। बताते है कि घटना के बाद यहां आकर ऊपर से मंदिर से जुड़े लोगों ने लकड़ियां बांधकर सुरक्षा की दृष्टि से प्रबंध किए ताकि कोई अनहोनी नहीं हो। मंदिर में दर्शन करने आते हुए बुधवार सुबह करीब साढ़े सात बजे के आस-पास सीढ़ियों के सहारे 6 युवाओं का एक ग्रुप खड़ा था। सभी रेलिंग के फ्रंट में खड़े रहकर मोबाइल में फोटो खींचवा रहे थे। तब एकाएक धड़ाम से गिरी रेलिंग के साथ वे गिर गए। युवकों के हाथ- पैर में चोट आई। प्रत्यक्षदर्शी संपत बोहरा ने बताया कि वे यहां आते रहते है। उन्होंने बताया कि रेलिंग इतनी जर्जर है कि सीमेंट के मुटाम गिरते ही रहते है। बोहरा ने बताया कि जर्जर रेलिंग को ठीक कराना चाहिए। घटना के बाद बोहरा स्वयं मंदिर में जाकर पुजारी और अन्य को बोलकर आए कि लोग गिर रहे है इसे ठीक कराया जाए। घटना के बाद आगे नीचे की तरफ एक और जगह से रेलिंग के मुटाम गिर गए थे, इसके पीछे मुख्य कारण जगह-जगह से रेलिंग के जर्जर होना ही बताया गया है। उदयपुर के नीमचमाता मंदिर की सीढ़ियों के साथ बनी सीमेंट की रेलिंग के मुटाम टूट कर गिर गए और दूसरी तस्वीर में बाद में सुरक्षा को लेकर लकड़ी लगाकर बांधा गया उदयपुर के नीमचमाता मंदिर की सीढ़ियों के साथ बनी सीमेंट की रेलिंग के मुटाम टूट कर गिर गए और दूसरी तस्वीर में बाद में सुरक्षा को लेकर लकड़ी लगाकर बांधा गया
सीढ़ियों से पैदल होती है 800 मीटर की चढ़ाई
नीमचमाता दर्शन के लिए देवाली से चढ़ाई शुरू होती है। करीब 800 मीटर के आस पास जो चढ़ाई का रास्ता है उसको सीढ़ियों के जरिए पार करना होता है। सीढ़ियों के दोनों तरफ रेलिंग है और उसके पीछे नीमचमाता का जंगल है। 26 जनवरी से यहां रोपवे भी शुरू हो गया है। टूरिस्ट और जो पैदल नहीं जा पाते है वे रोपवे से यात्रा करते है और मंदिर में दर्शन करने भी चले जाते है। नीमच माता के टॉप से फतहसागर झील, आसपास की वादियों से लेकर शहर का व्यू अच्छा दिखता है।
देवस्थान विभाग के केवल मंदिर, सीढ़िया वन विभाग के पास
नीमचमाता मंदिर देवस्थान विभाग के अधीन है। राजकीय प्रत्यक्ष प्रभार के इस मंदिर में बड़ी संख्या में भक्तों का आना-जाना रहता है। यहां सुबह के समय सबसे ज्यादा भीड़ होती है। वॉक के लिए भी यहां शहरवासी आते है और दर्शन भी कर लेते है। विभाग के सहायक आयुक्त जतिन गांधी ने दैनिक भास्कर को बताया कि मंदिर परिसर का रखरखाव देवस्थान देखता है और बाकी पूरा वन विभाग के पास है। रेलिंग भी वन विभाग के अधीन ही और रखरखाव भी उनके पास ही है। वैसे हमने भी इसके मेंटेनेंस के लिए लिख रखा है।
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