-पदाधिकारियों ने कहा-संस्था संविधान के विरुद्द जाकर करवाए जा रहे चुनाव-शुल्क कम करके कई सारे सदस्य बना दिए, जो गलत है24 News Update उदयपुर। उदयपुर विश्वकर्मा जांगिड विकास संस्था के पदाधिकारियों ने समाज के ही कतिपय लोगों द्वारा 17 अगस्त को करवाए जा रहे चुनाव को असंवैधानिक करार देते हुए इसे रुकवाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि संगठन का जो संविधान बना हुआ है उसके विरुद्द जाकर कार्य किया जा रहा है, जबकि मामला कोर्ट में विचाराधीन भी चल रहा है।संस्था के पूर्व सचिव बलवंत शर्मा, अध्यक्ष जगदीश जांगिड, पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र कुमार शर्मा, रतनलाल जांगिड, नारायण लाल शर्मा सहित अन्य सदस्यों ने यह आरोप लगाते हुए इस मामले में कार्रवाई की मांग की है।पदाधिकारियों ने कहा कि उदयपुर विश्वकर्मा जांगिड विकास संस्था पिछले 28 वर्षों से जांगिड़ समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उसकी सहभागिता सुनिश्चित करने के कार्य में सक्रिय रूप से लगी हुई है।यह संस्था, संस्था अधिनियम 1958 के अंतर्गत पंजीकृत है इसका अपना संविधान है। इस संविधान में 2012 और 2016 में अत्यावश्यक संशोधन अधिनियम 1958 की धारा 12 के अनुसार दो संशोधन आवश्यक प्रक्रिया द्वारा संपन्न किए गए हैं तथा इन दोनों ही संशोधनों में संस्था के उद्देश्यों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस संविधान के तहत हर तीसरे वर्ष चुनाव द्वारा कार्यकारिणी का गठन होता रहा है। कोरोना काल में संस्था के सदस्यों की संख्या 640 के लगभग थी तथा राज्य सरकार के प्रतिबंधों की वजह से 2020 में होने वाला चुनाव समय पर नहीं हो पाया क्योंकि वार्षिक साधारण सभा तथा चुनाव में इतनी संख्या में मीटिंग नहीं हो सकती थी।पदाधिकारियों के अनुसार वर्ष 2019-20 एवं 2020-21 के खातों की ऑडिट करना भी कार्यकारिणी का दायित्व था, उसमें भी लॉकडाउन के कारण काफी समय लगा। इस दौरान कुछ सदस्यों ने स्व-प्रेरित हित चिंतन जैसी कमेटी का गठन कर 19 सितंबर 2022 को चुनाव करवाने की घोषणा कर दी। कार्यकारिणी ने अपनी ऑडिट करवाने की पूर्ति करवा कर 4 सितंबर 2022 को संविधान सम्मत चुनाव करवाने की अधिसूचना जारी कर इसे समाचार पत्रों के प्रकाशित करवा दी। यही से विवाद का प्रारंभ हुआ तथा संस्था की ओर से न्यायालय के स्थगन आदेश के लिए वाद दायर किया गया। इसी बीच कोर्ट में हड़ताल की वजह से छुट्टियां थी जिससे वाद में विलंब हुआ। इसी बीच कथित तदर्थ समिति ने अपने चुनाव की 19 सितंबर 2020 के बजाय 28 अगस्त 2020 कर दी तथा 20 अगस्त 2020 को ही अपने आप को निर्विरोध घोषित कर दिया। इसके उपरांत तदर्थ समिति वालों ने संस्था भवन पर ताले लगा दिए तथा संस्था द्वारा न्यायालय में यह मामला पहुंचाने पर न्यायालय ने तथा जिला प्रशासन में कोर्ट कमिश्नर नियुक्त कर 4 सितंबर को चुनाव करवाने के आदेश दिए और चुनाव करवाए गए।हमारे संस्था अध्यक्ष द्वारा वाद दायर करने को इस तदर्थ समिति ने कोर्ट में विरोध किया जिसे कोर्ट ने नकार दिया। तत्पश्चात इसके लिए उन्होंने माननीय हाई कोर्ट में अपील की वहां भी रिजेक्ट कर दी गई। इसी बीच कथित तदर्थ समिति के सदस्यों द्वारा असवैधानिक रूप से ₹1100 लेकर सदस्यों की संख्या बढ़ा दी गई तथा अवैध रूप से 600 से अधिक सदस्य बना लिए।वर्तमान में दो वाद अपने बहस की स्थिति में आ चुके हैं तथा सेशन कोर्ट ने कहा कि आप दोनों की कार्यकारिणी का कार्यकाल समाप्ति पर है इसलिए आप आपस में समझाइश करके चुनाव करवाए। इस बाबत हमने कथित तदर्थ समिति के सदस्यों से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने इस सुझाव की अनदेखी कर असवैधानिक रूप से चुनाव की घोषणा कर दी जिसका मतदान 17 अगस्त 2025 को होना है।पदाधिकारियों ने कहा कि हमारा न्यायालय से इतना ही निवेदन है कि हमको संविधान के नियम अनुसार अक्षरशः पालन करते हुए चुनाव करवाने हैं। हमारे संविधान में किसी प्रकार की तदर्थ समिति द्वारा चुनाव करवाने का कोई प्रावधान नहीं है अतः इस असवैधानिक चुनाव को निरस्त किया जाए। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation गौसेवा के लिए ललित मेनारिया को मिला उत्कृष्ट सेवा सम्मान आईसीएआई भवन उदयपुर में 79 वाँ स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास से मनाया