1962 और 1971 की जंग में खांजीपीर के सपूतों ने निभाया था फर्ज-ए-वतन; प्रेसवार्ता में ताराचंद जैन से माफी, बयान वापसी और इस्तीफे की मांग उदयपुर। एक सियासी बयान ने खांजीपीर के बाशिंदों के दिलों में दबी पुरानी यादों को फिर कुरेद दिया है। उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन की ओर से आयड़ और खांजीपीर इलाके के लिए ‘मिनी पाकिस्तान’ अल्फाज इस्तेमाल किए जाने को लेकर इलाके में नाराजगी गहराती जा रही है। इसे लेकर खांजीपीर के सदर और गणमान्य लोगों ने प्रेसवार्ता कर अपना एतराज दर्ज कराया और कहा कि किसी पूरी बस्ती को इस तरह के अल्फाज से जोड़ना उसके वजूद, तारीख और जज्बात की तौहीन है। वक्ताओं ने कहा कि उनका मकसद किसी शख्स की मुखालफत करना नहीं, बल्कि उस बयान पर एतराज दर्ज कराना है जिसने इलाके के लोगों को गहरी तकलीफ पहुंचाई है। उन्होंने कहा कि ताराचंद जैन बुजुर्ग हैं, उनका एहतराम अपनी जगह है, लेकिन जनप्रतिनिधि की जुबान से निकले अल्फाज की जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है। ‘1962 और 1971 में हमारे जवानों ने दुश्मन के सामने मोर्चा लिया’ प्रेसवार्ता में खांजीपीर के फौजी इतिहास को सामने रखते हुए वक्ताओं ने कहा कि इस इलाके के लोगों का तअल्लुक सिर्फ अपनी बस्ती से नहीं, बल्कि मुल्क की हिफाजत की तारीख से भी रहा है। वक्ताओं के मुताबिक 1962 की जंग और 1971 के भारत-पाक युद्ध में खांजीपीर के जवान भारतीय फौज का हिस्सा बनकर मोर्चे पर रहे। सज्जन इन्फेंट्री में भी इलाके के फौजियों ने अपनी खिदमत अंजाम दी। उन्होंने कहा कि जिन घरों से बेटे वतन की हिफाजत के लिए निकले और जिन खानदानों ने अपने सपूतों की कुर्बानी दी, उनके इलाके के लिए ‘मिनी पाकिस्तान’ जैसे अल्फाज इस्तेमाल किया जाना बेहद तकलीफदेह है। एक वक्ता ने सैनिक स्कूल में पढ़ाई जाने वाली पुस्तक दिखाते हुए कहा कि खांजीपीर के वीर सपूतों का जिक्र उसमें मौजूद है। उन्होंने कहा, “अगर तारीख मालूम नहीं है तो पहले उसका मुताला कीजिए। सैनिक स्कूल की किताब में हमारे सपूतों का जिक्र है। फिर बताइए कि जिस सरजमीं ने मुल्क को जवान दिए, उसे ऐसे अल्फाज से कैसे पुकारा जा सकता है?” महाराणा शंभूसिंह से महाराणा भोपालसिंह तक—फौजी विरासत का हवाला प्रेसवार्ता में वक्ताओं ने खांजीपीर की तारीख का हवाला देते हुए कहा कि इलाके का फौजी तअल्लुक मेवाड़ के पुराने दौर से जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि महाराणा शंभूसिंहजी के कालखंड में फौजी दस्ते तैयार किए गए। बाद में महाराणा सज्जनसिंहजी के दौर में सज्जन इन्फेंट्री का गठन हुआ, जिसमें मुस्लिम, राजपूत और मेवात के मुस्लिम सैनिकों की बड़ी तादाद थी। वक्ताओं के अनुसार महाराणा भोपालसिंहजी के दौर में सज्जन इन्फेंट्री के रणबांकुरों और उनके खानदानों को यहां आबाद किया गया। खांजीपीर का नाम भोपालगंज रखा गया तथा शंभू पलटन के नाम से कब्रिस्तान के लिए जमीन दी गई। वक्ताओं ने कहा कि इस तारीख से साफ है कि इलाके की बुनियाद मुश्तरका विरासत और मेवाड़ की साझा तहजीब से जुड़ी हुई है। ‘लक्ष्यराजसिंह-विश्वराजसिंह बताएं, हमारे पुरखों का क्या किरदार था’ प्रेसवार्ता में लक्ष्यराजसिंह और विश्वराजसिंह से भी अपील की गई। वक्ताओं ने कहा कि मेवाड़ के पूर्व राजघराने के दौर में यहां के सपूतों ने मेवाड़ की सरजमीं के लिए फौजी फर्ज निभाया। उन्होंने कहा, “लक्ष्यराजसिंह जी और विश्वराजसिंह जी आगे आएं और बताएं कि आपके पुरखों के दौर में हमारे सपूतों ने मेवाड़ के लिए क्या किरदार अदा किया था। उन्होंने अपनी जान और जवानी इस सरजमीं की हिफाजत के लिए लगाई।” वक्ताओं ने कहा कि इस तारीख को जानने के बाद ही खांजीपीर को लेकर कोई राय कायम की जानी चाहिए। ‘इलाके की असल तस्वीर मोहल्लों के रिश्तों में दिखाई देती है’ प्रेसवार्ता में खांजीपीर के सामाजिक ताने-बाने का जिक्र करते हुए वक्ताओं ने कहा कि यहां वाल्मीकि कॉलोनी, सालवी कॉलोनी और दूसरे समाजों की बस्तियां आसपास हैं। महाजन समाज के लोग कारोबार करते हैं और रोजमर्रा की जिंदगी में सभी समुदाय एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा, “वाल्मीकि कॉलोनी वालों से पूछिए, सालवी समाज के लोगों से पूछिए, दूध-दही और किराना कारोबारियों से पूछिए—किसी से पूछ लीजिए कि खांजीपीर के लोगों से उन्हें क्या परेशानी है।” वक्ताओं के मुताबिक इलाके की जमीनी हकीकत आपसी मेल-मिलाप, यकजहती और भाईचारे की है। ‘तालीम से लेकर प्रशासन तक, हर शोबे में इलाके की नुमाइंदगी’ वक्ताओं ने खांजीपीर की तालीमी और पेशेवर उपलब्धियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यहां के नौजवान पुलिस, शिक्षा, चिकित्सा, इंजीनियरिंग और प्रशासन समेत कई शोबों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। प्रेसवार्ता में दावा किया गया कि क्षेत्र से डॉक्टर, इंजीनियर, चीफ इंजीनियर, शिक्षक, अधिवक्ता और राजपत्रित अधिकारी निकले हैं। करीब 10 से 15 राजपत्रित अधिकारी, शिक्षक और एडवोकेट क्षेत्र से जुड़े होने की बात कही गई। वक्ताओं ने कहा कि इलाके की बेटियां भी तालीम में शानदार कामयाबी हासिल कर रही हैं और राज्यपाल स्तर पर सम्मान पा चुकी हैं। “हमारे बच्चे अच्छे नंबर ला रहे हैं, बेटियां कामयाबी के परचम लहरा रही हैं। यही खांजीपीर की तस्वीर है।” ‘बोलने से पहले तारीख और पसमंजर देखिए’ वक्ताओं ने विधायक ताराचंद जैन से कहा कि सियासत में मुख्तलिफ राय होना स्वाभाविक है, लेकिन किसी पूरे इलाके के लिए ऐसा लफ्ज इस्तेमाल करना सामाजिक तौर पर संवेदनशील मसला है। उन्होंने कहा, “बयान देने से पहले तारीख और पसमंजर का मुताला जरूरी है। जिस सरजमीं के लोगों ने मेवाड़ के लिए लड़ाई लड़ी और मुल्क की सरहदों पर फर्ज निभाया, उसके लिए ऐसे अल्फाज हमें गंवारा नहीं।” वक्ताओं ने कहा कि यदि विधायक को इलाके के इतिहास पर कोई तश्वीश या इख्तिलाफ है तो पुराने दस्तावेज देखे जा सकते हैं। “विधायक साहब चाहें तो दरबार से कागजात निकलवाएं। जरूरत हो तो हम अपने दस्तावेज भी पेश करेंगे। हम अपनी तारीख के बारे में किसी भी बहस के लिए तैयार हैं।” ‘रक्षाबंधन पर यही दुआ—यकजहती की डोर सलामत रहे’ प्रेसवार्ता में रक्षाबंधन का हवाला देते हुए वक्ताओं ने कहा कि उदयपुर की सामाजिक खूबसूरती आपसी रिश्तों में है। उन्होंने कहा, “रक्षाबंधन हमें रिश्तों की हिफाजत का पैगाम देता है। हमारी दुआ है कि ये बंधन आबाद रहें, यकजहती कायम रहे और कोई सियासी बयान इन रिश्तों में दरार पैदा न कर सके।” ‘सार्वजनिक माफी मांगें, बयान वापस लें’ अंत में खांजीपीर के बाशिंदों ने विधायक ताराचंद जैन से सार्वजनिक माफी मांगने और टिप्पणी वापस लेने की मांग की। साथ ही राज्यपाल से मामले में दखल की गुजारिश करते हुए विधायक के इस्तीफे की मांग भी उठाई। वक्ताओं ने कहा कि उनका एतराज किसी समुदाय के खिलाफ नहीं है। वे चाहते हैं कि सार्वजनिक जीवन में ऐसे अल्फाज से गुरेज किया जाए, जो किसी पूरे इलाके या समुदाय के जज्बात को ठेस पहुंचाएं। खांजीपीर के लोगों ने कहा कि उनकी पहचान किसी सियासी जुमले से नहीं, बल्कि अपनी तारीख, फौजी विरासत, तालीमी कामयाबी, सामाजिक यकजहती और मुल्क के लिए अदा किए गए फर्ज से है। उन्होंने कहा—“हमारी सरजमीं ने मेवाड़ को सपूत दिए हैं और मुल्क को फौजी। इस तारीख पर हमें फख्र है और इस विरासत की हिफाजत हमारा फर्ज है।” Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. 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