24 News update उदयपुर। उदयपुर संभाग मुख्यालय पर यदि बच्चे कॉमर्स या सीए की पढाई कर रहे हैं तो उनकी पहली पसंद एसपी सर है। विद्यार्थियों का मानना है कि पढने में जो आनंद एसपी सर से आता है वह कहीं और किसी के पास नहीं। पढाने का तरीका ऐसा है कि एक बार में सुनने मात्र से दिलों दिमाग में विषय वस्तु अपनी जगह बना लेता है। एसपी सर से तीन दशक से भी ज्यादा समय में करीब 20 हजार विद्यार्थी कॉमर्स पढ चुके है तो उनके पढाए गए करीब तीन हजार बच्चे सीए बन आज देश—दुनिया में व्यवसायिक व एमएनसी में उंचाईयां छू रहे है।पिता संतोषसिंह अरोडा और माता मनजीत कौर के घर आंगन में 6 मार्च 1973 को जन्मे सुमित पाल सिंह, जो कि उदयपुर में तीन दशक से भी ज्यादा समय से 10वीं, 12वी और सीए पढ रहे बच्चों को पढा रहे है और संभाग मुख्यालय पर अपना नाम पाने के साथ ही उन्होंने एक मुकाम भी हासिल किया है। बचपन में आर्थिक तंगी में गुजर बसर कर शिक्षा क्षेत्र में अपनी अलग ही पहचान बना कॉमर्स और सीए विद्यार्थियों के बीच ख्यातिप्राप्त एसपी सर, सुमित पाल सिंह अरोडा बताते हैं कि उनका बचपन भीलवाडा में गुजरा, जहां उनके पिता संतोष सिंह अरोडा गांव गुडला में ईंट भट्टा चलाते थे। एक समय ऐसा आया कि पिताजी को इस व्यवसाय में बडा घाटा हुआ और उसके बाद वे उदयपुर आ गए। उन्होंने बीएन इंस्टीट्यूट द्वारा संचालित विवेक विद्या मंदिर स्कूल की पांचवी कक्षा में प्रवेश लिया। यही पढते हुए उन्होंने 10वीं बोर्ड की परीक्षा करीब 70 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण की। आर्थिक तंगी के बीच गुजरते हुए उन्होंने पढाई में और मेहनत कर सत्र 1989—90 में 12वीं बोर्ड की परीक्षा 77 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण करते हुए बोर्ड मेरिट सूची में 8वां स्थान प्राप्त किया। इस उपलब्धि ने उनके हौंसलों को पंख लगा दिए। अब उन्हें पढने के साथ ही पढाने में भी रुचि जगी। सबसे पहले अपने ही छोटे भाई तनवीरसिंह को पढाने से शुरुआत की। तनवीर सिंह के मित्र भी पढने में साथ हो गए और इस तरह तीन—चार बच्चों को पढाने के साथ ज्ञान फैलाने की ओर कदम आगे बढ चले। इसके बाद कभी पीछे मुडकर देखने का मानस नहीं हुआ। एसपी सर ने तनवीर सिंह के बाद उससे छोटे भाई बिन्नी सिंह को भी साथ लेकर पढाया और इस काबिल बनाया कि आज वे दोनों भाईयों ने भी पढाने में अपना नाम और मुकाम हासिल किया है। तनवीर सिंह और बिन्नी सिंह आज दोनों छोटे भाई भी ज्ञान की ज्योत फैलाने का काम कर रहे है। सुमित पाल सिंह बताते हैं पढकर पढाने में इतना संतोष मिलता है और मन प्रफुल्लित होता है कि वे उसी में रम गए और इसी तरह तीन दशक से ज्यादा समय गुजर गया। उन्होंने बताया कि नाना के निधन पर वे बचपन में टाउनहॉल के सामने स्थित अपने मामा की सेनेट्री दुकान पर बैठा करते थे जहां काम करते हुए हिसाब किताब का पता चला। तब वे 7वी—8वीं में पढते थे। इसी हिसाब किताब ने सामाजिक और व्यवहासिक जीवन सिखाया और आगे चलकर उन्होंने कॉमर्स विषय चुना और फिर सीए की पढाई की। यहां भी उनका आर्थिक तंगी ने पीछा नहीं छोडा और उन्हें सीए पूरा करने के दौरान बीच में चार साल का गेप करना पडा। आर्थिक स्थिति सुधरी तब उन्होंने वर्ष 2003 में अपना सीए पूरा किया। सीए कंपनी न खोलने और कोई नौकरी न करने के पीछे सीए सुमित पाल सिंह का कहना है कि पढने और पढाने में ही इतना संतोष मिला और आनंद आया कि दूसरा विकल्प कभी दिमाग में सोचने को भी नहीं आया। करीब ढाई दशक तक अपने ही घर पर क्लास लगाकर सुबह से शाम तक कॉमर्स और सीए बच्चों को पढाने के बाद वे वर्ष 2014 में शहर के एक इंस्टीट्यूट के साथ जुडे जहां करीब बीते 14 वर्ष से बच्चों को कॉमर्स और सीए पढाने के साथ ही खुद के अध्ययन के लिए भी समय निकाल रहे है। एसपी सर आज अपने पढाने और ज्ञान का प्रकाश फैलाने से संतुष्ट है और उन्हें बडी खुशी है कि उनसे पढकर कर करीब 20 हजार बच्चे आगे बढे और करीब तीन हजार बच्चे सीए बनकर देश दुनिया में बडे प्रतिष्ठानों में सेवाएं दे रहे है। यह ज्ञान का प्रकाश ही है कि उदयपुर में कॉमर्स टीचर के बारे में शिक्षा क्षेत्र में पूछने मात्र पर बच्चे बच्चे की जुबान पर एक ही नाम आता है एसपी सर। मतलब सुमितपाल सिंह अरोडा। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation 1.58 ग्राम MDMA के साथ जोधपुर का हिस्ट्रीशीटर गिरफ्तार, 26 केस दर्ज खाने में कॉकरोच की शिकायत, भड़का विवाद, मीरा रेस्टोरेंट में गुजराती पर्यटक से मारपीट, एफआईआर