24 News Update अजमेर। अजमेर शहर में शुक्रवार रात से जारी भारी बारिश ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया। जुलाई माह में अब तक रिकॉर्ड 609 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जो कि सामान्य मानसून सीजन की कुल औसत 458 मिमी बारिश से कहीं अधिक है। यह बीते 50 वर्षों में जुलाई में दर्ज सबसे अधिक वर्षा है। इससे पहले 1975 में ऐसी मूसलाधार बारिश हुई थी, जब शहर के निचले इलाके पानी में डूब गए थे। लगातार बारिश के कारण आनासागर झील का जलस्तर ओवरफ्लो हो गया, जिससे चौपाटी क्षेत्र सहित कई रिहायशी कॉलोनियों में पानी घुस गया। सागर विहार, वैशाली नगर, वन विहार, सुनहरी कॉलोनी, आम का तालाब, उदयगंज, गुलाब बाड़ी, केरियों की ढाणी सहित 20 से अधिक कॉलोनियां जलमग्न हो चुकी हैं। कई इलाकों में घरों के भीतर तीन फीट तक पानी भर गया है। जलभराव के चलते लोग छतों पर शरण लेने को मजबूर हैं। कुछ स्थानों पर लोग घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।
जनजीवन पूरी तरह प्रभावित
सड़कों पर चार फीट तक पानी जमा हो गया है। दरगाह बाजार क्षेत्र में कई लोग तेज बहाव में बह गए। शहर की प्रमुख सड़कों—जयपुर रोड, हाथीभाटा, कचहरी रोड, तोपदड़ा, महावीर सर्किल, मेडिकल कॉलेज, कालाबाग, कुंदन नगर, अलवरगेट, राबड़िया मोहल्ला व गुर्जर धरती—में जलभराव से यातायात ठप है। सड़कों पर गड्ढे दिखाई नहीं दे रहे और वाहन फंस रहे हैं। वैशाली नगर में बारिश के पानी में मछलियां तक बहती नजर आईं।
घर बने जलाशय, बिजली-पानी संकट गहराया
कॉलोनियों में दूध, पीने के पानी व आवश्यक वस्तुओं की किल्लत पैदा हो गई है। कई घरों में बिजली आपूर्ति दो दिन से ठप है। मोबाइल की बैटरियां खत्म हो चुकी हैं। सागर विहार निवासी मनोज व राजेश मोटवानी ने बताया कि कॉलोनी में सांप घूम रहे हैं और टॉयलेट सीट से पानी निकल रहा है। बच्चों को छत पर शरण लेनी पड़ी है। गाड़ियां पानी में डूब चुकी हैं और लोग ऑटो से जरूरी सामान लाने को मजबूर हैं। बारिश का पानी संभाग के सबसे बड़े जवाहरलाल नेहरू (JLN) अस्पताल तक पहुंच गया है। वार्ड, ओपीडी, कॉरिडोर में पानी भरने के बावजूद चिकित्सकों ने मरीजों की जांच जारी रखी। मरीजों को पानी में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा।
प्रशासन की तैयारियां नाकाम
मानसून पूर्व नगर निगम ने बड़े स्तर पर नालों व सीवरेज की सफाई के दावे किए थे, लेकिन भारी बारिश ने सभी दावों की पोल खोल दी। प्रशासन की 400 करोड़ रुपये की मास्टर ड्रेनेज योजना अब भी सरकारी फाइलों में दबी पड़ी है। इस योजना में जलनिकासी के लिए एस्केप चैनल गहरे करने, पुलियों की ऊंचाई बढ़ाने, सीवरेज चैंबर को स्थानांतरित करने, तथा सीसी सड़कों व नए नालों के निर्माण का प्रस्ताव था। अनुमोदन के अभाव में योजना ठप है और शहर हर साल जलभराव से जूझता है। जिला कलेक्टर लोकबंधु के निर्देश पर SDRF व सिविल डिफेंस की टीमें तैनात की गई हैं। सागर विहार कॉलोनी समेत प्रभावित इलाकों में नाव के जरिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। नगर निगम द्वारा पंप लगाए गए हैं, पर अधिकांश स्थानों से पानी नहीं निकल पा रहा। 18 जुलाई 1975 को जिस प्रकार अजमेर बाढ़ में डूबा था, लगभग वैसा ही दृश्य शुक्रवार को दोहराया गया। फर्क इतना है कि तब तकनीक और बजट सीमित थे, आज सब कुछ है लेकिन कार्यान्वयन नहीं। यदि समय रहते मास्टर प्लान को लागू नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में अजमेर हर मानसून में एक बाढ़ग्रस्त शहर के रूप में देखा जाएगा।


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By desk 24newsupdate

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